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नीतीश कुमार ने कहा- शराब की जगह दूध पीने लगे हैं लोग, बैन के बाद 11 पर्सेंट बढ़ गई सेल

नीतीश ने कहा कि गुजरात की स्थापना के समय वहां शराबबंदी लागू पर वहां इसमें ढिलाई के विरोध में अब स्थानीय लोगों ने अभियान चलाना शुरू कर दिया है।
Author बेतिया | November 9, 2016 20:55 pm
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (Source: Express Photo by Gajendra Yadav)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज दावा किया कि राज्य में पिछले सात महीने से जारी शराबबंदी के दौरान दूध की बिक्री में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पश्चिम चंपारण जिले के मुख्यालय बेतिया से अपनी निश्चय यात्रा की शुरूआत करते हुए नीतीश ने आज एक ‘चेतना सभा’ को संबोधित करते हुए कहा कि शराबबंदी के कारण प्रदेश में अपराध की घटना में कमी आने के साथ अब दूध, मिठाई एवं शहद की खपत बढ गयी है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कारण प्रदेश में दूध की बिक्री में इजाफा खासतौर से सुधा द्वारा बेचे गए दूध के आंकडे के अनुसार पिछले सात महीनों में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यानि लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया और दूध पीना शुरू कर दिया है। नीतीश ने कहा कि इससे पूर्व शराब पर प्रत्येक साल दस हजार करोड़ रूपये बर्बाद होते थे पर प्रदेश की जनता इससे अपनी अन्य जरूरतों को पूरी करने के साथ स्वास्थ्यवर्द्धक भोजन पर खर्च कर रहे तथा लोगों की आर्थिक स्थिति बदली है। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी से सभी लोग प्रसन्न हैं पर कुछ लोग जिनमें से ज्यादातर पढे-लिखे और संपन्न परिवार से आते हैं, इसका विरोध कर रहे हैं। पढे-लिखे और संपन्न लोगों में भी सभी इसका विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि अधिकांश लोग इसके पक्ष में हैं पर कुछ लोग इसके खिलाफ हैं। शाम में एक पैग पीने के ऐसे आदी लोग शराबबंदी के कारण उसकी उपलब्धता नहीं होने के कारण तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। नीतीश ने कहा कि हमने जब इसके लिए जब कानून बनाया तो उसे कड़ा और तालिबानी बताया गया और अब रोज पूछ रहे हैं बताईए कि अगर तालिबानी है तो इसे गैरतालिबानी बनाने का क्या सुझाव है आपका। शराबबंदी से कोई समझौता नहीं करेंगे। शराबबंदी को पूरे तौर पर क्रियांवित और लागू करने के लिए अगर कानून में ऐसा आपको लगता है कि कोई फेरबदल की जरूरत है तो राय दें।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘लोगों ने इसको लेकर राय नहीं दिए। इस कारण मेरे कहने पर निषेध एवं उत्पाद विभाग ने विज्ञापन जारी कर सार्वजनिक तौर पर सुझाव मांगा है और लोग जवाब दे रहे हैं। 14 नंवबर को मैं खुद पटना में बैठूंगा और पूछूंगा कि आईए बताईए कि आपकी क्या सलाह है।’’ हमतो जानना और समझना चाहते हैं लोगों से इसलिए हम आपके बीच आए हैं। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे और बुरे लोग भी होते हैं और कुछ लोग शराबबंदी का गलत फायदा उठाने के लिए अन्य राज्यों से शराब लाकर यहां बेचने के फिराक में लगे हुए हैं। ऐसी मानसिकता वाले पकडे भी जा रहे हैं पर दूसरे प्रांतों से शराब लाकर यहां बेचने का संगठित अपराध करने वालों को हम यह आगाह कर देना चाहते हैं कि पकडे जाने पर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। नीतीश ने कहा कि बगैर जन चेतना के कोई बड़ा कानून लागू नहीं हो सकता और केवल सरकार के प्रयास से यह पूर्ण रूप से कारगर नहीं हो सकता है। कानून का अपना प्रभाव है लेकिन यदि आप सक्रिय नहीं होंगे तो यह प्रभावशाली नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में पूर्णशराबबंदी पिछले सात महीने से प्रभावी ढंग से तथा पूरी सफलता के साथ लागू है। इसे आगे भी प्रभावी ढंग से लागू करते रहेंगे और प्रदेश इसके लिए देश में नजीर बनेगा। इसे देश भर में फैलने से कोई रोक नहीं सकता। अबतक लोग बहाना बनाते थे कि ठीक से लागू नहीं होता। अब जबकि ठीक ढंग से लागू हो गया तो सब जगह मांग होगी।

नीतीश ने कहा कि गुजरात की स्थापना के समय वहां शराबबंदी लागू पर वहां इसमें ढिलाई के विरोध में अब स्थानीय लोगों ने अभियान चलाना शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि बिहार के तर्ज पर गुजरात में शराबबंदी लागू हो और वहां इसको लेकर जो कड़ाई है वैसा ही यहां भी हो। उन्होंने कहा कि गुजरात, उप्र, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र में इसकी मांग हो रही है। विभिन्न राज्यों से इसके लिए अभियान चलाने का निमंत्रण आ रहा है। नीतीश कुमार ने कहा कि इसलिए इस ‘चेतना सभा’ के जरिए वह लोगों से अपील करते हैं लोग कभी असावधान नहीं होंगे, हमेशा अपनी चेतना को जगाए रखेंगे और शराबबंदी एवं मद्य निषेध अभियान के प्रति सक्रिय रहेंगे। गांव-गांव और घर-घर फिर से सशक्त अभियान चलाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सात निश्चय के काम में आपकी अगर सक्रिय भागीदारी रहेगी तो अगले चार साल के भीतर हर गांव की गलियों का पक्कीकरण और नाली का निर्माण हो जाएगा। बिहार को खुले में शौच से मुक्त करना है, हर घर में शौचालय का निर्माण, नल का पानी और बिजली पहुंचाना है।

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नीतीश ने कहा कि समाज को तोड़ने वाले बहुत लोग सक्रिय हैं। समाज के वातावरण को खराब करना चाहते हैं। धर्म और मजहब के नाम पर तनाव पैदा करना चाहते हैं। ऐसे में किसी भी बहकावे और उकसावे में नहीं आईएगा और संप्रदायिक सदभाव, प्रेम का जो माहौल है उसे कायम रखना है। उन्होंने अपनी निश्चय यात्रा पर निकलने का भाजपा द्वारा विरोध किए जाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह बहुत लोगों को पच नहीं रहा है और कहा है कि वे इसका विरोध करेंगे। बहुत अच्छा है। बहुत लोग होते हैं जो कि मानसिक विकृति के शिकार होते हैं। जिनका धेय अच्छे कार्यों का विरोध करना होता है। नीतीश ने कहा कि वह स्वामी विवेकानंद की बात को याद रखते हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि कोई भी अच्छा और बड़ा काम करोगे तो पहले मजाक उड़ाया जाएगा, उसके बाद विरोध होगा और अंत में थक हार के सबलोग साथ हो जाएंगे। हमने जब शराबबंदी लागू किया तो कुछ लोगों ने उसका मजाक उड़ाया और कुछ लोग विरोध करने लगे। मुझे पूरा भरोसा है कि बिहार में चलाए गए इस अभियान को लोगों का जिस प्रकार से समर्थन प्राप्त है अंतोतगत्वा सबलोग साथ हो जाएंगे।

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उन्होंने कहा कि इससे पहले की अपनी यात्राओं की शुरूआत भी उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि से की है और इस धरती को प्रणाम करता हूं। गांधी जी की चंपारण यात्रा के 100वें साल में उन्होंने अपने निश्चय यात्रा की शुरूआत की है। चेतना सभा को उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री मदन मोहन झा, प्रदेश के मुख्यसचिव अंजनी कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक पी के ठाकुर ने भी संबोधित किया।

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