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मालेगांव विस्फोट: 4 हिंदू आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज, 8 मुस्लिम आरोपियों को बरी करने के बाद दी थी याचिका

मालेगांव में आठ सितंबर 2006 में बड़ा कब्रिस्तान के समीप हमीदिया मस्जिद के निकट बम विस्फोट हुआ था जिसमें 37 लोग मारे गए थे।
Author मुम्बई | June 6, 2016 20:55 pm
2006 मालेगांव ब्‍लास्‍ट केस में मुंबई की एक अदालत ने आठ आरोपियों को बरी कर दिया था। (Express Archive)

विशेष एनआईए अदालत ने 2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में चार आरोपियों की जमानत अर्जी सोमवार (6 जून) को खारिज कर दी जिन्होंने इस मामले में आठ मुस्लिम आरोपियों को बरी किए किए जाने के बाद जमानत की मांग की थी। विशेष एनआईए न्यायाधीश वी वी पाटिल ने मनोर सिंह, राजेंद्र चौधरी, धन सिंह और लोकेश शर्मा की जमानत अर्जी खारिज कर दी। चारों ने अपनी अर्जी में कहा था कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और उनके विरुद्ध सबूत नहीं हैं।

बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि एनआईए ने इन आरोपियों से जिन चीजों के बरामद होने का दावा किया है वे बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। लेकिन अभियोजन पक्ष का तर्क था कि आरोपियों के खिलाफ प्रचुर सबूत हैं जो गंभीर प्रकृति के हैं। अतएव उन्हें जमानत नहीं दी जाए। अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा, ‘इस चरण में, मुझे ऐसा जान पड़ता है कि एनआईए द्वारा जुटाए गए सबूत प्रथम दृष्टया दर्शाते हैं कि आरोपियों ने फरार आरोपियों के साथ मिलकर बम तैयार किए और उन्हें लगाए तथा उनके फटने से 31 से अधिक लोगों की मौत हो गई जबकि 312 निर्दोष लोग घायल हो गए।’

विशेष न्यायाधीश ने कहा कि अपराध की प्रकृति और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए आरोपी जमानत के हकदार नहीं है। मालेगांव में आठ सितंबर 2006 में बड़ा कब्रिस्तान के समीप हमीदिया मस्जिद के निकट बम विस्फोट हुआ था जिसमें 37 लोग मारे गए थे। बम साइकिल पर रखे गए थे जो शब-ए-बारात के मौके पर मस्जिद में जुम्मे की नमाज के बाद फटे थे।

इस मामले की सबसे पहले जांच करने वाले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते ने नौ मुस्लिमों को प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के साथ कथित संबंध के आधार पर गिरफ्तार किया था। बाद में सीबीआई ने इस पर मुहर लगायी थी। उनमें एक की मौत मामला लंबित रहने के दौरान हो गई। एक पाकिस्तानी नागरिक समेत चार अन्य फरार चल रहे हैं।

लेकिन जब असीमानंद ने एक अन्य मामले में अपने इकबालिया बयान में मालेगांव विस्फोट मामले में हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों की संलिप्तता का खुलासा किया तब एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली। उसके बाद एनआईए ने अदालत में कहा कि इस मामले में इन नौ आरोपियों के विरुद्ध सबूत नहीं हैं। विशेष अदालत ने अप्रैल में इस मामले में आठ मुस्लिमों को उनके विरुद्ध सबूतों के अभाव में आरोपों से मुक्त कर दिया था।

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