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चोरों के धंधे पर भी पड़ी नोटबंदी की मार

नोटबंदी से चोरी के धंधे में भी गजब की मार पड़ी है। एक अर्थों में तो यहां मंदी ही छा गई है।
500 के पुराने नोट। (फाइल फोटो)

नोटबंदी से चोरी के धंधे में भी गजब की मार पड़ी है। एक अर्थों में तो यहां मंदी ही छा गई है। इसका सबसे ज्यादा असर मोटरसाइकिलें और कार चुराने का धंधा करने वाले चोरों पर पड़ा है। इनकी रोजी-रोटी पर लाले आ गए हैं। गाड़ियां चुराने वाले गिरोह के बदमाश मोटरसाइकिलें व कार चुराने में तो कामयाब हो जा रहे हैं लेकिन इन्हें बेचने में उन्हें नाकों चने चबाना पड़ रहा है। जबकि नोटबंदी से पहले इन चोरों का धंधा बहुत अच्छा चल रहा था। पहले चोरी की मोटरसाइकिलें व कार हाथों-हाथ बिक जाया करती थी। लेकिन अब इनके ग्राहक ढूढ़े भी नहीं मिल रहे हैं।

इस राज का पता तब चला जब हरिद्वार पुलिस ने रानीपुर क्षेत्र में योगेश और मोसीन अली नाम के दो वाहन चोर सरगनाओं को पकड़ा। इनके पास से 12 मोटरसाइकिलें और एक मोटरसाइकिल का चैसिस बरामद किया गया। इसके अलावा मोटरसाइकिलों की चाबियों का एक गुच्छा भी मिला है। पुलिस पूछताछ में इन चोरों ने पुलिस को यह बताकर आश्चर्य में डाल दिया कि नोटबंदी के चलते उनके धंधे में भारी गिरावट आई है। चोरों ने बताया कि उन्हें चोरी के माल बेचने में काफी दिक्कतें हो रही हैं। इन दिनों ग्राहकों का टोटा पड़ गया है।
गिरोह के मुख्य बाकीसरगना योगेश कुमार ने मीडिया और पुलिस वालों को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले ने चोरी के धंधे को चौपट करके रख दिया है।उसने बताया कि पहले धंधा चोखा चलता था, लेकिन अब बाजार में चोरी का माल खरीदने वालों का आकाल पड़ गया है। उन्होंने कहा कि पहले वह चोरी की एक मोटरसाइकिल आठ से नौ हजार में बेच दिया करता था लेकिन अब चार से पांच हजार रुपए में भी नहीं बेच पा रहा है। इससे उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

दूसरे चोर मोसीन अली का कहना है कि हरिद्वार, रूड़की, मुजफ्फरनगर और देहरादून में चोरी के मालों का अच्छा खासा बाजार है। लेकिन नोटबंदी के बाद यहां ग्राहकों का टोटा पड़ गया है। ऐसी स्थिति में चोरी के मालों को खपाना अब ज्यादा जोखिम भरा हो गया है। इस बाबत हरिद्वार के नगर पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा का कहना है कि नोटबंदी के बाद वाहन चोरों के धंधे में काफी गिरावट आई है। उनका मानना है कि पहले वाहन चोर आसानी से माल बेच लेते थे, लेकिन अब उन्हें ग्राहक खोजने में मुश्किलें आ रही हैं।

 

 

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