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ऊंट पहाड़ के नीचे

2008 के विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज का सहारा और सीमा से ज्यादा खर्च की उनके खिलाफ मिली शिकायत को आयोग ने अब नौ साल बाद जाकर पाया वाजिब।
Author June 26, 2017 04:50 am
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)

संकट में घिर गए हैं मंत्री जी। मंत्री जी यानी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के सबसे चहेते व भाजपाई सियासत के नजरिए से ताकतवर मंत्री नरोत्तम मिश्रा। चुनाव आयोग ने चाबुक चला दिया। 2008 के विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज का सहारा और सीमा से ज्यादा खर्च की उनके खिलाफ मिली शिकायत को आयोग ने अब नौ साल बाद जाकर पाया वाजिब। सो, उनके उस चुनाव को रद्द घोषित कर दिया। तीन साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ पाने की पाबंदी अलग लगा दी। मिश्रा अब आयोग पर खुल कर न सही पर करीबियों के बीच तो भड़ास निकाल ही रहे हैं।

2008 के चुनाव का तो 2013 मेें ही खत्म हो गया था समय। फिर अब दंड देने का क्या औचित्य है? मिश्रा के पास कई अहम विभाग ठहरे। ऊपर से सरकार के प्रवक्ता अलग हैं। मानसून सत्र के ठीक पहले आया है यह संकट। असर तो शिवराज सरकार पर भी पड़ेगा ही। संसदीय कार्यमंत्री के नाते सदन में संकट मोचक की भूमिका अदा करते रहे हैं मिश्रा। उन पर चले चाबुक से सूबे का सियासी माहौल भी गरमा गया है। जो हाशिए पर हैं, उनके चेहरे खिल गए हैं। मसलन, पूर्व मंत्री सरताज सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर ने बेलाग कहा कि आयोग का फैसला तो मानना ही होगा। विरोधियों से पहले अपने ही मांग रहे हैं मिश्रा का इस्तीफा। सरताज ने आयोग पर उंगली उठाने को गलत बता दिया। लेकिन भाजपा के सूबेदार नंदकुमार सिंह चौहान के मुताबिक मिश्रा कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं। लेकिन हंगामा तो भाजपा के ही सांसद प्रह्लाद पटेल के ट्वीट ने मचा दिया है। केंद्र में मंत्री रह चुके पटेल ने लिख मारा- फैसले का स्वागत और सम्मान।

निर्वाचन से जुड़े फैसले तय समयसीमा में हों ताकि साधनों का दुरुपयोग न हो सके। फैसले को दलगत चश्मे से नहीं देखना चाहिए। जहां तक मिश्रा का सवाल है, वे हाईकोर्ट में अपील जरूर करेंगे। आयोग के फैसले पर रोक की फरियाद भी करेंगे ही। उनकी पीड़ा यह है कि उनके खिलाफ शिकायत करने वाले ने सबूत तो एक भी नहीं दिया। यह शिकायतकर्ता हैं पूर्व विधायक राजेंद्र भारती। जिनकी खुशी का ठिकाना नहीं। प्रतिक्रिया में आयोग के फैसले को सत्य की जीत और भ्रष्ट नेताओं के लिए सबक बता दिया। कांग्रेस के सूबेदार अरुण यादव को अब मिश्रा का मंत्री पद पर बने रहना अखर रहा है। आम आदमी पार्टी ने तो भोपाल में प्रदर्शन कर मिश्रा का पुतला भी फूंक दिया। कानूनविद् आयोग के आदेश की अपने-अपने नजरिए से कर रहे हैं व्याख्या। सुभाष कश्यप के हिसाब से तो मिश्रा अब न मंत्री रह सकते हैं और न विधायक। लेकिन वकील एमपीएस रघुवंशी महाराष्ट्र के अशोक चव्हाण मामले की नजीर पेश कर रहे हैं जिसके हिसाब से वे अगला चुनाव भले न लड़ पाएं पर 2013 का चुनाव अवैध नहीं हो सकता, जिसके कारण वे विधायक हैं।

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