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केरल: 6 महीनों में डिप्‍थीरिया के 23 मामले, स्‍वास्‍थ्‍य अफसर बोले- रू‍ढ़‍िवादी म‍ुस्लिमों ने डाली रुकावट

सरकार ने उन सभी बच्‍चों, जिन्‍होंने वैक्‍सीन नहीं ली है, को सुरक्षित करने के लिए दोबारा एक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है।
Author तिरुवनंतपुरम | July 7, 2016 20:54 pm
(Source: Express photo by Tashi Tobgyal)

केरल के मलाप्‍पुरम जिले में पिछले 6 महीनों में डिप्‍थीरिया के 23 मामलों की पुष्टि हुई है। इस जिले में चलाया गया विशेष टीकाकरण अभियान रूढ़‍िवादी मुस्लिमों के प्रतिरोध के चलते कमजोर पड़ गया था। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने स्थिति को गंभीर बताया है, क्‍योंकि जिले में 2008 से 2015 के बीच में डिप्‍थीरिया के सिर्फ 39 मामले सामने आए थे। मुस्लिम बहुल जिले ने स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति दर्ज कराई है, मगर समुदाय के कुछ लोग अभी भी टीकाकरण का विरोध कर रहे हैं। राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के के शैलजा के अनुसार, ”टीकाकरण के समर्थन में सभी धार्मिक नेता और पार्टियां खुलकर आगे आए थे। लेकिन जब हमारा स्‍टाफ टीकाकरण के लिए घरों में गए, तो वहां उन्‍हें विरोध झेलना पड़ा। हम टीकाकरण-विरोधी अभियान के लिए किसी एक संगठन या व्‍यक्ति को जिम्‍मेदार नहीं ठहरा सकते। टीकाकरण के खिलाफ अभियान गुप्‍त रूप से चलाया गया। सार्वजनिक तौर पर, कोई भी टीकाकरण के खिलाफ नहीं बोलता।”

मंत्री ने कहा कि सरकार ने उन सभी बच्‍चों, जिन्‍होंने वैक्‍सीन नहीं ली है, को सुरक्षित करने के लिए दोबारा एक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है। स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को सभी घरों में जाकर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सबका टीकाकरण हो। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के फील्‍ड स्‍टाफ के अनुसार पढ़े-लिखे और अमीर भी अपने बच्‍चों का टीकाकरण कराने में झिझकते हैं।

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एक स्‍वास्‍थ्‍य सुपरवाइजर ने पहचान गुप्‍त रखने की शर्त पर बताया, ”बहुत सारे मुस्लिम यह कहते हुए टीकाकरण से इनकार कर देते हैं कि जिंदगी और मौत खुदा तय करता है। वे उन बड़े परिवारों का उदाहरण देते हैं जिनका हर सदस्‍य टीकाकरण के बिना सुरक्षित है। वे कहते हैं कि जिनको टीका लगा, वे किसी और वजह से मर गए। वे इस बात से डरते हैं कि टीकाकरण के साइड इफेक्‍ट्स हो सकते हैं, कहते हैं कि कि उससे प्रजनन तंत्र को नुकसान होता है। टीकाकरण को मुस्लिमों की जनसंख्‍या कम करने के अमेरिकी एजेंडे के तौर पर देखा जाता है।”

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पिछले साल जब डिप्‍थीरिया के पांच मामलों की पुष्टि हुई थी, तब स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने सभी बच्‍चों को कवर करने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया था। हालांकि अभियान सफल साबित नहीं हुआ। जिला चिकित्‍सा अधिकारी डॉ. उमर फारूक के अनुसार, ”जिले में 7-15 आयु वर्ग के 1.72 लाख बच्‍चे हैं जिनका पूरी तरह टीकाकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा 7 साल की उम्र के 45,000 बच्‍चों को भी पूरी तरह टीका नहीं लगा है। इनमें से कई बच्‍चों को BCG की पहली खुराक भी नहीं मिल सकी है।”

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