December 10, 2016

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ग्लैमर के लिए पाकिस्तान जाने की चाह रखने वाली लड़कियां होती थीं इस्तेमाल

इस जासूसी प्रकरण का प्रमुख हथकंड़ा लड़कियों का इस्तेमाल और ब्लैकमेलिंग था। भारी धनराशि का भुगतान इसका दूसरा पहलू था। बीएसएफ के कई अफसरों से मौलाना रमजान के लिंक थे।

Author नई दिल्ली | October 28, 2016 00:15 am

संवेदनशील रक्षा दस्तावेज तथा भारत-पाक सीमा पर बीएसएफ की तैनाती से संबंधित ब्योरा पाकिस्तान की खुफिया एजंसी आइएसआइ को देने में शामिल महबूब अख्तर व उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी से कई राज सामने आए हैं। पाक हाई कमीशन से चल रहे जासूसी रैकेट में लड़कियों के भी शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आइएसआइ एजंट महमूद अख्तर और मौलाना रमजान सुरक्षा बलों से खूफिया जानकारी लेने के लिए हनी ट्रैप का इस्तेमाल करते थे। अख्तर से होते हुए यह ब्योरा पाकिस्तानी खुफिया एजंसी तक पहुंचता था। बता दें कि इसमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कुछ लोग भी जांच के दायरे में आने वाले हैं। सूत्रों की माने तो बीएसएफ के कुछ रिटायर्ड अफसर भी रडार पर हैं। सूत्रों ने बताया कि तीन और लोग भी पुलिस संदेह के घेरे में हैं। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस पाकिस्तानी उच्चायोग के कुछ और लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।


इस जासूसी प्रकरण का प्रमुख हथकंड़ा लड़कियों का इस्तेमाल और ब्लैकमेलिंग था। भारी धनराशि का भुगतान इसका दूसरा पहलू था। बीएसएफ के कई अफसरों से मौलाना रमजान के लिंक थे। खुफिया एजंसियों की ओर से मुहैया कराए गए इनपुट पर दिल्ली पुलिस ने कुछ अधिकारियों की पहचाना कर ली है। सूत्रों का कहना है कि हनी ट्रैप के लिए मौलाना रमजान ऐसी लड़कियों का इस्तेमाल करता था, जो पाकिस्तान जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें वीजा नहीं मिल पाता था। अख्तर हाई कमीशन के वीजा सेक्शन में काम कर रहा था। मौलाना अख्तर के जरिए उनका वीजा बनवाता था। दरअसल जिन लड़कियों का इस्तेमाल हुआ है उनमें पेशेवर कम थी। लेकिन धन और ग्लैमर व विदेश जाने की ख्वाहिश के चलते पहले फंसती और फिर इस्तेमाल हुर्इं। मौलाना, सुभाष और शोएब लड़कियों के रिश्तेदारों का भी वीजा बनवाकर या दूसरी तरह से मदद कर उसके साथ नजदीकियां बढ़ाते थे। लड़कियों को अफसरों के पास भेजते थे। और ब्योरा पाते। हालाकि पुलिस ने इन लड़कियों से जुड़ी जानकारी नहीं दी लेकिन कहा कि इस कोण की गहराई से जांच की जा रही है।

 

 

जांच की जद में बीएसएफ अधिकारी
बीएसएफ कर्मियों की संभावित संलिप्तता के बारे में सूत्रों ने कहा कि उनसे जो दस्तावेज बरामद हुए हैं वह संवेदनशील हैं और सूचना की जानकारी रखने वाले व्यक्तियों की मदद के बिना हासिल नहीं किए जा सकते। हमें संदेह है कि बीएसएफ के कुछ कर्मियों ने उनकी मदद की है। जिसकी जांच जारी है। इसमें शामिल कुछ अधिकारियों की पहचान की जा चुकी है और कुछ नए नाम जल्द ही सामने आ सकते हैं।

अख्तर ने बनवा रखे थे आधार कार्ड
पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक की मदारी वाली गली के पास रोदग्राम मुहल्ले के मकान नंबर 2350 से गिरफ्तार पाकिस्तानी नागरिक व पाक अधिकारी महबूब अख्तर का यह वह पता है जहां के पते के आधार पर उसने ढाई साल पहले भारतीय खूफिया एजंसियों से बचने के लिए आधार कार्ड तक बनवा लिया था। उसने खुद को महबूब राजपूत बताया था। लेकिन शातिर शक्स यहां रहता नहीं था इसका अंदाजा इसके मोड्यूल से लगाया जा सकता है। पाकिस्तानी खुफिया एजंसी आएसआइ के लिए जासूसी करने वाले अख्तर ने भारतीय खुफिया एजंसियों से बचने के लिए पूरे इंतजाम कर रखे थे।

सेना के पते, नक्शे व वीजा बरामद
इनके पास से रक्षा से जुड़े नक्शे, बीएसएफ अधिकारियों की लिस्ट और कई वीजा बरामद हुआ है। 35 साल के अधिकारी को तब रंगे हाथ पकड़ा गया जब वह एक भारतीय नागरिक से दस्तवेज खरीद रहा था। उसके साथी नागपुर से दिल्ली आए थे। पुलिस को इस शख्स के संबंध में जानकारी आइबी से मिली थी। दिल्ली पुलिस इस मॉड्यूल पर पिछले छह महीने से नजर रख रही थी।

 

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First Published on October 28, 2016 12:14 am

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