December 03, 2016

ताज़ा खबर

 

मां की मौत के बाद भटकता रहा बेटा, मगर 500, 1000 के नोट देख किसी ने नहीं दिया कफन

काले धन पर मोदी सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक आम जनता पर भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है। लोगों को अंतिम संस्कार के लिए कफन भी नसीब नहीं हो रहा है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

काले धन पर मोदी सरकार के सर्जिकल स्ट्राइक का साइड इफेक्ट जनता पर पड़ रहा और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को अंतिम संस्कार के लिए कफन भी नसीब नहीं हो पा रहा है। ऐसा ही मामला बिहार के मधेपुरा में भी सामने आया। मधेपुरा वार्ड नंबर 11 में रहने वाले मो ऐनाउल को अपनी मां की मौत के बाद कफन के लिए दर-दर भटकाना पड़ा। लेकिन किसी भी दुकान वाले को उनकी इस हालत पर तरस नहीं आया। ऐसा नहीं था कि उनके पास पैसे नहीं थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐनाउल के पास 500 और 1000 रुपए के नोट थे। वह दुकानदारों के सामने पैसे लेकर कफन देने की गुहार लगाता रहे लेकिन कोई भी दुकानदार कफन देने के लिए तैयार नहीं हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक दोपहर बाद इलाके की पार्षद के पति ने उन्हें पैसे दिए तब जाकर उन्होंने अपनी मां के लिए कफन खरीदा। दरअसल मंगलवार रात 12 बजे के बाद से बड़े नोट बंद होने के ऐलान के बाद कोई भी नोट लेने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि मोदी सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 11 नवंबर तक कुछ स्थितियों में पुराने नोट चलने देने का एलान किया था। जिसमें शवदाह गृहों पर भी 11 नवंबर की रात 12 बजे तक पुराने नोट चलेंगे।

वीडियो: 500, 1000 के नोट बंद होने से नहीं हो पा रहा महिला का अंतिम संस्‍कार

ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में भी सामने आया था। यहां महिला का अंतिम संस्कार इसलिए नहीं हो पा रहा क्योंकि उनके परिवार के पास 500 और 1000 के नोट थे। छतरपुर जिले के मातवान मोहल्ले में रहने वाली 70 साल की राजबाई की मंगलवार (8 नवंबर) को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। लेकिन अब उनका अंतिम संस्कार होने में परेशानी आ रही है। अंतिम संस्कार न होने की मुख्य वजह 1000 और 500 के नोटों का न चलना बताया जा रहा है। मृतक के परिजनों का कहना है कि घर में 100 के महज 2-4 नोट ही हैं बाकी 500 और 1000 के हैं। सरकार के फैसले की वजह से अब लोग उनसे नोट नहीं ले रहे। परिवार के एक सदस्य ने बताया, ‘जब हम अंत्योष्टि का सामान लेने बाजार गए तो दुकानदारों ने 1000 और 500 के नोटों को लेने से मना कर दिया है। जिसके कारण हम खरीददारी नहीं कर पाये और हमें खालीहाथ घर वापस लौटना पड़ा। परिवार मोहल्लेवालों, और रिश्तेदारों, परिचितों से 100 और 50 के नोट एकत्रित कर रहे हैं। तब कहीं जाकर बाजार में जाकर सामन लेकर आएंगे तब कहीं अंत्योष्टि हो सकेगी।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 9, 2016 8:44 pm

सबसे ज्‍यादा पढ़ी गईंं खबरें

सबरंग