ताज़ा खबर
 

अपने हाथों से जाम तैयार कर भक्‍तों को प‍िलाता था राम रहीम, 15 फीसदी कमाई देने का लेता था वादा

बलात्कारी बाबा राम रहीम को दो साध्वियों के साथ रेप करने के मामले में सीबीआई कोर्ट ने 20 सजा की सजा सुनाई थी।
बलात्कारी बाबा राम रहीम सिंह अभी जेल में बंद है।

जेल में बंद बलात्कारी बाबा राम रहीम सिंह अपने भक्तों को ‘जाम-ए-इन्सां’ नाम की एक ड्रिंक पिलाता था। यह ड्रिंक वही भक्त पीता था, जो डेरे के 47 नियमों का पालन करने का प्रण लेता था। इन नियमों में अपनी कमाई का कुछ हिस्सा डेरे में देने और अहिंसा के रास्ते पर चलने जैसी शर्तें शामिल थीं। डेरे का दावा था कि इस जाम को पीकर भक्तों के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते थे। इस जाम को बाबा राम रहीम खुद अपने हाथों से तैयार करता था। पिलाने से पहले बाबा अपने भक्तों को पांच कसमें खिलाता था।

नीचे दिए गए वीडियो में जाम पिलाने से पहले बाबा राम रहीम अपने भक्तों को कसम खिलाते हुए दिख रहे हैं। जिसमें वह कहते हैं, ‘सबसे पहली कसम उस ओम, हरि, अल्लाह, गॉड, खुदा, मालिक के नाम की जिसने इस सारी सृष्टि को बनाया। दूसरी कसम धरती पर आए पहले गुरू मुर्शिद-ए-कामिल की, जिन्होंने इंसान को मालिक से जोड़ा। तीसरी कसम उनके नाम की, जिन्होंने डेरा सच्चा सौदा को बनाया, मुर्शिद-ए-कामिल बेपरवाह सच्चे साईं, दाता, रहबर, मस्ताना जी महाराज। चौथी कसम हमारे गुरु मालिक शाह सतनाम जी महाराज के नाम की। पांचवीं कसम शाह संगत के प्यार मोहब्बत, ढृढ विश्वास के लिए नाम की।’ रुहानी जाम को डेरे में ही पीना होता था, इसे घर पर साथ लेकर नहीं जाना होता था। इसके साथ ही यह छोटे बच्चों और जिन्होंने बाबा राम रहीम से गुरुमंत्र नहीं लिया होता, उन्हें इसका सेवन नहीं करने दिया जाता था। इसके साथ ही जाम पीने वालों को एक फॉर्म भी भरना होता था। फॉर्म भरने के बाद इन्सां का लॉकेट मिलता था। बाबा राम रहीम साल 2007 से यह ड्रिंक अपने भक्तों को पिला रहा है।

इस जाम को सबसे पहले बाबा राम रहीम खुद पीता था। इसके बाद जो भक्त 47 कसमें खाता था, उसे यह रुहानी जाम नसीब होता था। हर भक्त को जिंदगी में एक बार इसका सेवन करना होता था। इसके पीने के लिए निर्धारित किए गए कुछ नियम बता रहे हैं। रुहानी जाम का सेवन करने से पहले ये 47 नियम बताए जाते थे। इसके नियम नंबर 36 के तहत अहिंसा का पालन करना होता था और किसी जीव की हत्या और उसे ना सताने की कसम खाई जाती थी। वहीं इसके 11 नंबर नियम के मुताबिक अपनी कमाई का 15वां हिस्सा डेरे को देना होता था। डेरे का दावा था कि यह कमाई जरूरतमंदों की सहायता में लगाई जाती था।

‘जाम-ए-इन्सां’ के बारे में कई तरह की बातें सामने आने के बाद डेरे के अखबार ने सफाई दी है। अखबार का दावा है कि ‘जाम-ए-इन्सां’ को तैयार करने में दूध, पानी, शरबत-ए-रुह का इस्तेमाल होता था। इसे लाखों लोगों के सामने खुले में तैयार किया जाता था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.