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वसुंधरा सरकार को गहलोत और तिवाड़ी ने कठघरे में खड़ा किया

राजस्थान में भाजपा की वसुंधरा सरकार की कार्यशैली को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ही भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाडी ने निशाने पर ले रखा है।
Author जयपुर | January 17, 2016 23:56 pm
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (पीटीआई फाइल फोटो)

राजस्थान में भाजपा की वसुंधरा सरकार की कार्यशैली को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ही भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाडी ने निशाने पर ले रखा है। गहलोत तो प्रतिपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं पर तिवाडी तो भाजपा के ही है। दोनों नेताओं के तीखे तेवरों से कांग्रेस और भाजपा के भीतर भी खलबली मची हुई है। भाजपा में तिवाडी का कद भी मुख्यमंत्री स्तर के नेता का होने से पार्टी में वसुंधरा समर्थक खेमा उनके खिलाफ सक्रिय हो गया है। राज्य की राजनीति में इन दिनों गहलोत और तिवाडी के प्रदेश भर में चल रहे दौरों को लेकर कई तरह की सुगबुगाहट चल रही है। तिवाडी ने हाल में अलवर, पाली, सिरोही आदि जिलों का दौरा कर अप्रत्यक्ष तौर पर मुख्यमंत्री राजे को निशाने पर लिया।

आरएसएस की अलवर में हुई प्रदेश स्तरीय समन्वय बैठक में तिवाडी भी शामिल हुए थे। इस बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी के साथ ही वरिष्ठ मंत्री अरुण चतुर्वेदी और कई नेता मौजूद थे। इस बैठक में प्रदेश भाजपा सरकार के कामकाज को लेकर आरएसएस के पदाधिकारियों ने कई सुझाव नेताओं को दिए हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मुखालफत करने वाले वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाडी ने दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को फैलाने के साथ ही आर्थिक रूप से पिछड़ों के आरक्षण का मुद्दा जोर शोर से उठा रखा है। इन्हें लेकर ही तिवाडी इन दिनों प्रदेश के जिलों का दौरा कर रहे हैं।

वसुंधरा राजे की पिछली सरकार में मंत्री रहे तिवाडी ने पाली में कहा कि वे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगे। तिवाडी का कहना है कि उनके और मुख्यमंत्री राजे के बीच वैचारिक मतभेद है। इसके चलते वह भी मुझे सरकार में शामिल नहीं करना चाहती और मैं भी उनकी सरकार में मंत्री नहीं बनना चाहता। तिवाडी का कहना है कि वह पार्टी का काम करते रहेंगे। उनका कहना है कि वे सामाजिक समरसता और आर्थिक न्याय के लिए काम कर रहे हैं। जयपुर शहर की सांगानेर सीट से तिवाडी विधायक हैं और प्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेताओं में उनकी गिनती होती है। उनके साथ पिछले दिनों पार्टी के एक कार्यक्रम में बदसलूकी की घटना हुई थी जिसकी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व तक भी शिकायत पहुंची थी। भाजपा सूत्रों का कहना है कि भाजपा आलाकमान तिवाडी को पार्टी में सक्रिय करना चाहता है। पर तिवाडी ने वसुंधरा सरकार में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है।

वसुंधरा सरकार को कई मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दमदार तरीके से कठघरे में खड़ा करने में लगे हैं। गहलोत ने सरकार पर प्रदेश के नेताओं और अफसरों के फोन टैपिंग का आरोप लगाया था। गहलोत की सरकार के खिलाफ बढती सक्रियता से कांग्रेस में उनका विरोधी गुट सकते में आ गया है। गहलोत ने इसी हफ्ते उदयपुर संभाग के साथ नागौर और सीकर जिलों का सघन दौरा किया। इन दौरों में गहलोत ने वसुंधरा सरकार को हर मोर्चे पर नाकाम करार दिया। गहलोत की सभाओं में भीड़ उमड़ने की सूचनाओं से सरकार में खलबली भी मची हुई है। भाजपा शासन में नौकरशाही के बढते भ्रष्टाचार को लेकर गहलोत ने पूरी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गहलोत का आरोप है कि राजधानी जयपुर में ही सरकार की तीनों बड़ी संस्थाओं जिला कलेक्ट्रेट, पुलिस कमिश्नरेट और जयपुर विकास प्राधिकरण भ्रष्टाचार के अड्डे बने हुए हैं। इन तीनों के आला अफसरों को सरकार का संरक्षण भी हासिल है।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने नागौर जिले के दौरे के दौरान कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। गैंगस्टर आनंदपाल की पुलिस हिरासत के दौरान हुई फरारी इसका उदाहरण है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार के इशारे पर पुलिस की देखरेख में आानंदपाल को भगाया गया है। बाडमेर में रिफाइनरी लगाने में हो रही देरी पर गहलोत ने सरकार की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की देरी भी सरकार की लापरवाही का नतीजा है। गहलोत का कहना है कि उनकी पिछली सरकार की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को भाजपा सरकार ने बंद कर प्रदेश की गरीब जनता के साथ बड़ा अन्याय किया है।

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