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राजपाट- राजस्थान की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश का भी करेंगे अमित शाह दौरा

राजस्थान में वसुंधरा राजे को तीन दिन तक चैन नहीं मिला था। कुछ ऐसी ही बेचैनी 18 से 20 अगस्त तक शिवराज चौहान के चेहरे पर नजर आए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
Author August 7, 2017 06:13 am
भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह।

दौरे की दहशत

राजस्थान की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश का भी करेंगे अमित शाह दौरा। राजस्थान में वसुंधरा राजे को तीन दिन तक चैन नहीं मिला था। कुछ ऐसी ही बेचैनी 18 से 20 अगस्त तक शिवराज चौहान के चेहरे पर नजर आए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ही क्यों संगठन और पूरी सरकार के ही कान खड़े हो गए हैं। विभागीय अधिकारी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहे हैं। अब तक की उपलब्धियों के बखान के साथ-साथ अगले एक साल के दौरान संभावित कामकाज का रोडमैप भी बन रहा है। खुद मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद अनौपचारिक चर्चा में अपने मंत्रियों को आगाह किया कि चाकचौंबद रहें। अमित शाह ने होटल में ठहरने से इनकार दिया है। वे पार्टी के दफ्तर में ही डालेंगे डेरा। विशेष विमान से चलने का तो उनका स्वभाव है ही नहीं। नियमित फ्लाईट से ही करते हैं आमतौर पर सफर। जाहिर है कि परंपरा का निर्वाह मध्य प्रदेश में भी जरूर करेंगे। यानी एक वक्त का भोजन किसी दलित या आदिवासी के घर संभव है। मंत्रियों और सांसदों से आमने-सामने बात करेंगे। पर विषय को लेकर हर कोई अनिश्चित है।

एक तरह से राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन और सरकार दोनों का ही अपने मापदंड से इम्तिहान लेंगे। उनके दौरे की चर्चा से ही यह अटकल भी तेज है कि वे कांग्रेस के कुछ विधायकों से पार्टी छुड़वा कर उन्हें भगवा खेमे में भी लाना चाहेंगे। राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही खड़े हो गए थे कांग्रेस आलाकमान के कान। कई विधायकों ने क्रासवोटिंग जो की थी। एक बदलाव सरकार के कामकाज में भी दिखा है। आनन-फानन में सत्ता और संगठन में अपनों को रेवड़ियां तेजी से बांटी जा रही है। दीनदयाल अंत्योदय समिति के माध्यम से इसे अंजाम दिया जा रहा है। पांच साल के लिए हैं वैसे तो ये समितियां। लेकिन सरकार बदलती है तो अपने आप भंग हो जाती हैं। शाह के दौरे से पहले अरविंद मेनन सियासी हलचल की टोह लेंगे। आठ अगस्त को भोपाल पहुंच कर वे अमित शाह की यात्रा के बंदोबस्त की समीक्षा भी करेंगे। पार्टी आला कमान ने दिल्ली में बाकायदा मिशन मध्य प्रदेश बनाया है जिसका पटाक्षेप अमित शाह के दौरे के बाद ही हो पाएगा। हां, राजस्थान दौरे के बाद जिस तरह वसुंधरा राजे को जयपुर से केंद्र में लाने की चर्चाएं तेज हुई कुछ उसी तर्ज पर चौहान के भी दिल्ली जाने और उनकी जगह कैलाश विजयवर्गीय की ताजपोशी की चर्चा मध्य प्रदेश दौरे के बाद सुनाई पड़े तो अचरज नहीं होना चाहिए।

अनूठा फर्जीवाड़ा

सरकारी तंत्र को सुधारना हंसी खेल नहीं। मध्य प्रदेश के रसोइयों की गुमशुदगी इसका ताजा उदाहरण है। सूबे के एक लाख से ज्यादा स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने वाले रसोइयों में से तीस हजार का अता-पता नहीं। सरकार ने वेतन सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था लागू कर दी तब सामने आया गुलगपाड़ा। अब पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग घर-घर दस्तक देकर रसोइयों की वास्तविक संख्या का पता लगाने में जुट गया है। आशंका जताई जा रही है कि इन रसोइयों के नाम पर मानदेय हड़पने का फर्जीवाड़ा चल रहा होगा। एक रसोइए को महीने में बतौर मानदेय एक हजार रुपए मिलते हैं। शिकायतों पर यकीन करें तो एक रसोइया कई संस्थाओं का भोजन तैयार करता है।

वैसे नियम कहते हैं कि पच्चीस बच्चों पर एक रसोइया होना चाहिए। कुल स्कूल एक लाख से अधिक हैं और बच्चे साठ लाख से ऊपर। मानदेय दो लाख छत्तीस हजार का दिया जा रहा था लेकिन खातों के जरिए भुगतान शुरू हुआ तो तीस हजार रसोइए गायब हो गए। अब तो दूध के जले के छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीने वाली कहावत पर चलेगी सरकार। रसोइए की तैनाती कागजी आंकड़े के बजाए स्कूल में नियमित आने वाले बच्चों की उपस्थिति के हिसाब से होगी। हकीकत तो यह है कि औसतन उपस्थिति साठ से पैंसठ फीसद ही रहती है लेकिन मिड-डे-मील के लिए राशन सौ फीसद के हिसाब से खपता रहा। अपर मुख्य सचिव ने फरमाया है कि अब सब कुछ आॅनलाइन होने से मुमकिन नहीं रह पाएगा फर्जीवाड़ा।

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