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PGI के डाक्टर पर कश्मीरी महिला का इलाज न करने का आरोप, कहा- वहां हमारी सेना पर पत्थर चलाते हो यहां दवा कराने आते हो

अस्पताल ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है। आरोप के बाद पीजीआई चंडीगढ़ प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
श्रीनगर के लाल चौक पर पत्थरबाजी करती लड़कियां। (फाइल फोटो-पीटीआई)

चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमईआर के डॉक्टर पर एक कश्मीरी युवक ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने उसकी मां का यह कहकर इलाज करने से मना कर दिया कि “वहां हमारी सेना पर पत्थर मारते  हो और यहां इलाज कराने आते हो।” हालांकि अस्पताल ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है। आरोप के बाद पीजीआई चंडीगढ़ प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। श्रीनगर के निवासी जावेद अहमद मलिक ने इंडियन एक्सप्रेस को  अनुसार गुरुवार (चार मई) को वो अपनी मां नसरीना को लेकर पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग के ओपीडी में गए थे।

मलिक ने बताया कि उनकी मां को इनटर्नल कोरौटाइड आर्टरी एनेयूरिसम नामक की बीमारी है और घाटी के डॉक्टरों ने उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया था। मलिक के अनुसार जब वो पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे तो वहां मौजूद डॉक्टर ने उनसे कहा, “आप वहां हमारे सेना पर पत्थर मारते हो और यहां इलाज कराने आते हो।”  मलिक ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने कश्मीर के अस्पताल की पर्ची देखकर फेंक दी। मलिक को डॉक्टर का नाम नहीं पता लेकिन कमरे के बाहर उन्होंने डॉक्टर मनोज तिवारी के नाम की नेमप्लेट लगी देखी थी।

डॉक्टर मनोज तिवारी ऐसी किसी घटना से इनकार करते हैं। डॉक्टर तिवारी के अनुसार वो गुरुवार को शहर में नहीं थे। पीजीआई की पर्ची के अनुसार डॉक्टर ने मरीज को एंजीयोग्राफी कराने के लिए कहा है। मलिक के अनुसार उन्हें बताया गया कि इलाज में 15 लाख रुपये खर्च होंगे। मलिक के अनुसार एक अन्य मरीज को केवल 80 हजार रुपये के लिए पीजीआई में ऐसे ही बरताव का सामना करना पड़ा था।

पीजीआई चंडीगढ़ के डायरेक्टर प्रोफेसर जगत राम ने कहा, “हम कश्मीर और दूसरों राज्यों के हजारों मरीजों का इलाज करते रहे हैं। कभी ऐसी कोई घटना नहीं हुई। मुझे इसके बारे में सूचित किया गया है और मैं मामले की जांच कराऊंगा।” पीजीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की अंदरूनी जांच शुरू की जा चुकी है। संबंधित विभाग के अध्यक्ष से मामले में रिपोर्ट तलब की गयी है।

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First Published on May 8, 2017 2:38 pm

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