ताज़ा खबर
 

हवा बताएगी कितना है दम

’सम-विषम योजना को लेकर उत्साहित हैं पर्यावरणविद, ’ठोस व स्थायी समाधान तलाशने की कर वकालत
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली की हवाओं में जहरीले तत्त्वों, भारी व सूक्ष्म धूल कणों को कम करने के मकसद से शुरू सम-विषम योजना को लेकर पर्यावरणविदों में उत्साह तो है। लेकिन वे इसका ठोस व स्थाई समाधान तलाशे जाने की वकालत कर रहे हैं। इस लिहाज से सबसे पहली व अनिवार्य शर्त सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को विकसित करने की दरकार बताई। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी व सर्दी के मौसम के प्रदूषण के स्तर में फर्क होता है। हालांकि उम्मीद तो है कि इस योजना से वाहनों की तादात में गिरावट आएगी। लेकिन असली स्थिति का पता सोमवार या उसके बाद लगेगा। इसके साथ तमाम संगठन हवा की गुणवत्ता मापने व उसका विश्लेषण करने में लग गए हैं। दिल्ली सरकार ने भी इसे मापने के लिए दिल्ली के 74 इलाकों में मापक लगाए हैं।

हालात को मानें आपातकाल
देश के तीन महानगरों के कुल चारपहिया वाहनों क ो मिलाकर भी अकेले दिल्ली के बराबर नहीं हैं। विज्ञान व पर्यावरण केंद्र(सीएसई)वायु गुणवत्ता अभियान की अगुआ अनुमिता राय चौधरी ने कहा कि वाहनों पर लगाम लगाना तो अनिवार्य है। यह आज की पहली जरूरत है। शहर में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बीमार पड़ रहे हैं। दमे के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इन तमाम दिक्कतों को देखते हुए अब हालात इतने खराब हैं कि इमरजेंसी जैसे कदम उठाने की दरकार है। कुछ त्वरित तो कुछ दूरगामी उपाय किए जाने चाहिए। दूरगामी उपायों में शहरी सार्वजानिक परिवहन प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में खास काम किया जाय। लोगों को विकल्प मिलेगा तो वे भी इस चिंता का सामधान करने की दिशा में कदम उठाएंगे। इतना ही नहीें सरकार की ओर से किए उपायों के साथ-साथ जन भागीदारी भी बढ़ानी होगी।

खराब सार्वजनिक परिवहन के रहमोकरम पर बड़ी आबादी
सीएसई का मानना है कि दिल्ली में फिर भी कारों के अनुकूल ही माहौल व सुविधाएं हैं। जहां दिल्ली में वाहनों की संख्या अधिक है वहीं यहां के कुल भूभाग का 21 फीसद से भी अधिक हिस्सा सड़कों को समर्पित है। सीएसई के जारी आंकडेÞ बताते हैं कि दिल्ली में 90 फीसद सड़कों को कारों व दुपहिया वाहनों ने कब्जा कर रखा है। जबकि महज 20 से 25 फीसद आबादी ही इन पर निर्भर है। बाकी लोगों क ो खराब सार्वजनिक परिवहन के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है। नतीजा जहरीली हवा व भारी मात्रा में धूल कणों के रूप में सामने है। साफ हवा व्यक्ति का अधिकार है, उसे उसका हक मिलना ही चाहिए। गौरतलब है कि शहरी नवीनीकरण मिशन ने शहरी परिवहन मजबूत करने के लिए घनी आबादी वाले शहरों के लिए खास बजट का प्रावधान किया था।

गर्मी कर सकती है प्रदूषण का स्तर कम
टेरी ने दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण नापने के मुख्य नौ केंद्रो में से पांच पर अपने उपक रण लगा कर हवा के नमूने परखने की तैयारी की है। जहां-जहां टेरी ने मापक लगाए हैं उनमें बहादुरगढ़, गाजियाबाद , गुड़गांव व नोएडा के इलाके हैं। टेरी के शोधकर्ता सुमित व शोध सहायक जै मलिक ने गुरुवार की हवा के नमूनों का विश्लेषण करके बताया है कि हवा के परतों में पीएम स्तर 10 माइक्रान व 2.5 माइक्रान दोनों का स्तर सुरक्षित मानक से ऊपर ही पाया गया, जो खतरनाक है। जिसमें छोटे धूल कण करीब ढाई गुणा अधिक हैं। ये प्रदूषक सांस की नली में दिक्कत व हार्टअटैक या दूसरी बीमारी बढ़ाने वाले हैं। नाइट्रोजनडाईआक्साइड का स्तर भी बढ़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि हालांकि मानना होगा कि पिछले बार बहुत अधिक पर्क नहीं पड़ा था। एक तो जगह -जगह जाम की वजह से भी प्रदूषण का स्तर बढ़ गया था, दूसरे लोगो ने कारों का विकल्प किराए की कार को बनाया था।

जिससे बाहनो की संख्या में बहुत अधिक कमी नहीं दिखाई दी थी। टेरी ने बताया कि पिछले हफ्ते हवा की रफ्तार अधिक होने से प्रदूषकों का स्तर कम देखा गया था। गर्मी बढ़ने से भी हवा कम दबाव का क्षेत्र बनाते हुए ऊपर उठती है। लेकिन फि र से प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। पर्यावरणविद मनोज मिश्र का कहना है कि कमी तो आएगी प्रदूषण में, लेकिन कितना यह अभी कहना जरा मुश्किल है। इनका यह भी मानना है कि इतना तो तय है कि पिछली बार की तुलना में इस बार के आंकड़े अलग होंगे। क्योंकि पिछली बार सर्दियों का मौसम था जिसमें हवा घनी व भारी होकर नीचे ही रुकी रहती है। उसका प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। जबकि इस बार गर्मी है। गर्मी में हवा के कण गरम होकर दूर-दूर फैलते हैं व हल्के होकर ऊपर उठते हैं, जिसमें सघनता उतनी अधिक नही होती। प्रदूषण का स्तर भी उस हिसाब से कम होगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.