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‘अगर मुस्लिम देशों में तीन तलाक नहीं है तो भारत में इसे हटाना ग़लत कैसे’

भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार केंद्र ने मुस्लिमों में बहुविवाह, निकाह हलाला और एक साथ तीन तलाक के चलन का शीर्ष अदालत में विरोध किया था।
Author पटना | October 14, 2016 19:06 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है। (रॉयटर्स फाइल फोटो)

एक साथ तीन तलाक के मुद्दे पर केंद्र का बचाव करते हुए कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शुक्रवार (14 अक्टूबर) को कहा कि जब एक दर्जन से अधिक इस्लामी देश कानून बनाकर इस चलन का विनियमन कर सकते है तो भारत जैसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ देश के लिए इसे किस प्रकार गलत माना जा सकता है। उनकी टिप्पणी इस चलन पर उच्चतम न्यायालय में केंद्र के हलफनामा का ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा विरोध किए जाने के एक दिन बाद आया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग की चर्चा का भी बहिष्कार किया।

प्रसाद ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘पाकिस्तान, ट्यूनीशिया, मोरक्को, ईरान और मिस्र जैसे एक दर्जन से ज्यादा इस्लामी देशों ने एक साथ तीन तलाक का विनियमन किया है। अगर इस्लामी देश कानून बनाकर चलन का विनियमन कर सकते हैं, और इसे शरिया के खिलाफ नहीं पाया गया है, तो यह भारत में कैसे गलत हो सकता है, जो धर्मनिरपेक्ष देश है।’ मंत्री ने हालांकि समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि विधि आयोग इस पर विचार कर रहा है और उसने समाज के विभिन्न तबकों से राय मांगी है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह उनके विचाराधीन है, इसलिए उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी है। भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार सात अक्तूबर को केंद्र ने मुस्लिमों में बहुविवाह, निकाह हलाला और एक साथ तीन तलाक के चलन का उच्चतम न्यायालय में विरोध किया था।

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First Published on October 14, 2016 7:06 pm

  1. I
    Iqbal Siddiqui
    Oct 15, 2016 at 7:29 am
    muslim va anya sabhi deshon mein toh gomans khule aam bikta hai to bharat mein pabandi kyun. aisi min dene se pahle khule dimaag se soch liya karo. dusre deshon mein kya hota hai uski misal na do apna desh dekho apne desh ki khoobsurti dekho.
    Reply
    1. K
      KP
      Oct 15, 2016 at 8:54 am
      दूसरे कुछ देशों में वृति भी जायज है तो क्या भारत में भी जायज कर दे. जो चीजे ी हो उसी पे बात करे तो बेहतर भारत बन सकता है. एक देश, एक कानून और एक निशान ही होना चाहिए.
      Reply
      1. S
        Syed Shadab
        Oct 15, 2016 at 1:06 pm
        hahahaH रवि शंकर प्रसाद, क्या आप मुस्लिम कन्ट्रीज से कम्पटीशन कर रहे हैं? दूसरी बात तीन बार तलाक़ बोल देने से तलाक़ नहीं होता है. तलाक देने के बहुत सरे नियम कानून हैं. जिन लोगो को इस मुद्दे पर बात करनी है पहले वो क़ुरान पढ़े. तलाक के kanoon को समझे, फिर आकर यहाँ कानून बनाये. और या फिर koi naya GHOTALA hone wala है jiske liye जनता को इस तलाक़ के टॉपिक में उलझाया गया है ?
        Reply
        1. U
          Uttam singh
          Oct 17, 2016 at 3:03 pm
          This right
          Reply
        2. S
          Syed Shadab
          Oct 15, 2016 at 1:09 pm
          पहले इंडिया घूम लो, यहाँ क्या hota hai kya nahi hota hai, use jan लो, fir यहाँ likhna.
          Reply
          1. शोम रतूड़ी
            Oct 15, 2016 at 2:53 am
            एक सेक्युलर राज्य के नाते देश में सभी धर्मों के लिए सामान कानून लागू होना चाहिए,इस बात को संविधान में शामिल भी किया गया है और इसे लागू करने का दायित्व राज्यों पर छोड़ दिया गया.तब देश नया नया बना था इसलिए इसे पूरे देश में लागू नही किया गया लेकिन अब न केवल हमारा देश बल्कि पूरा विश्व बदल गया,अब ी वक्त है न केवल इस महिला विरोधी कानून बल्कि समस्त ऐसे कानून बदलने चाहिए जो महिलाओं के हितों पर कुठाराघात करते हों,इसमें राजनीती नही होनी चाहिए.इसके विरोध में MPLB है जो पुरुष बहुल है.
            Reply
            1. S
              SUNIL
              Oct 15, 2016 at 6:31 pm
              जायदI BEBI ज्यादा BACCHI दैश में अपने पापुलेसेन बढ़ाने के लिया तीन तलाक का समर्थन कर रहा है सोयब डेली नई नई BEBI
              Reply
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              सबरंग