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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की टिफन बैठक

मंत्रिमंडल ने तो फैसला कर दिया पर वित्त वर्ष एक जनवरी से 31 दिसंबर रखने का यह फैसला मध्य प्रदेश के अफसरों की नींद उड़ा चुका है।
Author May 8, 2017 06:48 am
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)

बेतुकी हड़बड़ी
मंत्रिमंडल ने तो फैसला कर दिया पर वित्त वर्ष एक जनवरी से 31 दिसंबर रखने का यह फैसला मध्य प्रदेश के अफसरों की नींद उड़ा चुका है। अभी एक अप्रैल से 31 मार्च होता है अपने देश में हर जगह वित्तीय वर्ष। पर कैलेंडर वर्ष को ही वित्तीय वर्ष बनाने का संकेत केंद्र की मोदी सरकार पहले ही दे चुकी है। यह बात अलग है कि उसने अभी इसे अमली जामा नहीं पहनाया है। इसी से डर बढ़ा है कि एक जनवरी 2018 को अगर केंद्र ने नहीं अपनाया नया वित्तीय वर्ष तो क्या होगा मध्यप्रदेश के फैसले का। वैसे भी सीएजी और केंद्र की मंजूरी के बिना कोई राज्य सरकार बदल ही नहीं सकती वित्तीय वर्ष। शिवराज चौहान सरकार के फैसले पर अब दोहरी कवायद में जुटे हैं उनके अफसर। एक तरफ विधि विभाग कानूनी अड़चनों की पड़ताल कर रहा है तो दूसरी तरफ वित्त विभाग वित्तीय प्रावधानों को परख रहा है। समझ नहीं आ रहा किसी को कि केंद्र से पहले खुद फैसला करने की शिवराज चौहान को जरूरत क्या थी? वैसे भी आम जनता को तो इससे कोई नफा नुकसान होने वाला है नहीं।
रीत नई
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री भी कुछ न कुछ नया करते ही रहते हैं। शिवराज चौहान ने कैबिनेट की बैठकों में मंत्रियों से टिफन के साथ आने की परंपरा शुरू करा दी। खुद वे भी लेकर आते हैं अपने घर से अपना टिफन। सब मिल बांट कर लेते हैं एक दूसरे के भोजन का स्वाद। यह बात अलग है कि इस चक्कर में खाना व्यर्थ जरूर जाता होगा। हर कोई अपनी निजी जरूरत से ज्यादा जो लेकर आता है। नहीं आएगा तो साथियों को क्या खिलाएगा। अब चौहान की महिला व बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने भी खुद को सादगी की मूर्ति साबित करने की ठानी है। समीक्षा बैठकों में काजू बादाम उन्हें अखरता है। तभी तो खरगोन में नाश्ते में गुड़ चना और मूंगफली की मांग कर अफसरों को सकते में डाल दिया। सस्ते और पौष्टिक आहार के नाते। वे तो आंगनवाड़ी के बच्चों को भी पोषक नाश्ता दिलाने पर अड़ी हैं। मैदा के आइटम उन्हें सेहत के लिए अनुकूल नहीं लग रहे। अगला एजंडा बकरी के दूध को बढ़ावा देने का। खासकर बच्चों के लिए। इस बहाने बकरी पालन को प्रोत्साहन तो मिलेगा ही।

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