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11 साल से जेल में बंद थी पाकिस्तानी महिला और भारत में जन्मी बेटी, 4 लाख रु देकर भारतीय NGO ने करवाया रिहा

उन्होंने हर उस व्यक्ति का धन्यवाद किया है जिन्होंने उनकी रिहाई में अपना योगदान दिया है।
फातिमा रिहा होने के लिए इतनी राशि का इंतजाम नहीं कर पाई जिसके बाद कोर्ट ने उसकी सजा को आगे बढ़ा दिया। (Photo Source: Twitter)

पंजाब के एक एनजीओ द्वारा अमृतसर जेल में कैद पाकिस्तानी महिला और भारत में जन्में उसके बच्चे को रिहा कराने के लिए 4 लाख रुपए हर्जाना भरा गया है। इस एनजीओ का नाम सरबत दा भला है जो कि पंजाब के बटाला में स्थित है। पंजाब पुलिस ने 2006 में अटारी रेलवे स्टेशन से पाकिस्तानी महिला फातिमा और उसकी बहन को गिरफ्तार किया था। इन दोनों की गिरफ्तारी समझौता एक्सप्रेस में हुई थी। इन दोनों महिलाओं को ड्रग्स की तस्करी करने के आरोप में पकड़ा गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार फातिमा को जब पकड़ा गया था तब वह गर्भवती थी। जेल में रहते हुए फातिमा ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम हीना है।

भारतीय कोर्ट ने ड्रग्स की तस्करी करने का दोषी मानते हुए फातिमा और उसकी बहन को दस साल की कैद और 4 लाख रुपए जुर्माना लगाया था। फातिमा रिहा होने के लिए इतनी राशि का इंतजाम नहीं कर पाई जिसके बाद कोर्ट ने उसकी सजा को आगे बढ़ा दिया। बाहर निकलने के लिए उन्होंने काफी कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाईं। इन दोनों के अपराध की सजा उस बच्ची को भी मिली जिसने जेल में जन्म लिया। बिना किसी कारण के हीना को भी जेल में रहना पड़ा। खैर अब रिहाई के बाद सभी काफी खुश हैं।

इस मामले पर बात करते हुए सोसाएटी फॉर वूमेन एम्पावरमेंट एंव ग्रीन की अध्यक्ष और पेशे से वकील नवजोत कौर छाबड़ा ने बताया कि दोनों पाकिस्तानी महिला और भारत में जन्मी लड़की हीना को रिहा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वह गुरुवार को तीनों से मिलने के लिए जेल गई थीं। नवजोत कौर ने बताया कि अपनी रिहाई के बात सुनने के बाद से ही दोनों महिलाएं काफी खुश हैं। उन्होंने हर उस व्यक्ति का धन्यवाद किया है जिन्होंने उनकी रिहाई में अपना योगदान दिया है। इसके साथ ही दोनों महिलाओं ने पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी एनजीओ से पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीयों के लिए आगे आकर मदद करने की विन्नती की है।

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