ताज़ा खबर
 

सतर्क राजपथ पर दिखा शक्तिपथ

आतंकवादी हमलों की धमकी के मद्देनजर अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजामों के बीच मंगलवार को देश ने 67वां गणतंत्र दिवस समारोह मनाया।
Author नई दिल्ली | January 27, 2016 02:06 am
गा हे तब जयगाथा : नई दिल्ली में मंगलवार को राजपथ पर 67वें गणतंत्र दिवस समारोह का नजारा।

आतंकवादी हमलों की धमकी के मद्देनजर अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजामों के बीच मंगलवार को देश ने 67वां गणतंत्र दिवस समारोह मनाया। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की मौजूदगी में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्र ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। दोनों देशों के बीच पुराने दोस्ताने के कारण यह पांचवीं बार था जब फ्रांस को इस समारोह का अतिथि देश बनाया गया। ओलांद के इस्लामिक आंतकवाद के निशाने पर होने के कारण उनकी मौजूदगी सुरक्षा एजंसियों के लिए कड़ी चुनौती थी। राजपथ पर देश के शौर्य, समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत का भरपूर प्रदर्शन किया गया। यह पहला मौका था जब किसी अतिथि देश की सैन्य टुकड़ी को भी राजपथ के ऐतिहासिक परेड में शरीक होने का गौरव दिया गया।

ठीक दस बजे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तिरंगा फहराया। राष्ट्रगान की धुन के बीच 21 तोपों की सलामी व हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा के बाद परेड शुरू हुई। परेड से पहले सलामी मंच पर विशेष सुरक्षा बल के जांबाज लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी को(मरणोपरांत) अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। यह शांति काल में दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। आंखों में गर्व मिश्रित नमी के साथ उनकी पत्नी भावना गोस्वामी ने सम्मान स्वीकार किया।

परेड की कमान संभाले जांबाजों व परमवीर चक्र व अशोक चक्र विजेताओं की अगुआई में परेड शुरू हुई। मार्चिंग दस्ते में सबसे पहला स्थान अतिथियों को दिया गया। भारत के निमंत्रण पर 136 फ्रांसीसी सैनिकों के दस्ते ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रीय पर्व का हिस्सा बन आन-बान-शान के प्रतीक राष्ट्रध्वज तिरंगे को सलामी दी। फ्रांसीसी सेना के म्यूजिक ऑफ इनफैंटरी की धुन से राजपथ गूंज उठा। दर्शक दीर्घा ने तालियों से उनका स्वागत किया।

61 कैविलरी दस्ते के पीछे भीमकाय टैंक टी90 को राजपथ से गुजरते देख दर्शक रोमांच से भर उठे। इसके पीछे आए बाल्वे मशीन पिकेट, ब्रह्मोस, आकाश, स्मर्च व मिसाइलों को देख कर देशवासियों को सैन्य क्षमता का परिचय मिला। एकीकृत संचार व युद्धक प्रणाली से लैस उन्नत हेलिकॉप्टरों ने राष्ट्राध्यक्ष व राष्ट्रध्वज को सलामी दी। इसके बाद आए भारतीय सेना की टुकड़ियों की व अर्द्धसैनिक बलों के मार्चिंग दस्ते के एक लय में चल रहे कदमताल देख सभी मंत्रमुग्ध हुए। इनमें गोरखा राइफल्स, गढ़वाल राइफल्स, सिख लाई रेजीमेंट, राजपूत दस्ता, असम दस्ता प्रमुख थे। खोजी स्वान के दस्ते भी आकर्षण का केंद्र रहे।

लड़ाई के मोर्चे पर महिलाओं की भूमिका पर चल रही बहस के बीच गणतंत्र दिवस परेड में महिला शक्ति की मजबूत मौजूदगी दिखी। सेना के तीनों टुकड़ियों और नेशनल कैटेड कोर (एनसीसी) के महिला दस्तों ने परेड में ओजपूर्ण सलामी देते हुए कंधे से से कंधा मिलाकर चलने की क्षमता का प्रदर्शन किया। सीमा सुरक्षा बल, रेलवे सुरक्षा बल , दिल्ली पुलिस केंद्रीय औद्योगिक पुलिस बल व स्कूली छात्रों के मार्चिंग दस्ते ने शौर्यपूर्ण धुनों से तमाम राजपथ को गुंजायमान कर दिया।

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके जैसलमेर में स्थित ‘गंगा रिसाला’ के नाम से पहचाना जाने वाला बीएसएफ का ऊंट दस्ता राजसी शान के साथ राजपथ से गुजरा। इसके साथ ही इन्हें इस बार परेड में शामिल न किए जाने की अटकलों की चर्चा भी हुई। लोग मायूस थे कि पता नहीं इस बार सजीले ऊंटो के कमदमताल देखने को मिलेंगे या नहीं। यह दस्ता बीकानेर रॉयल फोर्स की विरासत को संजोए हुए है।

वीरता पुरस्कार से नवाजे गए बहादुर बच्चों का कारवां राजपथ से गुजरा तो गर्व व तालियों की गड़गड़ाहट के साथ राजपथ के दोनों ओर से लोगों ने बच्चों को हाथ हिलाकर शाबासी दी। इसके बाद पेश हुई देश की समृद्धि व संस्कृति की झलक दिखाती 23 झांकियां।

इसमें सरकार की महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं को प्रमुखता से जगह दी गई थी। जिसमें स्वछता अभियान, नमामि गंगे योजना, गैरपारंपरिक ऊर्जा व संचार क्षेत्र में बढ़ते भारत के कदमों को दिखाया गया। मोटरसाकिल सवार जाबांजों ने खूब तालियां बटोरीं। हेलिकॉप्टर व यद्धक विमानों को गगनभेदी आवाजों व रफ्तार को भी खूब तालियां मिलीं। अंत में छोड़े गए तिरंगे गुब्बारों को बच्चे देर तक ललचाई निगाहों से देखते रहे।

इस बार परेड में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था थी। पार्किंग स्टीकर लगी गाड़ियों के भी एक-एक सवार को उतार कर गाड़ियों की कई स्तर पर गहन तलाशी ली जा रही थी। समारोह स्थल से कई किलोमीटर दूर पर ही बैरिकेट लगा कर गाड़ियों की आवाजाही को रोका जा रहा था। जमीन से लेकर आसमान तक चप्पे-चप्पे पर पैनी निगाह जमाए सुरक्षा कर्मियों के किसी अनहोनी की आंशका में पलक झपकते ही कार्रवाई का निर्देश था।

एक ओर जहां सुरक्षा कारणों से पानी, खाना, बैटरी, कैमरा, गाड़ियों की रिमोट वाली चाभी वगैरह नहीं लाने का निर्देश था वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग मोबाइल फोन लेकर 15, 16 ,17 व अन्य दर्शक दीर्घा में पहुंच गए थे। एक ओर जहां बड़ी संख्या में लोगों को फोन साथ न होने से अपने गंतव्य दीर्घा तक पहुंचने या साथियों को ढूढ़ने में बहुत मुश्किल हुई वहीं दूसरी ओर फोन लेकर पहुंचे लोगों ने परेड के दौरान सेल्फी लेने या वीडियो बनाने के चक्कर में पीछे बैठे हजारों दर्शकों को परेड की एक झलक पाने तक से महरूम कर दिया। स्कूल शिक्षक डोजी ने कहा कि वे तमाम इलाकों के बारें मे जानती नहीं थीं। काफी लंबा रास्ता पैदल चल कर आई थीं। उनके लिए यह समारोह देखना एक बड़े उपलब्धि के समान है। लेकिन सेल्फी के चक्कर में लोगों ने बुनियादी तमीज का भी ख्याल नहीं रखा। यह देख कर निराशा हुई। कई लोग कुर्सियों पर चढ़कर वीडियो बनाते रहे। तो पीछे बैठे परेड न देख पा रहे बच्चे उनसे क्या सीखेंगे?

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग