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तमिलनाडु: बारिश के बाद कड्डलूर में खेती पर संकट

पिछले कुछ बरसों में तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में एक के बाद एक आई कई प्राकृतिक आपदाओं के कारण कृषि संकट की स्थिति पैदा हो गई है..
Author कड्डलूर | December 19, 2015 23:09 pm
चेन्नई में भारी बारिश के बाद सरकारी अस्पताल से बाहर निकलते कर्मचारी और आगंतुक। (पीटीआई फाइल फोटो)

पिछले कुछ बरसों में तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में एक के बाद एक आई कई प्राकृतिक आपदाओं के कारण कृषि संकट की स्थिति पैदा हो गई है। सुनामी, चक्रवातों और हाल की बारिश व बाढ़ के कारण फसलों, मवेशियों और बुनियादी ढांचे को लगातार नुकसान हुआ है। पूरे जिले में आपदा की सी स्थिति है। पूरे जिले में बाढ़ की स्थिति दोबारा पैदा न हो इसके लिए दीर्घकालिक उपायों के साथ एक मजबूत तंत्र बनाए जाने की जरूरत है। 2004 में इस जिले ने सुनामी की भीषण आपदा झेली जिसमें करीब 640 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद नीलम और थाने जैसे कई चक्रवातों के कारण जिले को नुकसान हुआ।

हाल की बारिश और बाढ़ ने लोगों और प्रशासन की परेशानी को और बढ़ा दिया। कई इलाकों में धान, गन्ना और टैपियोका की कृषि भूमि पर करीब पांच फुट तक बालू जम गई है। कुड्डालोर के दूरदराज के इलाकों विसूर और पेरियाकट्टूपलायम के किसानों सी बालू और जी गोविंद राजू ने कहा कि हम लोग नहीं जानते हैं कि पानी पूरी तरह से हट जाने के बावजूद हम किस तरह बालू को हटाएंगे। सुंदरावंडी के आर पद्मनाभन जैसे छोटे किसानों की स्थिति और भी विकट है क्योंकि ऐसे समय में जब आपकी आय कुछ भी नहीं हो और कृषि योग्य भूमि महज एक एकड़ हो तो कर्ज चुकाना बहुत मुश्किल भरा काम है।

मवेशियों को खो देने से भी किसानों का भार बढ़ गया है क्योंकि वे भी किसानों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हैं और आय के साधन भी हैं। कुड्डालोर जिला किसान क्लब महासंघ के अध्यक्ष पी रविंद्रन ने कहा कि धान, गन्ना या काजू उत्पादक बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं क्योंकि बाढ़ ने फसल पकने से पहले प्रभावित किया है। रविंद्रन के अनुसार किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित मुआवजा हानि के मुकाबले अपर्याप्त है। इस तरह के राहत कार्य से शायद सभी प्रभावित किसानों को लाभ न मिले।

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