December 09, 2016

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बिहार: नीतीश का शराबबंदी कानून को सरल करने से इनकार

हम लोगों ने दो अक्तूबर से जिस शराबबंदी कानून लागू किया है, उसे बिहार विधानमंडल ने पारित किया है।

Author पटना | November 3, 2016 04:15 am
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को शराबंबदी कानून को सरल बनाने की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि बिहार उत्पाद व मद्य निषेध की ओर से शराबबंदी कानून पर आम राय मांगता हुआ विज्ञापन सिर्फ आम राय लेने के लिए था। विज्ञापन में सरकार केवल लोगों का सुझाव मांग रही है।
सचिवालय में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के शराबंबदी को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में नीतीश ने कहा कि हमने पहले आबकारी कानून में संशोधन किया था। उसके बाद शराबबंदी लागू किया गया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी पर पटना हाई कोर्ट के फैसले को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने अदालत के फैसले को स्थगित कर दिया है। न्यायालय में बिहार सरकार का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रहमण्यम ने रखा था। नीतीश ने कहा कि अधिवक्ता सुब्रहमण्यम ने शराबबंदी मुहिम का पूरे तौर पर समर्थन किया था। वह मात्र एक रुपए के टोकन फीस पर बिहार सरकार का पक्ष रख रहे हैं। उनसे हमारी फोन पर बातचीत हुई थी, हमने तय किया था कि उनसे एक बार मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इसी मामले में मंगलवार को मैं उनसे मिलने नयी दिल्ली गया था।

बिहार के मुख्य सचिव, उत्पाद व मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव व मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव भी मेरे साथ थे। उनके साथ पूरी बातचीत हुयी। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों ने दो अक्तूबर से जिस शराबबंदी कानून लागू किया है, उसे बिहार विधानमंडल ने पारित किया है। राज्यपाल ने अपनी सहमति प्रदान की है। लेकिन आप जानते हैं कि जब कोई चीज लाई जाती है तो पक्ष में चाहे जितना बड़ा समूह हो उसकी मुखालफत करने वाले लोग भी होते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शुरू में मजाक बनाने वाले और बाद में विरोध करने वालों ने हमेशा इस बात को आधार बनाया कि कानून के प्रावधान ड्रैकोनियन हैं।

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कुछ लोग इनकी आलोचना कर रहे हैं और करते रहेंगे। लेकिन मैंने उनसे अनुरोध किया है कि वे इसे बेहतर बनाने के लिए अपना सुझाव दें। उन्होंने कहा कि अगर कानून ड्रैकोनियन या तालिबानी है तो इसको न ड्रैकोनियन और गैर तालिबानी करने के लिए क्या करना चाहिए, यह सुझाव मैंने बार बार मांगा। लेकिन उनकी तरफ से कोई सुझाव नहीं आया। इसलिए उत्पाद विभाग ने विज्ञापन निकालकर लोगों का सुझाव मांगा है। यहां कानून को सरल करने की बात नहीं है, सिर्फ बेहतरी के लिए सुझाव मांगा जा रहा है। नीतीश ने कहा कि लोगोंं से 12 नवंबर तक सुझाव देने को कहा गया है।

मेरी इच्छा है कि 14 नवंबर को सचिवालय पर संवाद आयोजित कर लोगों से सुझाव मांगा जाए। हम लोगों की भावना का आदर करते हैं यह बहुत बड़ा काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वह मानता है कि इस काम में सबका सहयोग मिलना चाहिए। वह उन लोगों को भी अवसर देता है जो इसका विरोध कर रहे हैं। वे शराबंदी से समझौता किए बगैर अपने सुझाव दें कि किन बिंदुओं पर उन्हें ऐतराज है। यह नहीं चलेगा कि आप शराबबंदी के खिलाफ हैं इसलिए किसी न किसी प्रकार से आप इसकी आलोचना करें। नीतीश ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू हुआ है और पूरी मजबूती से रहेगा।

शराबबंदी के सामाजिक व आर्थिक प्रभावों का हम अध्ययन भी करवा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में जो हमारी तरफ से पक्ष रखा जाएगा उसमें सभी अध्ययन और रिपोर्ट भी पेश किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम स्वामी विवेकानंद जी की कथनी में विश्वास करते हैं कि जब कोई अच्छा काम करेंगे तो लोग पहले मजाक उड़ाएंगे, फिर विरोध करेंगे और अंत में सब साथ आ जाएंगे। अब दो दौर गुजर चुके हैं अब हम तीसरे दौर में हैं। नीतीश ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि शराबबंदी के अलावा इनको कोई काम नहीं है तो आप देख रहे हैं कि कितना काम हो रहा है। लोक शिकायत निवारण कानून हो और सात निश्चय की योजनाएं हों सब एक एक कर लागू कर रहे हैं। सब मिलाकर कुल 20 से 25 योजनाएं हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि आगामी 20 नवंबर को जो रिपोर्ट कार्ड पेश किया जाएगा

 

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First Published on November 3, 2016 4:15 am

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