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राजपाट- राजस्थान के कांग्रेसी तो अभी से करने लगे हैं उछल कूद

आरक्षित सीट पर किसका वर्चस्व रहे, इस फेर में नौबत दोनों के समर्थकों के बीच तो मारपीट तक जा पहुंची। वह भी पार्टी के सूबेदार सचिन पायलट की आंखों के सामने। इनमें से एक भंवरलाल मेघवाल पायलट की टीम में वरिष्ठ उपाध्यक्ष ठहरे।
Author August 7, 2017 06:05 am
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट

जूतों में दाल
चुनाव में डेढ़ बरस बाकी है तो क्या? राजस्थान के कांग्रेसी तो अभी से करने लगे हैं उछल कूद। टिकट के फेर में एक दूसरे की टोपी उछालने से भी नहीं चूक रहे। मान कर चल रहे हैं कि अगली बार जीत कांग्रेस की ही होगी। सूबे के दो पूर्व मंत्रियों की कलह तो अब सार्वजनिक हो चुकी है। जयपुर जिले की दूदू सीट के चक्कर में आपस में उलझे हैं ये दोनों महारथी। आरक्षित सीट पर किसका वर्चस्व रहे, इस फेर में नौबत दोनों के समर्थकों के बीच तो मारपीट तक जा पहुंची। वह भी पार्टी के सूबेदार सचिन पायलट की आंखों के सामने। इनमें से एक भंवरलाल मेघवाल पायलट की टीम में वरिष्ठ उपाध्यक्ष ठहरे। जयपुर जिले के प्रभारी अलग। दूदू सीट पर जनाब की बेटी बनारसी मेघवाल दावेदार हैं। इसी चक्कर में मेघवाल ने इस सीट की समिति के ज्यादातर पदाधिकारी अपने चहेते बना दिए। लेकिन पूर्व में इस सीट की नुमाइंदगी कर चुके दूसरे पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर को नागवार गुजरना ही था। मेघवाल ने नागर पर एक महिला के साथ दुष्कर्म करने का मामला दर्ज करा दिया था। इसी चक्कर में पहले तो नागर का मंत्री पद छिन गया था और फिर मामला सीबीआइ के सुपुर्द हो गया था जिसने नागर को जेल की हवा खिला दी थी। चार साल तक कारावास में ही रहे। तीन महीने पहले किस्मत पलटी तो अदालत ने बरी कर दिया।

जेल से बाहर आए तो अपनी सीट की फिक्र हुई। उनकी ब्लाक कांग्रेस कमेटी में उनके हितैषी बचे ही नहीं थे। सो, उन्होंने इलाके में कई बड़े आयोजन कर डाले। बनारसी मेघवाल की लाबिंग का ज्ञान हुआ तो समर्थकों का हुजूम सूबे के पार्टी दफ्तर पर चढ़ा दिया। उनके हुÞड़दंगी समर्थकों ने भंवर लाल मेघवाल को घेर कर उनके साथ हाथापाई कर दिखाई। बेचारे पूर्व मंत्री ने भाग कर बामुश्किल एक दुकानदार के पास शरण ली और अपनी जान बचाई। पुलिस के घेरे में ही पहुंच पाए पार्टी दफ्तर। तब से नागर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन पार्टी ने तो दुष्कर्म प्रकरण के बाद ही उन्हें बाहर कर दिया था। अब क्या कार्रवाई कर सकती है पार्टी उनके खिलाफ। हां, उनके भाई हजारी लाल नागर पार्टी में हैं सो उन्हें जरूर समझा सकती है। नागर भी उन्नीस नहीं हैं। वे पहले अशोक गहलोत के पिछलग्गू थे। अब सचिन पायलट को पटा रखा है। दूदू सीट पायलट के लोकसभा क्षेत्र अजमेर में ही शामिल है। चूंकि नागर का जनाधार अच्छा है सो पायलट भी चुप्पी साध गए हैं। उधर नागर अब सीना तान कर कह रहे हैं कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया था दुष्कर्म के मामले में। अदालत ने क्लीनचिट दे ही दी है तो फिर क्यों न करें अपने इलाके की राजनीति।

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