December 10, 2016

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विकास के दावे पर खरी नहीं उतरी आप सरकार

दिल्ली के विकास का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार सभी विभागों में भारी धन होने के बावजूद बीते छह महीने में विकास कार्यों पर सिर्फ 22 फीसद रकम ही खर्च कर पाई है।

Author नई दिल्ली | October 22, 2016 02:39 am

दिल्ली के विकास का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार सभी विभागों में भारी धन होने के बावजूद बीते छह महीने में विकास कार्यों पर सिर्फ 22 फीसद रकम ही खर्च कर पाई है। यह खुलासा विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने किया है, जिन्होंने विभागवार विकास कार्यों में सरकार की ओर खर्च की गई रकम का ब्योरा जारी किया है। गुप्ता का कहना है कि विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च करके आप सरकार सिर्फ दिल्ली की जनता को गुमराह कर रही है। आधा साल बीत जाने के बावजूद दिल्ली सरकार ने बिजली पर सिर्फ 12.86 करोड़ रुपए यानी 3.33 फीसद रकम खर्च की है जबकि बिजली विभाग के पास 386 करोड़ रुपए का भारी विकास मद है। जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग को 1976 करोड़ रुपए का बजट आबंटित किया गया था। इसमें से सिर्फ 17.24 फीसद धन ही खर्च हो पाया है। गुप्ता ने कहा कि सरकार ने गरीबों को सस्ते आवास देने का वादा किया था। बजट में आवास के लिए 300 करोड़ रुपए भी आबंटित किए गए थे, लेकिन सरकार इसमें से सिर्फ 14 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाई है।

इससे गरीबों को मकान देने का उसका दावा खोखला साबित हो गया है। वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 2725 करोड़ रुपए आबंटित किए गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री के बेहद करीबी स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन अभी तक सिर्फ 24 फीसद धन ही खर्च कर पाए हैं, जबकि दिल्ली के लाखों लोग बीते दिनों चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमरियों से ग्रस्त थे। शिक्षा विभाग के पास भी 4155 करोड़ रुपए का बजट था, लेकिन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में केजरीवाल सरकार सामान्य शिक्षा पर सिर्फ 1006 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाई है। उन्होंने कहा कि आप सरकार गरीबों और वंचित तबके के विकास का नारा देकर सत्ता में आई थी, लेकिन सरकारी स्कूलों में दाखिला न मिल पाने के कारण राजधानी के लगभग तीन लाख गरीब बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग विभाग के पास भी इन वर्गों के विकास के लिए 380 करोड़ रुपए का बजट था, लेकिन सरकार ने सिर्फ 5 फीसद धन ही खर्च किया।
गुप्ता ने बताया कि गरीब तबकों के पोषण के लिए 377 करोड़ रुपए आबंटित किए गए थे, लेकिन सरकार ने इसमें से सिर्फ 12 फीसद रकम ही खर्च की। सरकार दिल्ली के किसानों के हित में भी बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि सच यह है कि कृषि व कृषि संबंधी अन्य सेवाओं के लिए सिर्फ 69 लाख रुपए खर्च किए।

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First Published on October 22, 2016 2:38 am

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