ताज़ा खबर
 

आयकर अफसर नोटिस थमाने की बजाय अब दरवाजे पर दे रहे हैं दस्तक, खंगाले जा रहे ग्रामीण क्षेत्र में व्यापारियों के खाते

बैंकों को कहा गया है कि जबतक केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तबतक ऐसे खातों से निकासी न हो। अगर ऐसा होता है तो इसकी जवाबदेही बैंकों की होगी।
आयकर भवन (FILE PHOTO)

नोटबंदी के बाद आयकर विभाग का अन्वेषण दफ्तर भागलपुर और आसपास के 18 जिलों में सक्रिय है। विभाग के अधिकारी करीब 90 मामलों में तहकीकात कर रहे हैं और उन लोगों से पूछताछ कर रहे हैं जिनके बैंक खातों में नोटबंदी के बाद करोड़ों की रकम जमा हुई है। इनमें कुछ खाते जनधन योजना के तहत भी खोले गए हैं। अधिकारियों को एक ऐसे खाते का पता चला है जिसमें एकमुश्त मोटी रकम जमा कराई गई है। आयकर विभाग के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि जनधन खातों का दुरुपयोग रोकने के मकसद से ये जांच की जा रही है। इस बाबत बैंकों को केवाईसी दुरूस्त करने की हिदायत दी गई है। बैंकों को कहा गया है कि जबतक केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तबतक ऐसे खातों से निकासी न हो। अगर ऐसा होता है तो इसकी जवाबदेही बैंकों की होगी।

भागलपुर आयकर अन्वेषण के तहत 18 जिले आते हैं। किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, सुपौल, सहरसा, कटिहार, खगड़िया, मधेपुरा, बेगूसराय, लखीसराय, जमुई, मुंगेर, बांका, शेखपुरा और भागलपुर । विभाग का खास ध्यान सुदूर इलाके के व्यावसायिक घरानों पर है जहां आसानी से पहुंचा नहीं जा सकता। यानि कि आयकर टीम ऐसी जगह भी तहकीकात करने गई जहां जाने में 14 घंटे लगे। सूत्र बताते हैं कि आयकर विभाग नोटिस भेजने के बजाए अब सीधे टोह लेने ठिकाने पर दस्तक दे रही है। इनका मानना है कि नोटिस देने से कर चोरी करने वाला सतर्क हो जाएगा। इसी नीति के तहत खगड़िया के बड़े व्यापारिक घराने के घर और व्यापार सेंटर पर टीम अचानक जा धमकी और करोड़ों की टैक्स चोरी पकड़ी है। यह टैक्स तकरीबन 7 करोड़ है। इस घराने ने 2 करोड़ रुपए नकद बैंक में जमा कराए हैं। उम्मीद है यह घराना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत अपनी आय जाहिर कर फायदा उठाएगा। हालांकि, मार्च तक ही ऐसे लोगों को ये मौका दिया गया है। वरना 85 फीसदी टैक्स अदा करना होगा और यह बताना होगा कि धन कहां से आया।

इसी तरह सुपौल में भी 2.5 करोड़ टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर मामले सुपौल, सहरसा, भागलपुर, नवगछिया और खगड़िया जिले के सामने आए हैं। इनके अलावा दूसरे जिले से भी टैक्स चोरी करने वाले आयकर अधिकारियों के निशाने पर हैं। बीते दिनों भागलपुर नगर निगम के महापौर दीपक भुवानियां के दो फार्मो पर आयकर अन्वेषण के सहायक निदेशक शिवशंकर यादव के नेतृत्व में टीम पहुंची थी। इन दो फर्मों के बैंक खातों में 3.5 करोड़ रुपये नकद जमा कराए गए थे। इस बाबत महकमा के सूत्र बताते हैं कि इनके फर्म के लेखा-जोखा की जांच चल रही है। हालांकि, नोटबंदी से पहले भी ये फर्म अपने खातों में करोड़ों जमा करते रहे हैं। इनके दो व्यापारिक प्रतिष्ठान बनारस और भागलपुर में है। ये सिल्क धागों का कारोबार करते हैं मगर इन्हें एकदम से क्लीन चिट तो नहीं दी जा सकती है। सूत्र बताते हैं कि आयकर विभाग के रडार पर वैसे व्यापारिक घराने सबसे ऊपर हैं जिनका कारोबार करोड़ों का है और बैंकों में भी धन जमा कराया है मगर टैक्स या तो मामूली दिया या फिर दिया ही नहीं।

गौरतलब है कि भागलपुर सिल्क व्यवसाय का बड़ा केंद्र है। पड़ोसी देश नेपाल से चीन और कोरिया तक सिल्क धागों और कपड़ों की तस्करी भी बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे धंधे में लगे लोग काली कमाई कर रातों-रात अकूत संपति और काला धन इकट्ठा कर चुके हैं। जो एक दशक पहले झोपड़ी या किराए के मकान में रहते थे, वे आज आलिशान कोठियों में रह रहे हैं। यह आयकर अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव भी नहीं था। अगर आयकर विभाग के उन अधिकारियों की कुंडली तलाशी जाय जो बीते दस साल यहां पदस्थापित रहे हैं तो शायद वो भी इसी हैसियत में मिलेंगे। उनके बेनामी फ़्लैट और जमीन करोड़ों की है। किसी ने सास के नाम पर तो किसी ने साली के नाम पर खरीद बिक्री की। यह जांच का मुद्दा है।

हाल ही सहरसा में एक आयकर कमिश्नर की कोठी पर छापा पड़ा था। इनकी कहानी आम है। चाहे पटना में बैठा आयकर कमिश्नर हो या बेगूसराय में बैठा सहायक कमिश्नर हो। इनके तार आज भी सिल्क माफिया से जुड़े हैं। शायद यही वजह है कि आयकर महकमा को नोटबंदी के बाद भागलपुर और आसपास काला धन के खेल में शामिल कोई भी बड़ी मछली पकड़ में नहीं आई है। हालांकि, अधिकारी बताते हैं कि कायदे कानून के तहत खाते खंगाले जा रहे है और नोटिस भी भेजी जा रही है। खैर, जो हो लेकिन जिन लोगों ने बंद पड़ी या फर्जी कंपनियों के नाम पर करोड़ों का काला धन खपाया। इन सब की बारीकी से खबर लेनी होगी, तभी नोटबंदी का फायदा नजर आएगा।

वीडियो देखिए- हाईकोर्ट का आदेश- BSF जवान को दो दिन पत्‍नी के साथ रहने दिया जाए, गृह मंत्रालय की सफाई- गिरफ्तार नहीं, ट्रांसफर किया

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. B
    bharat
    Feb 11, 2017 at 2:21 pm
    Dept should search & ess at current and past मुखियास,ग्राम सेवक, petrol pumps जेवेल्लेर्स एंड प्रॉपर्टी डीलर्स
    (0)(0)
    Reply