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आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से कहा- हमारे पास वकील करने के लिए पैसे नहीं

आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के लाभ के पद से जुड़े मामले पर चुनाव आयोग ने शुक्रवार को तीन घंटे तक सुनवाई की।
Author नई दिल्ली | August 20, 2016 02:58 am
भारतीय चुनाव आयोग

आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के लाभ के पद से जुड़े मामले पर चुनाव आयोग ने शुक्रवार को तीन घंटे तक सुनवाई की। आयोग ने मामले की अगली तारीख 29 अगस्त तय कर दी है। साथ ही आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों से कह दिया है कि इस मामले में जिसे जो भी पक्ष रखना है, या तो वह लिखित रूप में या फिर अपने वकीलों के जरिए आयोग के समक्ष अपनी बात रख सकता है। आप के करीब पांच विधायक अपने साथ सुनवाई के लिए वकील नहीं लाए थे। कुछ विधायकों ने कहा कि उनके पास वकील के पैसे नहीं हैं। उसपर याचिकाकर्ता पटेल ने कहा कि सभी विधायकों को मासिक राशि मिलती है, ऐसे में वे सिर्फ मामले को आगे टालने के लिए बहाने कर रहे हैं। उसपर आयोग ने भी उनकी ये अपील मानने से इनकार कर दिया और कहा कि वे लिखित में अपना पक्ष रख सकते हैं।

याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल ने आयोग से कहा कि इस मामले को रोजाना सुनवाई करके निपटाया जाए। उधर, आप पार्टी के विधायकों ने आयोग के समक्ष दिल्ली विधानसभा के आगामी 22 अगस्त से शुरू होने वाले सत्र का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सभी विधायक विधानसभा के सत्र के कार्यों में व्यस्त रहेंगे। चुनाव आयोग में शुक्रवार को भी आप के तीन विधायकों के वकीलों ने लंबी जिरह करके कहा कि प्रशांत पटेल की 28 दिसंबर 2015 की दूसरी याचिका पर उन्हें समन किया गया जो वैध नहीं है, क्योंकि उसे राष्ट्रपति के पास नहीं भेजा गया। सीधे चुनाव आयोग के पास भेजा गया। इस मामले में प्रशांत पटेल ने कहा कि याचिका उन्होंने सिर्फ एक ही राष्ट्रपति के समक्ष दायर की थी।

आयोग ने उन्हें अपनी याचिका से संबधित कुछ अन्य दस्तावेज दाखिल करने के लिए कहा था, जो उन्होंने सिलसिलेवार आयोग के समक्ष दाखिल कर दिए थे। उन्होंने कहा कि आयोग के समक्ष कोई भी नई याचिका दाखिल नहीं की गई है। आयोग को पहले इस पर फैसला लेना है कि याचिकाकर्ता ने आयोग के समक्ष कोई नई याचिका दाखिल नहीं की है और उनकी याचिका वैध है।

इस मामले की पहले की सुनवाई में आयोग याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल के इस पक्ष को पहली नजर में स्वीकार कर चुका है कि पटेल ने आयोग के समक्ष कोई नई याचिका दायर नहीं की है। भारत का निर्वाचन आयोग संसदीय सचिव नियुक्त किए गए उन 21 विधायकों के पक्ष की सुनवाई कर रहा है कि उनका पद लाभ का पद कैसे नहीं है और उनकी विधानसभा की सदस्यता क्यों न रद्द की जाए। इस मामले में आप के विधायकों का कहना है कि उनका काम लाभ के दायरे में नहीं आता है। वहीं भाजपा ने कहा कि आप के विधायक मामला टालने के लिए लगातार कोई न कोई बहाना आयोग के समक्ष रख रहे हैं।

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