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मंत्री-सांसद संवाद

हरियाणा भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं है। अभी क्या असंतोष तो सरकार गठन के बाद से ही रहा है।
Author June 26, 2017 03:38 am
मनोहर लाल खट्टर

हरियाणा भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं है। अभी क्या असंतोष तो सरकार गठन के बाद से ही रहा है। खुद से सियासत में खासे जूनियर मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया जाना अनिल विज को अखरा था। वे ठहरे चार बार के विधायक। फिर किसी वैश्य, ब्राह्मण या जाट को मुख्यमंत्री बनाते तो वे सब्र कर भी लेते। यहां तो पंजाबी खत्री को ही भाईलोगों ने बना दिया उनसे ज्यादा अहम। नाक-भौं सिकोड़ कर भी खट्टर का कुछ बिगाड़ नहीं पाए तो चुप्पी साधने में भलाई समझी। आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पसंदीदा माना जाता है खट्टर को। तभी तो रामविलास शर्मा ने भी चूं नहीं की।

बहरहाल विवादों में बने रहना जैसे विज की नियति हो गई है। अब अपने सांसद रतनलाल कटारिया के साथ उलझ गए। वैसे भी कटारिया ठहरे दलित। 1998 तक अंबाला में भाजपा के दलित चेहरे थे सूरजभान। वे यूपी के राज्यपाल बने तो फिर कटारिया की किस्मत चमकी। विज के साथ रिश्ते कभी मधुर नहीं रहे उनके। लेकिन इस बार छेड़छाड़ की शुरुआत विज खेमे की तरफ से हुई। मुख्यमंत्री की विंडो पर विज समर्थकों ने कटारिया के गुमशुदा हो जाने की बात दर्ज कर दी। इतना ही नहीं खुद विज ने भी आग में घी डालने का काम किया। मीडिया में बयान दे दिया कि रतन लाल कटारिया उनके विधानसभा क्षेत्र से गायब रहते हैं। कार्यकर्ताओं से मिलना पसंद नहीं करते। फिर तो कटारिया और तिलमिला गए।

अपने साथी विज पर अपनी उपेक्षा का आरोप जड़ दिया। ऊपर से यह और बता दिया कि कांग्रेसी ही नहीं मुस्लिम लीग तक के सांसद उनसे प्रेम से गले मिलते हैं। लेकिन विज उनके साथ तालिबानी सलूक करते हैं। इतनी नफरत भी ठीक नहीं। अगर किसी नेता को अपनी लोकप्रियता का गुमान हो तो वह आजमा ले। उनके साथ अंबाला के बाजार में घूमकर देख ले। पता चल जाएगा कि लोग किससे ज्यादा प्यार करते हैं। बेचारे कटारिया को एक मलाल और भी है। उनके खिलाफ प्रचार किया जा रहा है कि वे अंबाला कैंट क्षेत्र के विकास के लिए सांसद निधि से पैसा नहीं देते। इस आरोप को बेबुनियाद बता कटारिया ने विज को चुनौती दे दी कि वे चाहें तो उनसे सांसद निधि का पैसा लेकर खुद कर दें हर विधानसभा क्षेत्र में उसका बंटवारा।

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