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राजपाट- रंग-ढंग नया, झटका लालू को

इस बार एकदम नए रंग ढंग में दिख रहे हैं कैप्टन। पंजाब के नए मुख्यमंत्री के बदले तेवर का संकेत कैबिनेट की पहली ही बैठक के फैसलों से सामने आ गया।
Author March 20, 2017 04:43 am
पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)

रंग-ढंग नया

इस बार एकदम नए रंग ढंग में दिख रहे हैं कैप्टन। पंजाब के नए मुख्यमंत्री के बदले तेवर का संकेत कैबिनेट की पहली ही बैठक के फैसलों से सामने आ गया। लाल बत्ती संस्कृति खत्म की है। आतंकवाद कब का खत्म हो गया, पर उसके नाम पर लंबा-चौड़ा सुरक्षा तामझाम नेता लगातार भोग रहे हैं। अब ऐसा नहीं होगा। एक ही फैसले ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की छवि लोगों की नजर में उजली बना दी है। जिन सुरक्षाकर्मियों को लोगों की हिफाजत करनी चाहिए, वे वीआइपी ड्यूटी में थे। इसी वजह से नशे का कारोबार और अपराध बढ़े। सुरक्षाकर्मी अपनी सामान्य ड्यूटी करेंगे तो अपराधों पर अंकुश लगेगा ही। पंजाब में नेताओं ही नहीं बड़े अफसरों के लिए भी सुरक्षा अमला लेकर चलना शान-बान का प्रतीक बन गया था। शराब के पांच सौ ठेके भी एक झटके में बंद कर देना मामूली बात नहीं है। नशाबंदी की दिशा में इसका कारगर असर पड़ेगा। मादक पदार्थों के कारोबार पर कड़ाई के लिए कैप्टन टास्कफोर्स अलग बना दी है। सूबे के आला पुलिस अधिकारी हरप्रीत सिंह सिद्धू को छत्तीसगढ़ से वापस बुलाया है। वे दूसरे सूबे में डेपुटेशन पर तैनात थे। सिद्धू ने ही पंजाब पुलिस के जवानों को तहजीब सिखाई थी। तभी से टेलीफोन पर बातचीत में श्रीमानजी से संबोधित करने लगे पुलिस वाले। अपने पिछले कार्यकाल में अमरिंदर किसानों के हमदर्द मुख्यमंत्री के नाते शोहरत पा गए थे। इस बार भी सत्ता संभालते ही सूबे के किसानों की कर्ज माफी की पड़ताल के लिए समिति बना दी है। भ्रष्टाचार पर लगाम के लिए डीटीओ के पद ही खत्म कर दिए। अब यह जिम्मा एसडीएम संभालेंगे। महिलाओं को नौकरियों में एक तिहाई आरक्षण का फैसला भी कर दिया। लगता है कि नजर 2019 के लोकसभा चुनाव पर टिकी है उनकी।

झटका लालू को

यूपी में भाजपा का बंपर बहुमत से सत्ता में आना लालू को क्यों न अखरे। यादव राज में सेंध जो लग गई। ऊपर से मुलायम सिंह यादव से अब रिश्तेदारी भी तो है। अफसोस कर रहे होंगे कि विधानसभा चुनाव में खास प्रचार नहीं कर पाए। मुलायम और अखिलेश में जब तनातनी हुई थी तभी भांप गए थे कि इसका फायदा भाजपा उठा लेगी। पिता-पुत्र को समझाने की खूब कोशिश की। चाहते थे कि दोनों में मेल हो जाए और वे एक साथ ही रहें। लेकिन सारी मशक्कत बेकार गई। जिसका डर था वही हुआ। लालू ने बिहार में जिस भाजपा को अपनी रणनीति से पायदान पर धकेला था वही यूपी में अच्छे दिन पा गई। उत्साह के चलते अब बिहार की तरफ भी रुख करेंगे ही मोदी। यूपी का सबसे नजदीकी पड़ोसी है बिहार। लालू तो वैसे भी मोदी और भाजपा के शुरू से घोर विरोधी रहे हैं। नीतीश के साथ गठबंधन को बचाना भी है और बिहार में भाजपा को रोकने के लिए कुछ करते रहना भी जरूरी है। भाईलोगों ने तो अभी से अटकलबाजी तेज कर दी है कि नीतीश को महागठबंधन से निकालेंगे और खुद समर्थन देकर चलवाएंगे उनकी सरकार। हालांकि लालू ऐसी चर्चाओं से चौकन्ने तो जरूर हैं पर उसे गंभीरता से नहीं ले रहे।

 

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