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…तो इस तरह बड़ी चालाकी से नीतीश कुमार ने भू माफियाओं को दिया जवाब

सिल्क सिटी भागलपुर में मनोरम गंगा मइया के तट पर बसे इस चिकित्सा केन्द्र की औपचारिक नींव लोकनायक जयप्रकाश नरायण ने 14 मार्च 1955 में रखी थी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (बीचे में) साथ में बैठे हैं उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (बाएं)। (फोटो- PTI)

16 जनवरी को राजगीर में हुई कैबिनेट बैठक में बिहार सरकार ने भागलपुर स्थित तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र के विस्तार के लिए 50 करोड़ रूपए आबंटित किए हैं। सरकार का यह निर्णय कई मायने में क्रान्तिकारी और ऐतिहासिक है क्योंकि अंग प्रदेश के लगभग तमाम भू माफिया अपने-अपने तरीके से इस चिकित्सा केन्द्र की बेसकीमती जमीन पर कब्जा जमाने की फिराक में लगे थे। इन माफियाओं ने भागलपुर में बाजाप्ता एक सिंडिकेट बना रखा है जिसका नेतृत्व सीएम नीतीश कुमार के परम मित्र के एक भाई करते हैं। इस कठोर सत्य की भनक जैसे ही सीएम को लगी, उन्होंने न केवल सिंडिकेट सरगना को फटकार लगाई बल्कि उस जमीन का परमानेंट सॉल्यूशन करने भी कर दिया।

बात 15 जून 2016 की है। नीतीश कुमार सम्पूर्ण क्रान्ति के नायक जयप्रकाश नारायण की आदमकद प्रतिमा का अनावरण करने इस प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र में आए थे। हालांकि, उनके इस कार्यक्रम को स्थगित कराने का भागीरथ प्रयास किया गया था। यहां तक कि प्रोग्राम के एक दिन पहले भागलपुर जिला प्रशासन भी इस स्वयंभू तथाकथित हस्तरेखा विशेषज्ञ के प्रभाव में आ गया था। प्रशासन ने सीएम आवास को एक इमरजेंसी मैसेज भेजा कि चिकित्सा केन्द्र की जमीन विवादित है। अतः कार्यक्रम रद्द किया जाए लेकिन भला हो पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा का जिन्होंने इस चिकित्सा केन्द्र के मुख्य संरक्षक की हैसियत से सीएम को कार्यक्रम में आने के लिए तैयार कर लिया।

तय समय के मुताबिक सीएम को मात्र एक घंटा ही चिकित्सा केन्द्र में रहना था। मौसम खराब होने के कारण जिला प्रशासन चाहता था कि कार्यक्रम जल्दी संपन्न हो और सीएम पटना के लिए उड़नखटोला में बैठ जाएं। चिकित्सा केन्द्र के डायरेक्टर डॉक्टर जेटा सिंह ने अपने सम्बोधन के क्रम में खुलासा किया कि ‘‘जिला प्रशासन मुझे खोद-खोद कर हड़का रहा है कि भाषण बन्द कर जल्दी सीएम से बोलवाइए, उन्हें पटना लौटना है।’’ लेकिन जिला प्रशासन को यह पता नहीं था कि तब तक सीएम तपोबन प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र के सकारात्मक कन्ट्रीबयूशन से रू-ब-रू होकर मंत्र मंग्ध हो चुके थे। उन्होंने डॉ. जेटा सिंह के भाषण में हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘‘डॉक्टर साहब आप अपना भाषण जारी रखिए। मेरे पास ऐसी अच्छी बातें सुनने के लिए बहुत समय है। अगर मौसम खराब हुआ तो मैं सड़क मार्ग से पटना चला जाऊंगा।’’

मुख्यमंत्री की यह बात सुनकर सारे लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ। बाद में अपने भाषण के क्रम में नीतीश कुमार ने कहा कि ‘‘मैं सबको मिलने का समय देता रहा हूं, लेकिन अब डॉक्टर जेटा सिंह यह बताएं कि वो कब मुझसे पटना आकर मिलने का समय दे रहे हैं। इनसे बातचीत करने के लिए मेरे पास पर्याप्त समय है। अब यही मुझे पटना आकर विस्तार से बताएंगे कि इस नेचुरल हॉस्पिटल का देश और विदेश में कैसे डंका बजेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।’’

तपोबन प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र को 50 करोड़ रूपए की सौगात मुख्यमंत्री की इसी सोच का फलाफल है। सिल्क सिटी भागलपुर में मनोरम गंगा मइया के तट पर बसे इस चिकित्सा केन्द्र की औपचारिक नींव लोकनायक जयप्रकाश नरायण ने 14 मार्च 1955 में रखी थी। वैसे स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर सदानन्द सिंह ने इसकी शुरूआत 1954 में ही कर दी थी। इस हॉस्पिटल के एक हिस्से का शिलान्यास देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 15 फरवरी 1962 को रखी थी। डॉक्टर जेटा सिंह ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सुझाव पर उनके पिता स्वर्गीय सदानन्द सिंह ने इसकी शुरूआत की थी। बता दें कि डॉ. सदानन्द सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देशाई की भगिनी से शादी की थी।

अभी तक इस प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र में लगभग 8000 असाध्य रोगी प्राकृतिक विधि से इलाज पाकर पूर्ण रूप से चंगा हो चुके हैं। विवादों से दूर अपनी छवि बनाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब इस चिकित्सा केन्द्र का कायापलट करने की ठानी, उससे पहले ही उन्होंने कई जांच एजेन्सियों से गुप्त सर्टिफिकेट हासिल करा लिया था। 50 करोड़ की सरकारी सहायता देने के बाद सीएम कल ही निश्चय यात्रा के क्रम में भागलपुर पहुंचे थे, जहां रात में उन्होंने इस प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र के इकोफ्रेन्डली गेस्ट हाउस में डेरा डाला और मक्के की रोटी के साथ सरसो के साग का लुत्फ उठाया।

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  1. P
    Parshurammishra
    Jan 20, 2017 at 8:23 am
    इसमें कोई संदेह नहीं है कि श्री नीतीश कुमार एक ईमानदार एवम् स्वच्छ छवि के राजनेता हैं ! बिहार के प्रति इनका अनुराग जगजाहिर है ! लेकिन तुष्टिकरण की इनकी नीति इनकी राष्ट्र नीति पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर देती है ! देश को तुष्टिकरण विहीन राजनीति की आवश्यकता है, और इसके लिए श्री मोदी के अतिरिक्त और कोई भी चेहरा दिख नहीं रहा ! नुसरत जहाँ जैसी आतंकवादी को बिहार की बेटी कहना इनकी स्वच्छ छवि को धुंधला करने के लिए पर्याप्त है ! मोदी के प्रति इनकी प्रतिद्वंद्विता लोगों की समझ से सर्वथा परे है ।
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    1. R
      rahul
      Jan 20, 2017 at 5:24 am
      सच मे नीतीश की तरह स्वच्छ और ईमानदार अविवादित नेता पुरे देश मे एक भी नहीं है इस देश का दुर्भाग्य होगा अगर नीतीश जी पीएम पद तक न पहुंच पाए कठिन सेकठिन काम को की बजाकर कैसे हल किया जाता है यह कोई इनसे सीखे
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      सबरंग