December 10, 2016

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पीएम नरेन्द्र मोदी के गोद लिए गांव जयापुर में चप्पलें बदलवा रही हैं 500-1000 के नोट

नोट बैन से पूरे देश में अफरा-तफरी का आलम है और लोग नकदी के लिए बैंकों और एटीम में घंटों लाइन लगाकर खड़े हैं।

जयापुर में सुबह 5 बजे से ही चप्पलें लाइन में लगी हैं। (फोटो-स्क्रीनशॉट)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदर्श ग्राम योजना के तहत अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जिस गांव जयापुर को गोद लिया था आज वो भी चर्चा में है। चर्चा में इसलिए कि पहले इस गांव में बैंक नहीं था, पीएम मोदी की पहल पर यहां बैंक खुला। अब इस गांव के लोग भी 500-1000 के नोटबंदी के सरकार के आदेश से परेशान हैं। मसलन, उसे बदलवाने के लिए लोगों ने चप्पल से लाइन लगाई है। लाइन में खुद खड़े न होकर लोगों ने चप्पलों को लाइन में लगी दिया है। लोगों ने चप्पल पर अपने नाम की स्लिप भी लगा रखी है ताकि कोई गलतफहमी न हो।

नोट बैन से जहां पूरे देश में अफरा-तफरी का आलम है और लोग नकदी के लिए बैंकों और एटीएम में घंटों लाइन लगाकर खड़े हैं। वहीं एनडीटीवी के मुताबिक, जयापुर में लोगों के बदले उनकी चप्पलें यह काम कर रही है। ठीक उसी तरह जैसे श्रीराम के वनवास के दौरान उनके भरत ने उनके खड़ाऊं से राज-पाट चलाया था। तस्वीर में दिख रही चप्पलें सुबह 5 बजे से ही लाइन में लगी हैं। दरअसल, 500, 1000 के पुराने नोट बदलने के लिए लोग खड़े-खड़े थक जाते हैं। इसलिए, लाइन में अपनी चप्पलों को ही लगा दिया है।

पैसा बदलने आए लोगों की अलग-अलग कहानियां हैं लेकिन सबका मजमून एक ही है। सभी को रोजमर्रे की जरूरतें पूरी करने के लिए कैश की जरूरत है। मसलन किसी के घर में शादी है तो किसी को दवा लेनी है। कुछ को किताब-कॉपी खरीदनी है तो कुछ को खेतीबारी का सामान खरीदना है। लोगों को लग रहा है कि नए नोट नहीं मिलेंगे तो उनकी जिंदगी ठप पड़ जाएगी। शहरों में तो कार्ड स्वैपिंग का विकल्प भी है लेकिन जयापुर जैसे गांव के लोगों के लिए तो यही बैंक एकमात्र सहारा है। पड़ोस के भी तीन-चार गांव इसी बैंक पर निर्भर हैं। लिहाजा लाइन में लग कर नोट बदलना ही एकमात्र उपाय है। पहले कमाने की जद्दोजहद थी और अब नोट बदलने की है।

वीडियो देखिए: नोट बदलने के लिए बैंक पहुंचे राहुल गांधी, कतार में खड़े रहे; कहा- “लोगों का दर्द बांटने आया हूं”

 

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First Published on November 13, 2016 2:10 pm

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