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बस्सी हुए रिटायर, आलोक बने दिल्ली के पुलिस आयुक्त

मिजोरम, गोवा, चंडीगढ और आइबी में काम कर चुके बस्सी ने कहा कि दिल्ली पुलिस के सभी अधिकारियों ने उन्हें सेवाकाल में सहयोग किया इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जा रहा है।
Author नई दिल्ली | March 1, 2016 03:01 am
दिल्ली पुलिस कम्शिनर बीएस बस्सी। (फाइल फोटो)

भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आलोक कुमार वर्मा ने सोमवार को दिल्ली पुलिस के नए आयुक्त का कार्यार किया। 1979 बैच के 58 साल के वर्मा मौजूदा समय में तिहाड़ जेल के महानिदेशक थे। वे अगले 17 माह तक पुलिस आयुक्त बने रहेंगे। वर्मा ने इस पद को ऐसे समय पर संभाला है, जब जेएनयू मामले से निपटने को लेकर दिल्ली पुलिस आलोचना का सामना कर रही है। कुमार ने भीमसेन बस्सी की जगह ली है।

इससे पहले बस्सी को सोमवार को न्यू पुलिस लाइंस में भावभीनी विदाई दी गई। अपने विदाई भाषण में बस्सी ने कहा कि दिल्ली पुलिस दिल्ली वालों की ही नहीं बल्कि पूरे देश वालों की सेवा करती है। दिल्ली में पूरे देश के लोग रहते हैं और यहां संसद में सभी राज्यों से सांसद चुन कर आते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली के उपराज्यपाल के अधीन काम कर रही दिल्ली पुलिस पर किसी भी स्थानीय राजनीति के दबाव में काम नहीं करती।

मिजोरम, गोवा, चंडीगढ और आइबी में काम कर चुके बस्सी ने कहा कि दिल्ली पुलिस के सभी अधिकारियों ने उन्हें सेवाकाल में सहयोग किया इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जा रहा है। उम्मीद है नए आयुक्त को भी दिल्ली पुलिस के अधिकारी और नागरिक पूरी तरह सहयोग करेंगे। परेड की सलामी लेने के बाद बस्सी पुलिस मुख्यालय पहुंचे, जहां आलोक कुमार वर्मा के आने के बाद उन्हें अपना पद सौंपा। इसके बाद पुलिस के आला पुलिस अधिकारियों ने बस्सी को पारंपरिक तरीके से पुलिस मुख्यालय से विदाई दी।

आलोक वर्मा दिल्ली पुलिस में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इन पदों में दक्षिण जिले में पुलिस उपायुक्त, अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त, नई दिल्ली रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त, विशेष पुलिस आयुक्त (इंटेलिजेंस) और सतर्कता के विशेष पुलिस आयुक्त शामिल हैं। उनके सामने पिछले एक साल से दिल्ली सरकार और पुलिस के बीच लगातार चल रही खींचतान की चुनौती होगी। अपने कार्यकाल के अंतिम कुछ दिन बस्सी के लिए काफी विवादस्पद रहे। जेएनयू मामले की जांच में पुलिस से बरती गई कथित लापरवाही की वजह से बस्सी पर काफी सवाल खड़े किए गए। इसी बीच केंद्रीय सूचना आयोग में एक पद के लिए दिए गए उनके नाम को भी सरकार ने वापस ले लिया।

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