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नरेंद्र मोदी सरकार के ऐलान के साल भर बाद भी स्‍मार्ट नहीं बन पाया भागलपुर, बेहद खराब हैं हाल

गंगानदी में कचरा फेंकवाने में भी निगम के अफसरों को शर्म महसूस नहीं करते। चम्पानाला पुल की ओर से भागलपुर में प्रवेश करने पर सड़ी बदबू आपका स्वागत करेंगी।
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

गंदगी और जाम से करहाता शहर भागलपुर स्मार्ट सिटी बनने को आतूर है, लेकिन यहां के लोग स्मार्ट होंगे तभी तो सिटी स्मार्ट बन पाएगी।इसके लिए सभी को काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे। वरना धन की बंदरबाट होनी तय है। एक दफा खुशी जाहिर करना जरूरी है कि स्मार्ट सिटी घोषित हुए तकरीबन एक साल हो गए। ख़ास कर सबसे ज्यादा खुशी के लड्डू नगरनिगम  में फूट रहे है। इसका कारण यह है कि निगम जल्द ही मालामाल होने वाला है। सोशल मीडिया में बुजुर्ग मुकुटधारी अग्रवाल सरीखे साल गुजर जाने के बाद भी भागालपुर की सूरत न बदल पाने की वजह से फ़िक्र होती है। कहते है यह भी जुमला बन कर न रह जाए।

केंद्र सरकार ने अपनी पूरक सूची में 13 स्मार्ट सिटी का ऐलान किया था। जिनमें भागलपुर 7वें पायदान पर है। शहर के विकास के लिए  पांच साल में 100-100 करोड़ मिलने की बात कही गई थी। इसके अलावा  60 करोड़ राज्य सरकार देगी। नगर निगम इलाके का दायरा बढ़ेगा। सड़के चौड़ी होंगी। पक्की नालियां बनेंगी। मोहल्लों की खाली सरकारी जमीन पर बच्चों के खेलने का पार्क बनेगा। गली मोहल्ले रोशन होंगे। पानी की घर-घर में सप्लाई होगी। बिजली 24 घंटे मिलेगी। मुफ़्त वाईफाई होगी। मसलन सब कुछ बदल जायेगा, लेकिन आदमियों के मन बदलने की कोई योजना नहीं है। तभी आशंकाए भी है। फिलहाल तो पीने के पानी की किल्लत और बीमार पड़ी चापाकल नगर निगम की तस्वीर खुद ही बयां कर रही है। गर्मी शुरू होते ही पीने के पानी की किल्लत हो बढ़ चुकी है। जलस्तर काफी नीचे चला गया है। पानी के लिए नलों पर हाथापाई की नोबत आ गई है। मगर किल्लत को दूर करने का किसी के पास योजना नहीं है। अगले महीने नगर निगम का चुनाव होने वाले है। सभी वोटों के गुना भाग में लग गए है।

भागलपुर शहर को बदरंग करने में नगर निगम ही तूला हुआ है। जहां-तहां फैला कूड़ा और गंदगी से अटी नालियां बदबू फैलाएं है और संक्रमण बीमारियों को न्योता दे रही हैं। गंगानदी में कचरा फेंकवाने में भी निगम के अफसरों को शर्म महसूस नहीं होती। चम्पानाला पुल की ओर से भागलपुर में प्रवेश करने पर सड़ी बदबू आपका स्वागत करेंगी। दुकानदार शहर की गलियों और सड़कों का अतिक्रमण कर रोजाना जाम लगवा रहे है। वहीं पोस्टर और होर्डिंग शहर को बदसूरत बना रहे है। जबकि कुछ सफेदपोश बगैर नियम के वाहनों पर लाल-पीली बत्ती लगवा अपनी धौंस जमा रहे है। इस काम में भी निगम के लोग अग्रणी है। बिहार सरकार की जारी लाल-पीली बत्ती उपयोग करनेवाली सूची के मुताबिक ये हकदार नहीं है। नर्सिंग होम अपना कचरा सड़कों पर बिखेर रहे हैं। यानी सभी मनमानी करने पर तूले हैं। कोई रोकने टोकने वाला नहीं है। ऐसे में स्मार्ट सिटी का सपना संजोना बेईमानी है।

भागलपुर में इधर-उधर बिखरा कूड़ा निगम की मेहरबानी से अपनी पुरानी पहचान भी खो रहा है। निगम के अफसरों की निगाह आजकल कॉम्पलेक्स और बड़े भवनों पर टिकी है। जगह-जगह पूरे शहर में होर्डिंग और पोस्टरों से सड़क पाट दी गई हैं। छुटभैया नेता त्योहारों की बधाई वाले होर्डिंग में खुद की तस्वीर लगा कर खड़े हो जाते है, तो कोई मंत्री की फोटो के साथ नजर आता है। कोई कुछ मांग रहा है, तो कोई मंत्रीजी के आगमन पर स्वागत करता दिखता है। कोचिंग सेंटरों की भरमार ने भी होर्डिंग की संख्या बढ़ाई है। नतीज़तन सड़क हादसे का खतरा रोजाना बना रहता है। नगर निगम के पार्षद इसमे अव्वल हैं। सभी होर्डिंग नाजायज़ लगे हुए है।

शहर की सफाई के लिए एजेंसी को करीब 10 करोड़ सालाना का ठेका निगम ने दे रखा है लेकिन फैली गंदगी से साफ जाहिर होता है कि सफाई के नाम पर घपला है। यह जांच का मामला हो सकता है। दिलचस्प बात है कि वार्ड नंबर 19 महापौर का वार्ड है। ये इसी वार्ड से जीते है। मगर सफाई क्या पीने का पानी भी समय पर मय्यसर नहीं। सड़क किनारे की नालियां टूटकर बड़े नालो में तब्दील हो चुकी है और खुली हुई हैं। रोजाना स्कूली बच्चे इसमें गिर डुबकी लगाते है। किसी राहगीर की नजर न पड़े तो मौत भी हो सकती है। सबसे दुखद बात है कि मौका बे-मौका शहर का कचरा गंगानदी में फेकने से भी ये शर्म महसूस नहीं करते। जबकि भारत सरकार ने करोड़ों खर्च कर गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की कार्य योजना बनाई है। नमामि गंगे योजना चल रही है। फिलहाल सूबे की सरकार की दखल से इस पर रोक लगी है।

शहर में लाल-पीली बत्ती लगी गाड़ियों की भरमार है। सड़कों पर नो एंट्री में बेहिचक प्रवेश करते वाहनों को रोकना यातायात पुलिस के बूते के बाहर है। इन गाड़ियों पर सवार ऐसे ओहदेदार है, जो लाल-पीली बत्ती के हकदार ही नहीं है। फिर भी मजे से घूम रहें हैं। उन्हें कौन रोके? हालांकि राज्य सरकार ने इनके हकदार की सूची जारी की है और आदेश दिया है कि गैरकानूनी तरीके से बत्ती का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करें। सरकार की जारी सूची के मुताबिक भागलपुर में कमिश्नर, डीएम, आईजी, डीआईजी, एसपी, जिला जज, अपर जिला जज, डीडीसी, सीजेएम, एडीएम, एसडीओ, और डीएसपी सरीखे है। जारी अधिसूचना में साफ-साफ कहा गया है कि जो इसके हकदार नहीं है और लाल बत्ती का उपयोग कर रहें है जो पूर्णतः अवैधानिक है और सरकारी प्रावधानों के तहत दंडनीय है। नियमों की यहां खुले धज्जियां उड़ रहे हैं।

इतना ही नहीं एफसीआई के अनाज को ढ़ोने वाली खटारा ट्रकें नो एंट्री मे प्रवेश कर रोजाना लोगों की जान ले रही है। व्यापारियों की मनमानी से तो पूरा शहर परेशान है। शहर की तमाम सड़कें यहां तक कि रिहायशी इलाके की सड़कें भी अतिक्रमण की शिकार हो तंग है। पैदल चलना दुश्वार है। यातायात पुलिस और अन्य सभी पुलिसकर्मी इनसे मिले हुए हैं। जुगाड़ गाड़ी और ऑटोरिक्शा तो कोढ़ में खुजली का काम कर रही हैं। जाम से निजात के वास्ते आयुक्त स्तर के अफसर बैठकें तो करते हैं, मगर सब बेनतीजा है और सभी तमाशबीन बने हुए हैं।

मेडिकल कालेज होने की वजह से यहां डॉक्टरों की फौज है। हरेक इलाके में नर्सिंग होम हैं। इनसे निकला कचरा सड़कों पर डाल दिया जाता है। जानवर इसे बिखेर देते है। सड़ांध से तरह-तरह की बीमारियों का खतरा बना है। कोई मना करने वाला नहीं। अलबत्ता ऐसे में स्मार्ट सिटी की सोच दिन में सपना देखने जैसी है और एक साल से भागलपुरिए इसी में डूबे हुए हैं। उधर फंड की बाट जोहते आला अफसर का रिटायरमेंट नजदीक आ गया तो महापौर और डिप्टी महापौर व पार्षदों का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। लगता है इनके लिए अंगूर खट्टे ही साबित होंगे।

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