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NGT: यमुना की बिगड़ती हालत पर तुरंत बैठक बुलाए दिल्ली सरकार:

राष्ट्रीय राजधानी में यमुना की हालत और खराब होने से रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह एक बैठक बुलाए...
Author नई दिल्ली | November 27, 2015 03:14 am

राष्ट्रीय राजधानी में यमुना की हालत और खराब होने से रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह एक बैठक बुलाए। अधिकरण ने बैठक में इस बात सरकार इन बातों का जायजा ले कि नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है। एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार के पीठ ने कहा- आप एक बैठक क्यों नहीं बुलाते और स्थिति रिपोर्ट क्यों नहीं दाखिल करते हैं। समूचे मुद्दे पर ठोस राय बनाएं। कोई भी चीज जो यमुना को प्रदूषित करती है, उसे रोका जाना चाहिए और उस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। नीतिगत फैसला करें और समूचे मुद्दे पर फैसला करें।

पीठ ने कहा कि दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया जाता है कि वे सभी नगर निगमों, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य संबद्ध अधिकारियों की बैठक बुलाएं और यमुना नदी के प्रदूषण के नियंत्रण के लिए उठाए जा सकने वाले जरूरी कदमों का जायजा लें। उन्हें सुनवाई की अगली तारीख से पहले अधिकरण के समक्ष रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। यह निर्देश धार्मिक समूह ओजस्वी पार्टी की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। उसने मवेशियों के वध के कारण यमुना नदी में प्रदूषण के खिलाफ हरित अधिकरण का दरवाजा खटखटाया था।

उधर, कानून के तहत ई-कचरा नियमों को लागू नहीं किए जाने से संबंधित याचिका पर गौर करते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया है कि ई-कचरा उत्पादन, पुनर्चक्रण और इसके निस्तारण पर पूरी सूचना मुहैया कराई जाए। न्यायमूर्ति यूएस साल्वी के अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) को ई-कचरा नियमों को लागू करना जरूरी है और यह आवेदक की शिकायत है कि पूरे देश में नियमों के मुताबिक ई-कचरा नियमों को लागू नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ई-कचरा, अधिकृत उठाव, केंद्र, उपभोक्ताओं की संख्या और उपभोग की मात्रा, अधिकृत निस्तारक, अधिकृत पुनर्चक्रण करने वाले और ई-कचरा के नियमों के बारे में लोगों को जागरूक करने के कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि एसपीसीबी सूचनाएं मुहैया कराएगा। हरित पैनल ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि हर राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र में कुल जिलों की संख्या के अलावा जिलावार जनसंख्या की पूरी सूचना मुहैया कराई जाए। मामले पर अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी।

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