December 11, 2016

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कातिल को माफिया ने 11 महीने में ही दिला दी थी रिहाई, 37 साल बाद फिर जाना पड़ा जेल

कोर्ट ने इस बात पर निराशा जताई कि जिनके कंधों पर कानून को बचाने की जिम्मेदारी थी उन्हीं लोगों ने कानून का तार-तार कर दिया।

चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतकिरण के लिए किया गया है।

हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा पाए जो शख्स मात्र 11 महीने की जेल काटकर बाहर निकल गया था वो अब 37 साल बाद फिर से सलाखों के पीछे जा पहुंचा है। यह वाकया है उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का जहां के कृष्ण देव तिवारी को 37 साल पहले जिला अदालत ने हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी लेकिन वो जुगाड़ से 11 महीने बाद ही जेल से निकलने में कामयाब रहा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी कि कैसे कोई आजीवन कारावास की सजा पाया हुआ व्यक्ति 11 महीने बाद ही जेल से बाहर आ गया।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच को पिछले हफ्ते बताया गया कि कृष्ण देव तिवारी और उनके दो भाइयों ने ट्रायल कोर्ट के सामने 9 सितंबर को सरेंडर कर दिया है। कोर्ट ने सीबीआई से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद तिवारी बंधुओं को निचली अदालत में सरेंडर करने को कहा था। सीबीआई ने इनलोगों की जेल से रिहाई को संदिग्ध बताया था।

तिवारी को अब आजीवन कारावास की बची हुई पूरी सजा काटनी होगी। उधर ट्रायल कोर्ट ने भी इस मामले पर जांच शुरु कर दिया है कि तिवारी के भाई ने अपमानित करने के आरोप में 6 महीने की सजा काटी है या नहीं। कृष्णदेव तिवारी अब बुजुर्ग हो चुके हैं। बस्ती जेल प्रशासन ने उन्हें 9 जनवरी 1979 को बिना अदालती आदेश के छोड़ दिया था। इस रहस्यमयी रिहाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2014 में सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे।

कोर्ट ने पाया था कि उत्तर प्रदेश में जेल माफिया ने कानून को दरकिनार करते हुए तिवारी की रिहाई कराई थी। कोर्ट ने इस बात पर निराशा जताई थी कि जिनके कंधों पर कानून को बचाने की जिम्मेदारी थी उन्हीं लोगों ने कानून का तार-तार कर दिया। हालांकि, कृष्णदेव तिवारी ने कोर्ट में दलील दी थी कि करीब 14 साल जेल में सजा काटने के बाद वो पैरोल पर बाहर आए थे लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील को खारिज करते हुए सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि उनकी रिहाई एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी। सीबीआई ने इसी साल जुलाई में कोर्ट में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कहा गया था कि तिवारी को फिर से जेल भेजा जाना चाहिए। इसके अलावा उसा लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने की भी अनुमति मांगी है ताकि इस साजिश का भंडाफोड़ किया जा सके।

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First Published on November 14, 2016 8:00 pm

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