June 27, 2017

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गुजरात मॉडल बनाम दिल्ली मॉडल, केजरी का मोदी पर हमला, दिल्ली को बताया विकास का प्रतीक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात मॉडल की तुलना में विकास के दिल्ली मॉडल को पेश करते हुए कहा कि जनता छला हुआ महसूस कर रही है क्योंकि विकास के नाम पर वोट लिए गए लेकिन ध्यान अब ‘भारत माता की जय’ के नारे जैसे मुद्दों पर है।

Author नई दिल्ली | April 28, 2016 01:28 am
अरविंद केजरीवाल ने गुजरात मॉडल की तुलना में विकास के दिल्ली मॉडल को पेश करते हुए कहा कि जनता छला हुआ महसूस कर रही है क्योंकि विकास के नाम पर वोट लिए गए लेकिन ध्यान अब ‘भारत माता की जय’ के नारे जैसे मुद्दों पर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुजरात मॉडल की तुलना में विकास के दिल्ली मॉडल को पेश करते हुए कहा कि जनता छला हुआ महसूस कर रही है क्योंकि विकास के नाम पर वोट लिए गए लेकिन ध्यान अब ‘भारत माता की जय’ के नारे जैसे मुद्दों पर है।

केजरीवाल ने कहा, ‘लोकसभा चुनावों से पहले देश के सामने मिथक पैदा किया गया। मिथक का नाम विकास का गुजरात मॉडल था। लोकसभा चुनावों से एक साल पहले विकास के गुजरात मॉडल के बारे में कहानी गढ़ी गई। आज पूरा देश कह रहा है कि वे ठगे गए हैं। गुजरात मॉडल क्या था। लोग कहते हैं कि उनके पास फोटोशॉप एडिटर हैं। वे स्विट्जरलैंड की सड़क दिखाएंगे और कहेंगे कि यह गुजरात की सड़क है। इस तरह से देश को उन्होंने ठगा। आज विकास के गुजरात मॉडल की कहानी है और विकास के दिल्ली मॉडल की हकीकत है’।

केजरीवाल ने कहा, ‘हम देश और दुनिया को चुनौती देते हैं कि विकास के गुजरात मॉडल और दिल्ली मॉडल को देखें। हम लोगों को विकास के दिल्ली मॉडल को देखने के लिए आमंत्रित करते हैं। हमारे मोहल्ला क्लीनिक देखिए, इसमें कमी निकालिए और हम उन्हें सुधारेंगे’। उन्होंने पिछले एक साल में बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनार्इं।

वे यहां आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित कर रहे थे जिसमें अगले तीन साल के लिए नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी चुनी गई। हाल ही में एक सम्मेलन में भारत के प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भावुक होने की घटना को मोदी सरकार के ‘चेहरे पर बड़ा तमाचा’ बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि भाजपा सरकार से कारोबारी, सर्राफा व्यवसायी, किसान और छात्र परेशान हैं।

पार्टी के आधार में विस्तार की इच्छा जाहिर करते हुए केजरीवाल ने कहा कि ‘आप’ को 90 फीसद सीटें जीतने और सरकार बनाकर व्यवस्था में बदलाव करने के लक्ष्य से चुनाव लड़ना होगा। ‘भारत माता की जय’ के नारे के विवाद पर भाजपा पर हमला बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने बिहार चुनावों के बाद गाय को छोड़ दिया और आगे के चुनावों में हार के बाद ‘भारत माता’ को भी भूल जाएगी। रोचक बात है कि केजरीवाल ने अपने परंपरागत अंदाज में भारत माता की जय के साथ अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा, ‘वे देश को बांटने का प्रयास कर रहे हैं’। केजरीवाल ने कहा, ‘उन्होंने विकास के नाम पर वोट लिए। बिहार चुनावों से पहले वे गाय लाए। बिहार में नाकाम रहे तो गाय को छोड़ दिया। अब वे भारत माता की जय लाए हैं। अगले चुनाव हारने के बाद वे भारत माता को भी छोड़ देंगे’।

उन्होंने कहा, ‘अब वे कहते हैं कि ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाएं नहीं तो आपको पीटा जाएगा। अण्णा आंदोलन के दौरान लोग दिल से ‘भारत माता की जय’ कहते थे। पर वे इसके लिए धमकियों का सहारा ले रहे हैं। छात्रों, किसानों और सर्राफा कारोबारी समेत सभी गुस्से में हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश भी उनके सामने रो दिए। लोग राष्ट्रीय राजधानी में आप के शासन मॉडल से बहुत संतुष्ट हैं और अगर आज चुनाव कराए जाए तो भाजपा को एक सीट भी हासिल नहीं होगी’।

दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच विभिन्न विवादों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया, ‘वे आप के प्रयासों को बर्बाद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, फिर भी हम आगे बढ़ रहे हैं और दिल्ली की जनता के लिए काम कर रहे हैं’। केजरीवाल ने कहा, ‘हम अपना घोषणापत्र रोज पढ़ते हैं और उस पर काम करते हैं जबकि उन्हें शायद ही अपने किए गए वादे याद हों। केंद्र ने कुछ नहीं किया है। वे कहते हैं कि हम 2022 में यह करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि वह उस समय सत्ता में नहीं होंगे’।

आम आदमी पार्टी की नव गठित कार्यकारिणी समिति ने अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना। कार्यकारिणी ने 10 सदस्यीय राजनीतिक मामलों की समिति (पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी या पीएसी) का भी चयन किया जिसमें कुछ पुराने और कुछ नए चेहरे हैं। पीएसी में शामिल हैं-अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, पंकज गुप्ता, कुमार विश्वास, आतिशी मर्लिना, अमतुल्ला, साधु सिंधु, दुर्गेश और गोपाल राय। पीएसी में पहली बार किसी महिला को शामिल किया गया है। वहीं इल्लियास आजमी की छुट्टी कर दी गई है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता चयनित किए गए और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राघव चड्ढा।

केजरीवाल फिर चुने गए आप के राष्ट्रीय संयोजक

आम आदमी पार्टी ने बुधवार को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की जिसमें सात महिलाओं सहित 25 सदस्य हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए कार्यकारिणी में कई सदस्य पंजाब से चुने गए हैं। इसके अतिरिक्त पांच राज्य संयोजक इसके पदेन सदस्य बन गए हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी से जुड़े फैसले लेने वाली दूसरी सबसे बड़ी इकाई है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों में पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय, पंकज गुप्ता, आशुतोष और कुमार विश्वास शामिल हैं। नए सदस्यों में यामिनी गोमर, राजेंद्र पाल गौतम, प्रीति शर्मा मेनन, दुर्गेश पाठक, भगवंत मान, कानू भाई कलसारिया, हरजोत बैंस, बलजिंदर कौर, राघव चड्ढा, आशीष तलवार, आतिशी मर्लेना, साधु सिंह, दिनेश वाघेला, मीरा सान्याल, भावना गौड़, राखी बिड़ला, इमरान हुसैन और अमानतुल्ला खान हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए एक बड़ा लक्ष्य है, इसलिए कार्यकारिणी में पंजाब से कई नाम हैं। राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से आप नेता आशुतोष ने कहा, ‘सर्वेक्षण के अनुसार पार्टी पंजाब में 117 में से 80 से लेकर 100 सीट जीत सकती है। लेकिन आप नेता ने आगे कहा कि पार्टी केवल दिल्ली या पंजाब तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर आशुतोष ने कहा कि इस पर बाद में फैसला किया जाएगाह्ण।

नई कार्यकारिणी में सात महिला सदस्य
पार्टी के पांचवे राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अंगीकृत राजनीतिक प्रस्ताव पर आप नेता आशुतोष ने कहा, ‘पार्टी यह मानती है कि आज का जो राजनीतिक माहौल है और जिस तरह से नरेंद्र मोदी की सरकार है, वह नफरत का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रही है। यह आरएसएस की सरकार है जिसका मुकाबला कांग्रेस नहीं कर सकती। सिर्फ आम आदमी पार्टी ही आरएसएस का सामना कर सकती हैह्ण। प्रस्ताव में शासन के दिल्ली मॉडल को प्रसारित करने की बात कही गई है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निष्कासनों और इस्तीफों के कारण पिछले एक साल में इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इसकी शुरुआत योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण मामले के साथ हो गई थी। यादव और भूषण को कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। बुधवार को कार्यकारिणी से जिन नामों को बाहर किया गया, वे हैं, नवीन जय हिंद, सुभाष वारे, मयंक गांधी, दिनेश वाघेला, हबन पयांग, योगेश दहिया, इलियाज आजमी, कृष्णा कांत सेवड़ा, और प्रेम सिंह पहाड़ी। नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक कर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और राजनीतिक मामलों की समिती के गठन पर फैसला लेगी।

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First Published on April 28, 2016 1:28 am

  1. A
    AKKI
    Apr 28, 2016 at 6:26 am
    Jai Prakash हा आप की सरकार ने प्रचार में पोस्टर में बहुत आगे हे काम तो कुछ करता नहीं हे हा देल्ही को गुजरात तो नहीं लेकिन बिहार जरूर बना दिया215about an hour ago (1) � (0) reply (0)
    Reply
    1. A
      Amar Sachan
      Apr 28, 2016 at 4:51 am
      दिल्‍ली अौर गुजरात या किसी भी अन्‍य प्रदेश से दिल्‍ली की तुलना करना मूर्खता पूर्ण विचार है। दिल्‍ली का पूरा क्षेत्रफल किसी भी प्रदेश के दो जिलों से अधिक नहीं होगा। बल्कि राजस्‍थान एवं मध्‍यप्रदेश के कुछ जिले तो दिल्‍ली से भी क्षेत्रफल में अधिक हैं। फिलहाल आप सरकार ने दिल्‍ली में ऐसा कुछ नया नहीं किया जिससे अपनी पीठ ठोंक सके। सार्वजनिक परिवहन में अभी तक १००० नई बसें भी नहीं जुडी और पुरानी ३०० से अधिक बसें जंकयार्ड में पहुंच गई हैं। दिल्‍ली के बस बेडे में, रोज ३५० बसें बीच राह में खडी होती है
      Reply
      1. J
        jai prakash
        Apr 28, 2016 at 5:15 am
        हा आप की सरकार ने प्रचार में पोस्टर में बहुत आगे हे काम तो कुछ करता नहीं हे हा देल्ही को गुजरात तो नहीं लेकिन बिहार जरूर बना दिया
        Reply
        1. I
          Indian
          Apr 28, 2016 at 4:26 am
          सोचते थे इंजीनियर है कुछ अच्छा काम करेगा लेकिन तू तो बककि में सबका बाप निकला ी जूते फेंके जाते हैं तेरे उप्र तू इसी लायक है
          Reply
          1. S
            surya
            Apr 29, 2016 at 5:29 am
            सिर्फ यही लिंक काफी है किसी को भी समझाने के लिए की गुजरात में क्या विकास हुआ है.
            Reply
            1. H
              Hindustani
              Apr 28, 2016 at 3:55 am
              All time worst government is running in Delhi at this time. Delhi has been gone 20 year back. It is worst then Shila Dixit government.
              Reply
              1. Load More Comments
              सबरंग