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चार्जशीटेड होने पर तेजस्वी और तेजप्रताप यादव को देना होगा इस्तीफा, नीतीश कुमार की शर्त पर लालू यादव की हामी

आईटी छापे के बाद गुस्से में किया गया लालू का पहला ट्वीट काफी जोखिम भरा था। हालांकि, कोई कन्फ्यूजन न हो इसके लिए उन्हें दूसरा ट्वीट करना पड़ा, ‘‘लार मत टपकाइए, गठबंधन अटूट है।’’
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद (बाएं) और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (दाएं)। (फाइल फोटो)

कन्हैया भेलारी

इनकम टैक्स के छापे के बाद भी लालू प्रसाद यादव और उनके पारिवारिक कुनबे के राजनीतिक और प्रशासनिक सेहत पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा है। माना जा रहा है कि राजद अध्यक्ष को मंगलवार शाम को ही इस बात के संकेत मिल गए थे। उधर, कांग्रेस ने भी मन बना लिया है कि वो इस ‘संकट’ की इस घड़ी में ‘संकटमोचक’ रहे लालू लालू प्रसाद यादव के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। शायद यही वजह है कि छापेमारी के अगले दिन यानी आज (17 मई की) सुबह से ही राजद सुप्रीमो थोड़ा फ्रेश मूड में दिखाई दिए और पटना आवास पर जुटे मुलाकातियों से अपने पुराने अंदाज में मिले। पत्रकारों को भी अंदर बुलाकर उन्होंने प्रसन्नचित मुद्रा में ही बातचीत की।

राजद खेमे के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव को स्पस्ट कह दिया है कि बेनामी सम्पति रखने के आरोप में उनके दोनो मंत्री पुत्रों के खिलाफ अगर चार्जशीट हो जाता है तब भी महागठबंधन की एकता बरकरार रहेगी। बशर्ते, आरोपित दोनो मंत्रियों (तेजस्वी और तेज प्रताप यादव) को फौरन अपने पद से इस्तीफा देना होगा। माना जा रहा है कि इस पर लालू यादव ने भी सहमति दे दी है। दरअसल, राजद प्रमुख इस बात को अच्छी तरह से जानते और समझते हैं कि साफ छवि के प्रति सावधान रहने वाले नीतीश कुमार किसी भी हाल में चार्जशीटेड लोगों को अपने मंत्रिमंडल में नहीं रख सकते हैं।

हालांकि, आय से अधिक सम्पत्ति रखने के मामले में लालू यादव ने चार्जशीटेड राबड़ी देवी को सीएम पद पर रहते हुए ही कोर्ट में पेशी करावाया था और जमानत ली थी लेकिन नीतीश राज में उनकी चाल और दाल नहीं गल सकती है। फिर भी उम्मीद जताई जा रही है कि गठबंधन धर्म निभाते हुए मुख्यमंत्री इतना तो रियायत दे ही सकते हैं कि तेज प्रताप यादव और तेजस्वी प्रसाद यादव को मिल रही कई सुविधाएं जारी रहे।

बदली परिस्थितियों में लालू की मजबूरी भी है कि जब वो खुद और उनका परिवार आयकर के मकड़जाल में फंस चुका है तब नीतीश कुमार के हर सुझाव को मानते हुए सरकार में शामिल रहकर सत्ता सुख भोगते रहने में ही भलाई है। इससे उनकी अप्रत्यक्ष सरकार भी चलती रहेगी और दूसरे 80 विधायकों वाली पार्टी भी कन्ट्रोल में रहेगी। आईटी छापे के बाद गुस्से में किया गया उनका पहला ट्वीट काफी जोखिम भरा था। हालांकि, कोई कन्फ्यूजन न हो इसके लिए उन्हें दूसरा ट्वीट करना पड़ा, ‘‘लार मत टपकाइए, गठबंधन अटूट है।’’

नीतीश कुमार भी लालू प्रसाद यादव के साथ अपने राजनीतिक सम्बन्धों को तत्काल नहीं तोड़ना चाहते क्योंकि इससे उन्हें कुछ राजनीतिक लाभ होता नहीं दिख रहा है। लिहाजा, साल 2019 के लोकसभा चुनाव तक लालू-नीतीश की राजनीतिक दोस्ती और जोड़ी सियासी उठापटक सहते हुए जारी रहेगी क्योंकि आखिरी सच इन दोनों नेताओं को पता है कि उनकी दोस्ती अगर टूटी तो उसका फायदा सिर्फ और सिर्फ भाजपा को ही मिलेगा।

(कन्हैया भेलारी पटना के स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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