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चौतरफा घिरी मेट्रो, यात्रियों को हो रही परेशानी

काम की अनूठी शैली विकसित करके नाम कमाने वाली दिल्ली की जीवन रेखा मेट्रो चरमराने लगी है। तीसरे चरण का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है और अभी से यह चौतरफा अव्यवस्था का शिकार है। ते
Author नई दिल्ली | August 12, 2017 01:18 am
दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ाने पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार आमने-सामने है।

काम की अनूठी शैली विकसित करके नाम कमाने वाली दिल्ली की जीवन रेखा मेट्रो चरमराने लगी है। तीसरे चरण का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है और अभी से यह चौतरफा अव्यवस्था का शिकार है। तेज गति से निर्माण व परिचालन का दम भरने वाली दिल्ली मेट्रो बदहाली का नमूना बन हर मोर्चे पर हांफते हुए चल रही है। जहां भ्रष्टाचार व कर्मचारियों पर तानाशाही रवैए के चलते मेट्रो प्रशासन कर्मचारियो के बड़े आंदोलन का सामना कर चुकी है वहीं उच्चस्तरीय बैठकों के बाद भी अभी तक उनका समाधान नहीं हो पाया है।
इस हफ्ते यलो लाइन ने यात्रियों को जमकर छकाया। बढ़े किराए से जूझते यात्री मेट्रो सेवा के बाधारहित परिचालन के लिए भी तरस गए हैं। जहां मेट्रोकर्मी सुनवाई न होने से परेशान होकर एक बार फि र आंदोलन की राह पकड़ने की तैयारी कर रहे हैं वहीं करीब नौ महीनों से भुगतान न होने से परेशान मजदूर मुहैया कराने वाले निचले ठेकेदार आंदोलन को विवश हैं। उन्होंने 15 अगस्त के बाद किसी भी दिन काम ठप कर बेमियादी अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।

यात्री ही नहीं ठेकेदार भी परेशान
एक ओर यात्रियों से मोटा किराया, विज्ञापनों व संपत्ति विकास से बड़ी कमाई क ी जा रही है दूसरी ओर निर्माण में लगे निचले ठेकेदारों का करोड़ों रुपए का भुगतान नहीं किया जा रहा है। बुधवार व गुरुवार को डीएमआरसी के कर्मचारी परिषद के साथ बैठक बेनतीजा रही तो भुगतान रुक ने से नाराज करीब ढाई दर्जन भर ठेकेदार मझोले कंपनियों ने गुरुवार से आंदोलन शुरू कर दिया है। मेट्रो के तीसरे चरण के निर्माण में लगी बड़ी कंपनी एफइएमसी प्रतिभा जेवी सीसी 18 और सीसी 23 के तहत काम कर रहे कर्मचारियों ने मालवीय नगर स्थित कैप आॅफिस पर धरना शुरू करने के साथ प्रदर्शन भी किया। मजदूरों व कर्मचारियों ने बताया कि पिछले नौ महीने से कंपनी की ओर से 25 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हुआ है जिससे निचले ठेकेदारों को पैसे नहीं मिल पाए हंै। काम के पैसे फंसे होने से मजदूरों के भुगतान भी नहीं हो रहे हैं। जबकि डीएमआरसी के मुख्य परियोजना प्रबंधक ने भरोसा दिया था कि अगर कंपनी ने निचले ठेकेदारों का भुगतान नहीं किया तो डीएमआरसी इन कंपनियों के सुरक्षा मद (बैंक गारंटी) में से जो करीब 200 करोड़ रुपए हैं व डीएमआरसी में जमा हैं, उससे निचले ठेकेदारोंं का भुगतान कर देगी। लेकिन अब डीएमआरसी उस वादे से मुकर रही है। आंदोलनकारी ठेकेदारों के अगुवा बबलू ने कहा है कि हमारे ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ गया है, मजदूरों को मकान मालिकों की ओर से मारपीट व जलालत झेलनी पड़ रही है। मेट्रो का काम लक्ष्य से कई महीने पीछे चल रहा है। हम कर्ज लेकर काम कराते रहे ताकि मेट्रो समय से तैयार हो। अभी भी 25 करोड़ का बकाया नहीं मिलने से बाजार से ब्याज पर उठाए पैसों की देनदारी बढ़ रही है। इस बीच दिल्ली मेट्रो प्रशासन ने ठेकेदारों की परेशानी समझने की बजाय इस कंपनी प्रतिभा मैसर्स से कुछ काम वापस लेकर सीधे नए ठेकेदारों को दे दिया। शुक्रवार को प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी गई।
अधिक किराया फिर भी देरी
दिल्ली मेट्रोरेल निगम (डीएमआरसी) कभी सुरक्षित तेज परिचालन व कम किराए का दम भरती थी लेकिन आज यह न तो समय से परियोजनाओं क ो पूरा कर पा रही है न ही यात्रियों को किफायती यात्रा सुलभ है। 15 रुपए के बस किराए की बजाय लोगों क ो 50 रुपए तक का किराया चुकाना पड़ रहा है। मोटा किराया जहां यात्रियों की जेबों पर भारी पड़ रहा है वही आए दिन की गड़बड़ी, मेटोÑ की लेटलतीफी, डिजिटल पैनल, एएफसी व स्केलेटर की खराबी के कारण यात्रा में समय की बर्बादी भी बढ़ रही है। जबकि डीएमआरसी अब आधे घंटे या इससे अधिक देर की गड़Þबड़ी को आम बात मानने लगी है। जब दो या चार घंटे का गतिरोध पैदा होता है तभी इसे खराबी माना जाता है।
विफलता का नमूना
विश्वस्तरीय दिल्ली मेट्रो बाधारहित परिचालन सुनिश्चित करने में इस कदर नाकाम है कि हाल ही में दो बार इसके ब्लू लाइन व यलो लाइन पर खराबी आने के कारण यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मेट्रो परिचालन में बाधा चिंताजनक रूप से सामने आ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जून के आखिरी 15 दिनों में ही मेट्रो सेवा चार बार बाधित हुई। 15 जून को ओवरहेड तार की खराबी के कारण पहिए थमे, तो 22 जून को तकनीकी खराबी के चलते सेवा ठप हुई। इसी तरह 30 जून को सिग्नल की खराबी से वायलेट लाइन पर जहां तहां ट्रेंने खड़ी हो गर्इं।

तो इसी दिन शाम को एक बार फि र ब्लू लाइन ने यात्रियों को गच्चा दिया। इसके पहले दो तीन घटनाएं कोच में स्पार्किंग व धुआं उठने की भी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जिसके चलते गाड़ी रोक कर यात्रियों को कोच से निकाला भी गया है। अब एक बार फिर यलो लाइन ने यात्रियों को हलकान किय।

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