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सबसे बड़े मुस्लिम संगठन की धमकी-असम में बन सकते हैं म्यांमार जैसे हालात

असम एक्शन कमेटी की राज्स में मुस्लिमों की नागरिकता के हक के लिए लड़ाई जारी है।
Author गुवाहाटी | November 14, 2017 09:35 am
जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी

देश के सबसे बड़े मुस्लिम संगठन जमियत-उलेमा-ए-हिन्द ने चेतावनी दी है कि असम को म्यांमार बनाने की कोशिश न की जाए। यह बात असम में हाल ही में सामने आए मुस्लिमों की नागरिकता को लेकर चल रहे मुद्दे पर कही गई। असम एक्शन कमेटी की राज्स में मुस्लिमों की नागरिकता के हक के लिए लड़ाई जारी है। मुस्लिम संगठन के अध्यक्ष मौलाना अर्शद मदनी ने कमेटी द्वारा रखे गए एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राज्य की वोटिंग रजिस्ट्री से 48 लाख शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं का नाम हटाने की कोशिश की जा रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि उनके हक को छीन लिया जाए, उनके बच्चों को शिक्षा न प्राप्त हो सके और उन्हें देश से बाहर फेंक दिया जाए। अगर ऐसा ही चला तो असम में म्यांमार जैसी स्थिति बन जाएगी।

असम एक्शन कमेटी ने कहा एक तरफ राज्य में नेशनल रजिस्ट्री ऑफ सीटिजन्स का कार्य चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला दे दिया जिससे 48 लाख मुस्लिम महिलाओं की नागरिकता संकट में आ गई है। मौलाना मदनी ने कहा वे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। बता दें कि राज्य में पूर्ण रूप से शिक्षा न मिलने और गरीबी के कारण मुसलमानों की तादाद बहुत अधिक है। यही कारण है कि वहां के लोग अपना बर्थ सर्टिफिकेट नहीं बनवाते है और अगर किसी मुस्लिम लड़की की शादी के वक्त गांव का प्रधान जो प्रमाणपत्र देता है तो उसी को नागरिकता का सबूत माना जाता है।

हालांकि हाईकोर्ट इन महिलाओं के इस प्रमाणपत्र को अवैध करार दे चुका है जिसके बाद राज्य में मुस्लिम महिलाएं नागरिकता के हक की लड़ाई लड़ रही हैं। मदनी ने कहा कि सरकार को असम समझौते और नियम-कानून को बहुत ही गंभीरता के साथ फॉलो करना चाहिए। वहीं इस कार्यक्रम में मौजूद प्रोफेसर हीरेन गौहाई ने कहा कि असम ही एक ऐसा राज्य है जहां पर नेशनल रजिस्ट्र ऑफ सिटीजन का कार्य किया जा रहा है लेकिन कुछ राजनीतिक तत्व इसे भंग करने की कोशिश में लगे हैं।

देखिए वीडियो

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  1. S
    sanjay
    Nov 14, 2017 at 3:17 pm
    मंयामार में युद्ध के हालात कैसे बने यदि मुस्लिम संगठन बुद्दिमता के साथ गंभीरता से सोचे तब पता चलेगा! मंयामार के लोगो को जब यह लगाने लगा की उसकी जान को उसके देश की अस्मिता संस्कृति को खतरा है तब उसने यह कदम उठाया!जंहा कही पर भी विश्व में मुस्लिम बाहुल्य आबादी है या मुस्लिम देश है वहा पर अन्य धर्म का व्यक्ति आजादी के साथ रह नहीं सकता है,ऐसा उदाहरण विश्व में देखने को नहीं मिलेगा!जब तक इस धर्म के मानने वाले लोग अन्य धर्म का सम्मान नहीं करेंगे तब तक ऐसे हालात बने रहेंगे!यदि यह संगठन पाकिस्तान और बंगलादेश में हिन्दुओ के साथ कैसा बर्ताव हो रहा है और उनको दिनप्रतिदिन समाप्त किया जा रहा है तब भी भारत के मुस्लिम संगठन के लोग मौनव्रत लिए हुवे है!लेकिन रोहिंग्या के मुद्दे पर ये लोग भारत सरकार को चुनौती पेश करते है और सरकार को मानवता का पाठ सिखाते है,उनके इस कदम से इनकी देशभक्ति परप्रश्न उठता है की ये लोग भारत की अखंडता और सुरक्षा के साथ है या भारत के विनाश के साथ !इन लोगो के अधिकारों की बात जंहा कही पर आती है ये लोग तलवार लेकर खड़े हो जाते है लेकिन अपने कर्तव्य के प्रति ये कभी भी उठखड़े नजर नहींआते
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    1. Y
      Yahhha
      Nov 14, 2017 at 1:16 pm
      Khabar banane wala sanghi l hai. Yeh dhamki hai ya ghabrahat?
      (3)(0)
      Reply
      1. M
        mp
        Nov 14, 2017 at 12:47 pm
        जो देस के नागरिक नहीं है बांग्ला देसी है देस से बहार करो
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