December 10, 2016

ताज़ा खबर

 

सिमी सदस्यों को देखने वाली ग्रामीण ने बताई आंखों देखी, कहा- मैंने नहीं देखा था कोई हथियार

आठ सिमी सदस्य भोपाल सेंट्रल जेल तोड़कर फरार हो गए, इसके बाद पुलिस ने सभी को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।

एनकाउंटर में मार गिराए सिमी सदस्यों के शवों के पास जांच करते पुलिस अधिकारी। (Photo Source: PTI)

दिवाली के बाद सोमवार को जब नरेश कुमार चांदपुर गांव में सुबह करीब सात बजे अपने घर से बाहर निकले तो देखा कि आठ लोग नदी के किनारे खेतों के रास्ते जा रहे हैं। ये नरेश से करीब 500 मीटर दूरी पर थे। 24 वर्षीय पाल खेती करते हैं और चांदपुर गांव में एक स्टोर भी चलाते है। पाल ने सोचा कि ये मछुआरे होंगे या फिर आस-पास के गांव के लोग होंगे। लेकिन उनका यह पहला अंदाजा गलत निकला। ये सिमी सदस्य थे, जो कि सोमवार को कथित रूप से भोपाल सेंट्रल जेल तोड़कर भाग निकले थे। इसके बाद पुलिस ने इन आठों सदस्यों को चांदपुर से तीन किलोमीटर दूरी पर एनकाउंटर में ढेर कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस से पाल ने बताया कि पहली बार देखने के बाद उसने करीब डेढ़ घंटे बाद तीन लोगों को फिर से देखा। इस बार वे काफी नजदीक थे। पाल ने बताया, ‘यहां बिजली की सप्लाई कभी-कभी आती है। सुबह बिजली आई हुई थी, मैं नदी के किनारे सुबह फसल को पानी देने के लिए अपने खेतों में गया था। मैंने तीन लोगों को नदी के दूसरी तरफ के किनारे की तरफ देखा। तीनों ने अपनी पैंट और जूते उतारे हुए थे, वे इन्हें अपने हाथों में लेकर चल रहे थे। एक के पास बैग था। मैंने नहीं देखा कि उनके पास कोई हथियार भी थे। अन्य पांच नदी में हो सकते हैं, क्योंकि मैंने उन्हें नहीं देखा। मैंने हाथ उठाया और कहा कि जय श्री राम, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया।’

वीडियो में देखें- सिमी भारत में चाहता है इस्लामी राज्य, कुरान को ही मानता है संविधान

जब पाल आठ बजे के करीब अपने घर लौटे तो उन्होंने टीवी चलाई तो उन्हें जेल से सिमी सदस्यों के भागने के बारे में पता लगा। पाल ने कहा ‘मुझे शक हुआ। मेरा फोन काम नहीं कर रहा था। इसलिए मैंने दूसरे किसान ज्ञान सिंह से फोन लिया। उसने 100 नंबर डायल किया और मैंने एक पुलिस वाले से बात की। पुलिसवाले ने मुझसे पूछा कि क्या आपने लोगों को पकड़े बदलते हुए देखा है। उसने मुझे ईटखेड़ी गांव आने के लिए कहा, लेकिन मैंने कहा कि मैं नहीं आ सकता।’

ज्ञान सिंह और पाल दोनों चांदपुर की मुख्य बस्ती की तरफ चले गए, उन्होंने बाकी गांव वालों को इस बारे में बताया। सरपंच मोहन सिंह मीणा को भी इस बारे में बताया गया। पुलिस को दूसरी कॉल की गई। पाल के मुताबिक 10 बजे के करीब एटीएस के लोग आए और उसे उसके गांव से तीन किलोमीटर दूर मनीखेड़ी लेकर गए। उसने बताया, ‘हम देख सकते थे कि वे लोग पहाड़ी चढ़ रहे थे। मैंने उनका कुछ दूरी तक पीछा किया, लेकिन एक प्वाइंट पर मुझसे रुकने के लिए कहा गया। हमें ज्यादा आगे जाने की अनुमति नहीं थी।’ कुछ ही मिनट बाद पुलिसकर्मियों ने गांव को घेर लिया और उन्होंने उस पहाड़ी को भी चारों तरफ से घेर लिया, जिस पर वे लोग चढ़ रहे थे। इसके बाद पाल ने दूरी से एक गोली की आवाज सुनी, लेकिन कहते है कि वे यह नहीं बता सकते कि दोनों तरफ से फायरिंग हुई थी। उसने बताया, ‘मैंने शव भी नहीं देखे थे। हमें वहां जाने नहीं दिया गया था।’ बुधवार तक उस इलाके में एनकाउंटर की जगह देखने के लिए काफी लोगों पहुंचे, लेकिन गुरुवार तक यह भीड़ कम हो गई। अब वहां केवल चट्टानों पर खून के निशान हैं और एक से आठ तक निशान लगाए हुए हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 4, 2016 10:47 am

सबरंग