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बिहार में बैंक सुरक्षा के लिए बनेगा सशस्त्र बल पर, नई शाखाएं नहीं खोलने, शिक्षा ऋण नहीं देने पर बिदके नीतीश कुमार

बिहार में साख जमा अनुपात साल 2014-2015 के मुकाबले साल 2016- 2017 में नीचे खिसक गया है, जबकि दूसरे विकसित राज्यों में यह अनुपात सौ फीसदी से भी ज्यादा पहुंच गया।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 60वीं समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

बिहार में छात्रों को शिक्षा ऋण देने के साथ-साथ अपनी शाखाएं गांवों में खोलने में बैंक कोई रूचि नहीं ले रहे। नतीजतन, साख जमा अनुपात साल 2014-2015 के मुकाबले साल 2016- 2017 में नीचे खिसक गया है, जबकि दूसरे विकसित राज्यों में यह अनुपात सौ फीसदी से भी ज्यादा पहुंच गया। यह बात बुधवार को पटना में देर शाम तक चली राज्य स्तरीय बैंकर्स कमिटी की समीक्षा बैठक में सामने आई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद बैठक में मौजूद थे और अपने संबोधन में उन्होंने बैंकों के मौजूद बड़े अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की यह 60वीं समीक्षा बैठक थी जिसमें बिहार की तमाम बैकों के आला अधिकारी, रिजर्व बैंक और नाबार्ड के प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और दूसरे प्रधान सचिवों के साथ राज्य के वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की पूरी गारंटी राज्य सरकार ले रही है। फिर भी बैंक के अधिकारी देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। 4 लाख तक का कर्ज इंटर पास विधार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मुहैया कराना है। इच्छुक विधार्थियों का आवेदन ज़िला स्तरीय कमेटी स्क्रूटनी कर बैंकों को भेजती है। फिर भी बैंक आनाकानी क्यों कर रहे हैं। 2905 आवेदन इस स्कीम के तहत बैंकों को भेजे गए जिसमें से केवल 138 को ही कर्ज मुहैया कराया जा सका है। मुख्यमंत्री ने पूछा इस सुस्ती की क्या वजह है? यह बर्दाश्त के बाहर है।

गौर करने लायक है कि यह योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 7 महत्वाकांक्षी योजना सात निश्चय में से एक है। उन्होंने कहा कि हमें पता चला है कि बैंक अधिकारी इसमें रूचि ही नहीं ले रहे बल्कि स्टूडेंट्स के साथ उनका व्यवहार भी सही नहीं है। उन्होंने कहा कि एक तो बिहार के लोग बैंक से कर्ज लेना नहीं चाहते। सरकार उन्हें इस ओर योजना चला कर मुखातिब करना चाहती है तो बैंक का रवैया ढीला है। तभी बिहार का साख जमा अनुपात बीते साल 44.58 फीसदी से गिरकर इस साल 43.94 फीसदी पर आ गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यही रवैया बैंकों का नई शाखाएं खोलने में भी है। हर 5 हजार की आबादी पर एक शाखा खोलने की बात थी लेकिन पंचायत स्तर पर भी नहीं खुली। बीते साल 1640 नई बैंक शाखाएं खोलने का लक्ष्य था लेकिन सिर्फ 139 ही खुलीं। सरकार का कहना है कि कम से कम पंचायत स्तर पर एक शाखा तो खोलना जरुरी है जिसकी आबादी 10 हजार के करीब है। किसानों को भी कर्ज देने में कंजूसी बरती जा रही है।

वहां मौजूद बैंकरों ने बिहार में सुरक्षा के मुद्दे भी उठाए। इस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि सीआईएसएफ की तर्ज पर बैंकों की हिफाजत के लिए विशेष सशस्त्र बल का गठन किया जा रहा है जो केवल बैंकों और दूसरे वितीय संस्थानों की 24 घंटे सुरक्षा के वास्ते होगा। इसकी एक बटालियन का मुख्यालय बेगूसराय और दूसरी का बक्सर के डुमरांव में होगा। इसकी अधिसूचना जल्द जारी होगी। वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने साफ़ शब्दों में कहा कि एसएलबीसी बैकों की उपलब्धि के आधार पर ग्रेडिंग करें। कारण कि कई बैंकों की उपलब्धि शून्य है और राज्य के विकास को आगे बढ़ाने में कोई सहयोग नहीं कर रही।

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First Published on May 18, 2017 8:38 pm

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