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महंगा होगा AIIMS में इलाज कराना, 20 साल बाद बढ़ सकता है शुल्क

एम्स में 1996 के बाद इलाज और जांच के शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वर्ष 2015 में एम्स में यूजर चार्ज में 20 से 30 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था।

आने वाले समय में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज का खर्च बढ़ सकता है। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने एम्स की फीस पर समीक्षा करने के लिए कहा था। जिसके बाद से एम्स ने वित्त मंत्रालय के आदेश पर रिव्यू करना शुरू कर दिया है। बता दें एम्स में 1996 के बाद इलाज और जांच के शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एम्स फिस बढ़ने की चर्चा पर एम्स के डेप्युटी डायरेक्टर वी. श्रीनिवास ने कहा है कि यूजर चार्जेज को लेकर वित्त मंत्रालय से लेटर आया है। जिसकी समीक्षा की जा रही है। हर डिपार्टमेंट का करने के बाद सभी पहलूओं का निष्कर्ष निकाला जाएगा। जिसके बाद फिस के बढ़ाने का फैसला लिया जाएगा। वी. श्रीनिवास ने कहा कि एम्स अपने मरीजों को कई तरह की छूट देता है, उस छूट और डिस्काउंट की भी समीक्षा होगी। बहुत सारे मरीज ऐसे भी होते हैं जो यूजर चार्ज नहीं देते हैं, ऐसे लोगों से कैसे यूजर चार्ज लिया जाए, इसका भी रिव्यू किया जाएगा।

एम्स की ओर से सरकार से 300 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन की मांग की गई थी। जिसके बाद वित्त मंत्रालय की ओर एम्स में पर्ची बनवाने से लेकर जांच के लिए तमाम तरह के यूजर चार्ज बढ़ाने की सलाह दी। यह कोई पहला मौका नहीं है जब एम्स में शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा हो। इससे पहले भी वर्ष 2005 और 2010 में आय को बढ़ाने के लिए अल्ट्रासाउंड , रेडियोग्राफी और खून जैसी जांच पर चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन राजनीतिक विरोध के बाद इस फैसले को वापस ले लिया गया। 2010 में एम्स ने यूजर चार्जेज बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन विरोध के बाद यह संभव नहीं हो पाया था। वर्ष 2015 में संस्थान की स्थायी वित्त समिति में यूजर चार्ज में 20 से 30 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया। लेकिन इसे भी खारिज कर दिया गया।

एम्स की फैकल्टी ने चार्ज बढ़ाने पर कहा है कि सरकार गरीबों को क्वॉलिटी हेल्थ सर्विसेज की बात करती है तो ये चार्ज क्यों बढ़ाया जा रहा है। इससे गरीबों की परेशानी बढ़ेगी। वित्त मंत्रालय ने शुल्क बढ़ाने के फैसले पर तर्क दिया है कि 20 सालों के दौरान लोगों की आमदनी में बढ़ोत्तरी हुई है, इसलिए शुल्क बढ़ाने से लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

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