December 07, 2016

ताज़ा खबर

 

बिहार: कूड़ा बीनने वाले बच्चों के लिए ‘टीचर’ बना ये पुलिसवाला, रेलवे स्टेशन पर लगाता है क्लास

ऐसी ही एक पहल बिहार के पूर्णिया जिले में भी सामने आई है। बिहार के पूर्णिया जिला में अपनी ड्यूटी से फुर्सत पाने के बाद पुलिसकर्मी दूरदराज इलाके में अशिक्षित बच्चों और व्यस्कों को पढाने के लिए ‘शाम की पाठशाला’ लगाते हैं।

कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ाता पुलिसकर्मी। (ANI Photo)

राज्य की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों के कंधे पर होती है। बिहार के पुलिसकर्मी इसके अलावा एक और जिम्मेदारी निभा रहे हैं, यह जिम्मेदारी सड़क पर कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ाने की है। बिहार के गया जिले के प्रवीण कुमार बच्चों के लिए पुलिसवाले नहीं बल्कि उनके मास्टर हैं। वह इन बच्चों को शिक्षित करके उनका जीवन संवारना चाहते हैं। प्रवीण कुमार ने बताया कि मुझे इन बच्चों को शिक्षित करने का निर्देश मिला है। इसके अलावा डीएसपी और इंस्पेक्टर भी बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं, प्रवीण की ‘स्टूडेंट’ सुमन ने कहा कि हम कूड़ा बिनने वाले हैं लेकिन हम अब यहां पढ़ाई कर रहे हैं। मैं भी एक दिन पुलिस सेवा में जाना चाहती हूं। फोटो में पुलिसकर्मी बच्चों को रेलवे स्टेशन पर पढ़ाते हुए नजर आ रहा है।

ऐसी ही एक पहल बिहार के पूर्णिया जिले में भी सामने आई है। बिहार के पूर्णिया जिला में अपनी ड्यूटी से फुर्सत पाने के बाद पुलिसकर्मी दूरदराज इलाके में अशिक्षित बच्चों और व्यस्कों को पढाने के लिए ‘शाम की पाठशाला’ लगाते हैं। पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक निशांत तिवारी और अन्य पुलिसकर्मी द्वारा हरदा, बायसी और अन्य गांवों में अशिक्षित बच्चों और व्यस्कों को बुनियादी तालीम देने के लिए शाम की पाठशाला लगायी जाती है। तिवारी ने बताया कि जब भी उन्हें अपने काम से फुर्सत मिलती है तो अशिक्षित बच्चों और व्यस्कों को बुनियादी तालीम देने के लिए ऐसी शाम में चलाए जाने वाले स्कूल में भाग लेते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा से जोडना है।

पूर्णिया जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित हरदा गांव में लगायी गयी ऐसी ही एक शाम की पाठशाला में कल निशांत तिवारी और पुलिस उपमहानिरीक्षक उपेंद्र सिन्हा ने भाग लिया। तिवारी ने बताया कि प्रदेश में शराबबंदी का असर दिख रहा है। कई व्यस्क जो कि शराब छोडने के बाद ऐसे स्कूलों में एक छात्र के तौर पर अपना समय दे रहे हैं। वहीं कई शिक्षक के तौर पर भी अपना योगदान दे रहे हैं।

पुलिस उपमहानिरीक्षक ने बताया कि कुछ स्वयं सेवी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस तरह के स्कूल के स्थायी संचालन के लिए लगाया गया है। उन्होंने बताया कि हरदा गांव में दरभंगा, मधुबनी और अन्य स्थानों के करीब 100 मजदूर परिवार मखाना की खेती में लगे हुए हैं जिनके बच्चों को शाम की इन पाठशालों में आने के लिए प्रेरित किया जाता है। उपेंद्र ने बताया कि इस नेक काम के प्रति जो पुलिसकर्मी इच्छुक हैं वे मुफ्त अपना योगदान दे रहे हैं तथा पढा रहे हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन पाठशालों में पढने वाले बच्चों और व्यस्कों को मुफ्त किताब, कापी, पेंसिल और खेल की सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिसकमिर्यों के लोगों के करीब आने से पुलिसिंग के कार्य में मदद मिलती है।

वीडियो: सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बंद हुए स्कूलों में फिर से लौटी रौनक; खुश नज़र आए बच्चे

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 15, 2016 10:47 am

सबरंग