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नोटबंदी के नरेंद्र मोदी के फैसले से उड़ गई थी असम के भाजपा सीएम सरबानंद सोनोवाल की नींद, चालाकी से निकाला उपाय

मुख्यमंत्री सोनोवाल ने सभी चाय बागान मालिकों को निर्देश दिया कि वो कामगारों की तन्ख्वाह राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में ट्रांसफर कर दें।
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 8 नवंबर को नोटबंदी का एलान किया था तब असम में भाजपा के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल की नींद उड़ गई थी। उन्हें यह चिंता सता रही थी कि असम के चाय बागानों में काम करने वाले करीब 20 लाख मजदूरों को सैलरी कैसे दी जाएगी क्योंकि इन कामगारों को वहां कैश में ही वेतन मिलता है। नोटबंदी के अगले ही दिन वहां चाय बागान के कामगारों को मासिक वेतन दिया जाना था।

सोनोवाल की यह चिंता इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि उसके कुछ दिनों बाद ही असम में उप चुनाव होने वाले थे। नोटबंदी के बाद बैंक बंद हो गए थे। उलके अगले दिन से एटीएम के साथ-साथ बैंकों में भी लंबी-लंबी लाइन लगी थी। हालांकि, सर्बानंद सोनोवाल ने बड़ी ही चतुराई से इस समस्या का हल निकाल लिया।

खबर है कि मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल ने इसके लिए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय से संपर्क किया। वहां से उन्हें इस समस्या का जबर्दस्त आइडिया मिला। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी चाय बागान मालिकों को निर्देश दिया कि वो कामगारों की तन्ख्वाह राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में ट्रांसफर कर दें। इसके बाद सभी बागान मालिकों ने ऐसा ही किया और उन पैसों को फिर सभी जिलाधिकारियों को भेज दिया गया। जिलाधिकारियों ने उन पैसों को बागान कर्मचारियों के बीच बंटवा दिया। इस तरह सीएम सोनोवाल ने सूझबूझ के साथ समस्या का समाधान निकाल लिया।

गौरतलब है कि नोट बंदी के बाद से देशभर में जहां लोगों की लंबी-लंबी लाइनें बैंक और एटीएम सेन्टर्स पर लगी है वहीं लोग छुट्टे पैसे के लिए भी बेचैन हैं। इस बीच कई लोग मोटे कमीशन पर 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बदलने के कारोबार में भी लिप्त पाए गए हैं। देशभर में कई शहरों से ऐसे लोगों की गिरफ्तारी हुई है जो करोड़ों की रकम की अदला-बदली कर रहे थे।

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