May 24, 2017

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बिहार में अधिक सख़्त नियमों के साथ नया शराबबंदी कानून लागू, नीतीश बोले- राष्ट्रपिता को यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है

पटना उच्च न्यायालय के शराबबंदी को लेकर बिहार सरकार उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करेगी।

Author पटना | October 2, 2016 19:58 pm
पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव। (पीटीआई फोटो/2 अक्टूबर, 2016)

पटना उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व गत पांच अप्रैल को अधिसूचित शराबबंदी कानून को निरस्त किए जाने के दो दिनों के बाद बिहार सरकार रविवार (2 अक्टूबर) को नया शराबबंदी कानून लागू किया है जिसमें अधिक कड़े प्रावधान है। नए शराबबंदी कानून में कुछ अधिक कड़े प्रावधान यथा कारावास की अवधि बढ़ाए जाने, जुर्माने की राशि में वृद्धि, किसी घर से शराब की बोतल बरामद होने की स्थिति में सभी व्यस्क की गिरफ्तारी तथा शराबबंदी का उल्लंघन बार-बार करने पर किसी भी इलाके पर सामुहिक जुर्माना आदि शामिल किए गए हैं।
गांधी जयंती के अवसर पर इस नए शराबबंदी कानून के लागू हो जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में रविवार को संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में संकल्प लिया गया कि राज्य में शराबबंदी को लेकर हमारा निश्चय अटल है और इस सामाजिक बदलाव के कार्य में हम पूरी इच्छा शक्ति के साथ लगे रहेंगे।

मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद और अन्य मंत्रियों तथा मुख्यसचिव अंजनी कुमार सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में नीतीश ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी जयंती के पुनीत दिवस पर मद्य निषेध का नया कानून लागू हुआ है। चंपारण सत्याग्रह (1917) के सौवें साल के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है। नीतीश ने कहा कि प्रदेश में गत अप्रैल से लागू शराबबंदी एक जन चेतना का रूप ले चुकी है और प्रदेश में पूर्ण मद्य निषेध को लागू कर राज्य में सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रखी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता गांधी की स्मृति में इस जन चेतना को और तेज करते रहेंगे, इसके लिए और भी सशक्त अभियान चलाया जाएगा।

गत 4 अगस्त को बिहार विधानमंडल द्वारा पारित और गत 7 सितंबर को राज्यपाल रामनाथ कोविंद द्वारा अनुमोदित नया शराबबंदी कानून (बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016) जिसे बिहार सरकार गांधी जयंती के अवसर लागू करने का गत 14 सितंबर को निर्णय ले लिया था। नए शराबबंदी कानून में किसी उत्पाद अथवा पुलिस अधिकारी द्वारा इस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को तंग करने के लिए तलाशी, जब्ती, हिरासत अथवा गिरफ्तार करने पर उसके खिलाफ मुकदमा चलाए जाने का प्रावधान किया गया है तथा दोष सिद्ध होने पर तीन साल का कारावास और एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नीतीश ने कहा कि संपूर्ण बिहार में शराबबंदी के प्रति जनसामान्य विशेषकर महिलाओं में काफी उत्साह है। सामान्य जन भावान हमेशा से शराब के विरूद्ध रही है और इसलिए हमारे निर्णय को अपार जनसमर्थन प्राप्त हुआ है। सरकार ने सभी के सहयोग से शराबबंदी के इस सामाजिक अभियान को जन आंदोलन में बदला है। साथ ही प्रभावकारी कार्यान्यवन सुनिश्चित करने तथा इसे नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त कानूनी प्रावधान भी किए गए हैं।

बिहार में शराबबंदी को लेकर आलोचनाओं पर नीतीश ने मीडिकर्मियों के साथ किसी से भी कहा कि वे अपने पंसद के किसी गांव में जाकर शराबबंदी के प्रभाव की सच्चाई जा सकते हैं। उन्होंने शराबबंदी लागू किए जाने को सही ठहराने के लिए उच्चतम न्यायालय के एक आदेश का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि शराब की बिक्री और उपभोग नागरिक का मूल अधिकार नहीं है। नीतीश ने कहा कि इसके अलावा यह राज्य के नीति निर्देशक के अनुसार है। ‘मैं अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रहा हूं।’ यह पूछे जाने पर कि पटना उच्च न्यायालय के शराबबंदी को लेकर गत पांच अप्रैल की अधिसूचना को खारिज कर दिए जाने के बावजूद सरकार ने यह नया कानून लाया, नीतीश ने कहा कि इस नए कानून के लागू हो जाने के बाद पुराने कानून स्वत: समाप्त हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जहां तक पटना उच्च न्यायालय के शराबबंदी को लेकर गत पांच अप्रैल की अधिसूचना को लेकर निर्णय का प्रश्न है तो उसके खिलाफ सरकार उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करेगी। सरकार ऐसा पांच अप्रैल के बाद लिए गए निर्णय प्रभावित नहीं हो इसको ध्यान में रखकर करने जा रही है। बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी के सरकार द्वारा पूर्व में लाए गए शराबबंदी कानून को ‘तालीबानी कानून’ बताए जाने तथा जल्दीबाजी में नया शराबबंदी कानून नहीं लाने और इसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलाकर विचार विमर्श कर इसे लाए जाने का सुझाव दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने उन पर इसको लेकर दोहरा चरित्र रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक खास नेता हैं जो केवल खबरों में बने रहने के लिए प्रत्येक दिन बयानबाजी करते रहते हैं, पर उनकी प्रतिक्रिया का जवाब देने के बजाए वे काम करने में विश्वास रखते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा या किसी अन्य दल अथव नागरिक का कोई सकारात्मक और ठोस सुझाव प्राप्त होने पर उस पर विचार किया जाएगा। सुशील के पुराने शराबबंदी कानून में संशोधन के लिए बिहार विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाए जाने का सुझाव दिए जाने की ओर इशारा करते हुए नीतीश ने कहा कि सदन का शीतकालीन सत्र तो शुरू होने वाला है उसमें सदस्य अपना सुझाव रखेंगे। नीतीश के शराबबंदी के संकल्प को बल प्रदान करने के लिए जन चेतना के वास्ते उनकी पार्टी जदयू द्वारा रविवार को पूरे प्रदेश में प्रभात फेरी और संकल्प सभा का आयोजन किया गया। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश ने बिहार में शराबबंदी को लागू करने के बाद इसे देश के अन्य भाग में लागू करने को लेकर कई स्थानों झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान का भ्रमण कर चुके हैं।

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First Published on October 2, 2016 7:58 pm

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