ताज़ा खबर
 

सेहत के लिए खतरनाक है वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा है, जिसके कारण हर साल लगभग 12 लाख जानें चली जाती हैं। एक रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है।
Author नई दिल्ली | July 30, 2017 01:54 am

वायु प्रदूषण स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा है, जिसके कारण हर साल लगभग 12 लाख जानें चली जाती हैं। एक रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण के कारण हर साल लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। इसके अलावा,जिन 168 शहरों का आकलन किया गया, उनमें कोई भी विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से तय वायु गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) का कहना है कि वायु प्रदूषण अब चिंता का मामला है और न केवल हमारे नागरिकों के स्वास्थ्य पर, बल्कि इससे भारत में चिकित्सा पर्यटन भी प्रभावित हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए, आइएमए ने कुछ सवाल उठाए हैं और इस बाबत मुहिम शुरू की है। संगठन ‘कहीं आपके इलाके में प्रदूषण तो नहीं’ नामक एक अभियान शुरू कर रहा है।

इस अभियान के तहत, एसोसिएशन की सभी राज्य स्तरीय व स्थानीय शाखाओं और चिकित्सा पेशेवरों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे वायुमंडलीय प्रदूषण स्तर को माह में 80 मानक से कम रखने में योगदान करें,जबकि दिवाली जैसे त्योहारों के समय इसे 90 मानक स्तर तक रखने की कोशिश में सहयोग करें। आइएमए के अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल ने कहा है कि वायु प्रदूषण केवल पर्यावरणीय खतरा ही नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी यह एक बड़ा खतरा है। समय की मांग है कि परिवहन के खराब साधनों, घरेलू र्इंधन और अपशिष्ट जलाने, कोयला आधारित बिजली संयंत्रों और औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषण के खिलाफ कठोर दिशा निर्देश लागू कराए जाएं, क्योंकि ये सब वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं।

किसी भी समय पीएम 2.5 का स्तर 80 मानक से कम रहना चाहिए और शोर का स्तर 80 डेसिबल से कम होना चाहिए। आइएमए के मानद महासचिव डॉ. आर एन टंडन ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि सभी चिकित्सकीय पेशेवरों ने अपने रोगियों को वायु प्रदूषण के खतरों के बारे में शिक्षित किया है। नहीं किया है तो अपील है कि करें। बताएं कि व्यक्तिगत स्तर पर कुछ उपायों का पालन करने की भी आवश्यकता है, क्योंकि हर छोटा योगदान एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
साक्ष्यों से पता चलता है कि विकासशील देशों में घरेलू वायु प्रदूषण खतरे की स्थिति में बढ़ोतरी कर सकता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि देश को अभी भी साफ हवा में सांस लेने से पहले एक लंबा रास्ता तय करना है। वक्त की जरूरत है कि जनता को भी शामिल करके समर्पित तरीके से प्रयास किए जाएं। यहां कुछ तरीके पेश हैं जिनसे आप व्यक्तिगत स्तर पर वायु प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.