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हार्दिक पटेल ने बढ़ाई गुजरात HC के जज की मुश्किलें, राज्यसभा में हुई महाभियोग चलाने की मांग

राज्यसभा के 58 सदस्यों ने शुक्रवार को सभापति के समक्ष एक याचिका दायर कर मांग की कि हार्दिक पटेल मामले में आरक्षण के खिलाफ कथित असंवैधानिक टिप्पणियों के लिए गुजरात हाई कोर्ट के जज जेबी पारदीवाला के खिलाफ...
Author नई दिल्ली | December 19, 2015 01:13 am

राज्यसभा के 58 सदस्यों ने शुक्रवार को सभापति के समक्ष एक याचिका दायर कर मांग की कि हार्दिक पटेल मामले में आरक्षण के खिलाफ कथित असंवैधानिक टिप्पणियों के लिए गुजरात हाई कोर्ट के जज जेबी पारदीवाला के खिलाफ महाभियोग चलाया जाना चाहिए। सांसदों ने आरोप लगाया है कि हार्दिक पटेल के खिलाफ एक विशेष आपराधिक आवेदन पर फैसला देते हुए न्यायमूर्ति पारदीवाला ने व्यवस्था दी कि दो चीजों ने देश को बर्बाद कर दिया है या उसे सही दिशा में आगे नहीं बढ़ने दिया। पहला आरक्षण और दूसरा भ्रष्टाचार।’

याचिका में कहा गया है कि जज ने यह भी उल्लेख किया कि जब हमारा संविधान बनाया गया था तब समझा गया था कि आरक्षण 10 साल के लिए रहेगा। लेकिन दुर्भाग्य से यह स्वतंत्रता के 65 साल बाद भी जारी है। सांसदों ने कहा कि 10 वर्ष की समयसीमा राजनीतिक आरक्षण के लिए सुझाई गई थी जो केंद्रीय और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए प्रतिनिधित्व है, न कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में आरक्षण के संबंध में।

याचिका के मुताबिक यह तकलीफदेह है कि न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए नीति के संबंध में संवैधानिक प्रावधान से अनभिज्ञ हैं। सांसदों ने कहा- क्योंकि जज की टिप्पणियों को न्यायिक कार्यवाही में स्थान मिला है, ये चीजें असंवैधानिक स्वरूप की हैं और भारत के संविधान के प्रति कदाचार के बराबर हैं जो महाभियोग के लिए एक आधार तैयार करती हैं। सांसदों ने राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी से न्यायमूर्ति पारदीवाला के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की अपील की है और साथ में जरूरी दस्तावेज संलग्न किए हैं।

राज्यसभा के सभापति कार्यालय के सूत्रों ने याचिका मिलने की पुष्टि की और कहा कि यह विचाराधीन है। याचिका पर दस्तखत करने वाले सांसदों में आनंद शर्मा, दिग्विजय सिंह, अश्विनी कुमार, पीएल पुनिया, राजीव शुक्ला, आॅस्कर फर्नांडीस, अंबिका सोनी, बीके हरिप्रसाद (सभी कांग्रेस), डी राजा (भाकपा), केएन बालगोपाल (माकपा), शरद यादव-जद (एकी), एससी मिश्रा
और नरेंद्र कुमार कश्यप (बसपा), तिरूचि शिवा (द्रमुक) और डीपी त्रिपाठी (राकांपा) भी शामिल हैं।

इस तरह की याचिका लाने के लिए राज्यसभा में कम से कम 50 और लोकसभा में 100 सांसदों की आवश्यकता होती है। सांसदों ने अमदाबाद में 12 दिसंबर को सांसदों, विधायकों, गुजरात और केंद्र सरकार के पूर्व मंत्रियों व अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ा वर्ग के अग्रणी सदस्यों की हुई एक बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव की एक प्रति भी संलग्न की। इसमें आरक्षण के खिलाफ टिप्पणियों पर उक्त जज के खिलाफ महाभियोग सहित कार्रवाई की मांग की गई थी।

अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति मामलों की स्थायी संसदीय समिति के सदस्यों ने पार्टी लाइन से हटते हुए संसद भवन में एक बैठक में न्यायमूर्ति पारदीवाला की टिप्पणियों की निंदा की और 23 दिसंबर को भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष धरना देने का संकल्प किया। बैठक में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान और थावर चंद गहलोत भी शामिल हुए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) कानून को रद्द किए जाने के हफ्तों बाद भाजपा सदस्य उदित राज ने जज को लोकसभा में निशाना बनाया था। पारदीवाला ने एक दिसंबर को पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल पर लगे सरकार के विरुद्ध विद्रोह करने का आरोप हटाते हुए और देशद्रोह का आरोप बरकरार रखते हुए आरक्षण को लेकर टिप्पणियां की थीं।

 

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