April 23, 2017

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भागलपुर में कवि सम्मेलन: ‘भैया हाथ तो साइकिल में ब्रेक लगाने के काम आता है’

कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भाग लिया। उदघाटन के वक्त सांसद निशिकांत दूबे ने भी भागलपुर की जनता पर होली के बहाने तंज कसा।

बिहार के भागलपुर में होली पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

बिहार के भागलपुर में होली के अवसर पर देशभर से आए कवियों ने शनिवार को भागलपुरियों को खूब गुदगुदाया। सारी रात मारवाड़ी पाठशाला का प्रांगण जोर के ठहाकों से गूंजता रहा। यह आयोजन मित्र वसंत गोष्टी ने किया था। जिसका उद्घाटन सांसद निशिकांत दुबे, राज्यसभा सदस्या कहकशां परवीन, बिहार विधान परिषद सदस्य डा. एनके यादव, जिला परिषद के चेयरमैन टुनटुन साह, पूर्व अध्यक्ष डॉ.शंभुदयाल खेतान, महापौर दीपक भुवानियां, उपमहापौर प्रीति शेखर, चेंबर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष शैलेंद्र सर्राफ, जनसत्ता के पत्रकार गिरधारीलाल जोशी ने साझे तौर पर किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत जगदीश चंद्र मिश्र (पप्पू) ने किया। यह आयोजन 1961 से लगातार होली पर होता आ रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत 92 साल के बुजुर्ग कविवर रमेश मिश्र अंगार और मध्य प्रदेश के देवास से आए कवि शशिकांत यादव ने की।

उत्तर प्रदेश चुनाव नतीजों पर दिल्ली से आए हास्यरस के कवि दीपक सैनी ने कहा, ‘भैया हाथ तो केवल साइकिल में ब्रेक लगाने के काम आता है और वही हुआ। चैन साइकिल की उतारी यूपी का चुनाव हो गया।’ इसी तरह पानीपत से आए योगेंद्र मौदगिल ने व्यंग कसा, ‘बुरा वक्त आएगा किसे पता था, बहता दरिया थम जाएगा किसे पता था, दोनों पप्पू बुआ के संग सोच रहे, मोदी फूफा बन जाएगा, किसे पता था।’ उन्होंने ने ही एक व्यंग के जरिए समाज की परख का बदला नजरिया बताया, ‘ठाठबाट देखते है जूतियां देखकर, अब हाथ का हुनर कोई नहीं देखता।’

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत जगदीश चंद्र मिश्र (पप्पू) ने किया।

वहीं राजस्थान फालना से आई कविता किरण ने मां सरस्वती की वंदना की। श्रृंगार रस की कविता का होली माहौल में रंग घोलते हुए कहा, ‘कभी रंगून से उनका जो टेलीफोन आ जाए, तो जैसलमेर का भी मौसम देहरादून हो जाए।’ जयपुर से आए वीर रस के कवि अब्दुल गफ्फार की कविताओं ने तो मानों समां ही बांध दिया। देशभक्ति और गौरक्षा पर व्यंग्य कसते हुए उन्होंने ओवैसी की बात रखी। ‘जिस दिन मोदी संसद में शिवशंकर बनकर आएगा तो तू क्या ओवैसी तेरे अब्बाजान भी वंदेमातरम बोलेगा।’ ‘इसी गीत को गाकर कुर्वान अमर हमीद हुआ——।’ दूसरी कविता के जरिए उन्होंने कहा, ‘क्या हिंदू क्या मुस्लिम, सबने गायों का सम्मान किया, हजरत पाक मोहम्मद ने भी गौ सेवा का ज्ञान दिया, मोदी को भी सदराहों से कभी नहीं हटने देंगे, शीश भले कट जाए पर गाय नहीं कटने देंगे———।’ इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए धार से आए कवि जानी बैरागी ने कहा, ‘मत उठाओ अंगुलियां शरहदों पर, क्योंकि वहां भगवान रहते हैं——।’ संचालक शशिकांत यादव ने यूपी की जीत पर कहा, ‘राष्ट्र भक्ति की अलख जगा दी, ऐसी जबर जीआले ने, शहजादों को धूल चटा दी चाय बेचने वाले ने……।’

इसके अलावा राजस्थान के कोटा से आए कुंवर जावेद, मुरैना से आए तेजनारायण बेचैन ने खूब हास्य व्यंग्य सुनाया। बैचैन ने लालू यादव को सामने रखकर कहा, ‘लोकतंत्र का दुर्भाग्य देखिए, सूर्योदय लाने का दावा वे कर रहे हैं, जिनके खुद के चुनाव चिन्ह लालटेन है।’

कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भाग लिया। उदघाटन के वक्त सांसद निशिकांत दूबे ने भी भागलपुर की जनता पर होली के बहाने तंज कसा। दूबे ने कहा, ‘क्या बिडंबना है भागलपुर के लोग बाहरियों के गले में माला डाल संसद या विधानसभा भेज रहे हैं। चाहे वह सुशील मोदी हो या शाहनवाज हुसैन या अजित शर्मा। कोई भागलपुर का नहीं है और मैं भागलपुर का हूं तो झारखंड के गोड्डा से दो दफा से सांसद हूं।’

बता दें, भागलपुरियों को कवि सम्मेलन 57 सालों से होली का एहसास कराता हुआ आ रहा है। है। इस कार्यक्रम में आकर लोग कविताओं का रसपान करते हैं और फिर होली के रंग में रंग जाते हैं।

देखिए वीडियो - मथुरा, बरसाना में शुरु हुआ होली का उत्सव

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First Published on March 12, 2017 8:38 pm

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