ताज़ा खबर
 

एक अनुच्छेद तक नहीं पढ़ पाते छठी कक्षा के छात्र

दिल्ली सरकार एक ओर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी ये दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
Author नई दिल्ली | August 10, 2016 02:12 am
(File Pic)

दिल्ली सरकार एक ओर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी ये दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। सरकार की ‘चुनौती 2018’ की कार्ययोजना तैयार करने के लिए किए गए एक सर्वेक्षण से खुलासा हुआ है कि सरकारी स्कूलों के छठी कक्षा के 70 फीसद से अधिक विद्यार्थी पाठ्य-पुस्तक में एक पैराग्राफ तक नहीं पढ़ पाते, जबकि 67 फीसद बच्चे तीन अंक वाली संख्या में एक अंक वाली संख्या से भाग नहीं दे पाते।

‘चुनौती 2018’ को ध्यान में रखते हुए यह मूल्यांकन सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने किया। इसका उद्देश्य दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के अधीन के 1011 स्कूलों में पढ़ रहे छठी कक्षा के 2,01,997 विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का पता लगाना था। सर्वेक्षण के मुताबिक, 74 फीसद विद्यार्थी अपनी हिंदी पाठ्य-पुस्तक का एक पैराग्राफ भी नहीं पढ़ पाते, 46 फीसद बच्चे दूसरी कक्षा की सरल कहानी नहीं पढ़ सकते और आठ फीसद विद्यार्थी अक्षरों की पहचान नहीं कर पाते।

इसी तरह 67 फीसद बच्चे तीन अंक वाली संख्या में एक अंक वाली संख्या से भाग नहीं दे पाते, 44 फीसद बच्चे दो अंक वाली संख्याओं में घटाना नहीं कर पाते और पांच फीसद बच्चे एक अंक वाली संख्या पहचान नहीं पाते। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘छठी कक्षा के केवल 54 फीसद बच्चे ही कुछ पढ़ पाने में समर्थ हैं, उनमें महज 26 फीसद ऐसे हैं जो अपनी पाठ्य-पुस्तक पढ़ पाते है, बाकी 46 फीसद को कुछ पढ़ने और लिखने के लिए अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है।’

आप सरकार ने बच्चों के बीच में ही स्कूल छोड़ देने पर रोक लगाने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए नई शिक्षा सुधार योजना बनाई है। ‘चुनौती 2018’ नाम की इस योजना में कमजोर बच्चों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. i
    indian(ncr)
    Aug 10, 2016 at 5:22 am
    जब तक शिक्षा मैं आरक्षण रहेगा तबतक सरकारी स्कूल के बच्चे ऐसे ही अग्यानी ही रहेंगे आज सरकारी स्कूल के टीचरों को खुद कुछ नहीं आता है तो बच्चों को कया ख़ाक पढ़ाएंगे सबसे पहले तो सरकारी स्कूलों के टीचरों का ही प्राइमरी लेवल का एग्जाम लिया जय और देखा जाय कितने एग्जाम पास करते हैं सरकारी स्कूल के टीचरों को प्राइमरी क्लास तक की ठीक से जानकारी नहीं है उनको २० तक पहाड़े भी नहीं आते हैं फिर ऐसे टीचरों से आप कया उम्मीद करेंगे
    Reply
सबरंग