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बिहार के पियक्कड़ मूषक

बिहार में आदमी तो क्या अब चूहे भी करने लगे हैं मद्यपान। जबकि बिहार के मुख्यमंत्री का तो मिशन है शराबबंदी।
Author May 8, 2017 06:50 am
बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी है। (फाइल फोटो)

पियक्कड़ मूषक

कमाल हो गया। नीतीश भी बेबस हो गए हैं। बिहार में आदमी तो क्या अब चूहे भी करने लगे हैं मद्यपान। जबकि बिहार के मुख्यमंत्री का तो मिशन है शराबबंदी। सिर्फ बिहार में ही नहीं, उनका वश चले तो सारे देश में करा दें वे नशाबंदी। अपने सूबे के लोगों के लिए तो कड़ा कानून बना दिया। सरकारी अमले की मार्फत उसका कड़ाई से पालन भी करा ही रहे हैं। बीच में पुलिस की हौसला अफजाई भी करते हैं। लेकिन चूहों का क्या करें? उन पर मद्यपान का आरोप पहली बार लगा है। दरअसल सूबे के आदिवासी अपने लिए एक पेय बनाते हैं- माड़ी। उसके सेवन से भी नशा होता है। आदिवासियों की शिकायत है कि उनके इलाकों में हाथी इस पेय की चोरी कर उसे पी जाते हैं। दरअसल सबसे विशाल जानवर जब आदिवासी बस्तियों पर हमला करते थे तभी उन्हें माड़ी का चस्का लग गया। अब वे रात में चुपके से बस्तियों में घुसते हैं और माड़ी पीकर लौट जाते हैं। इस चक्कर में बस्तियों पर हमला भी नहीं करते। हाथी तो केवल जंगल में ही रहते हैं पर चूहे तो हर उस जगह पाए जाते हैं जहां इंसान रहते हैं। घर हो या दुकान। अनाज का गोदाम हो या पुलिस का थाना। खेत हो या खलिहान, चूहा जरूर मिल जाएगा। पार्कों में भी पाए जाते हैं। नुकसान बेहद करते हैं। लेकिन वे मद्यपान करने लगेंगे, यह किसी ने नहीं सोचा था। पटना के एक आला पुलिस अफसर बैठक कर रहे थे। तभी उन्होंने मातहतों से जब्त की गई शराब के बारे में पड़ताल की। जवाब सुनकर वे हैरान रह गए। पता चला कि थानों में रखी गई शराब की बोतलों के ढक्कन कुतर कर शराब चूहे पी गए। अब कौन तय करे कि हाथियों की तरह चूहों को भी वाकई मदिरापान भा गया है या फिर उनकी आड़ में पुलिस वाले खुद यह शौक फरमा रहे हैं। घटना का खुलासा हुआ तो हर आदमी मजे लेने लगा। लोग कह रहे हैं- कइसन चूहा हव, दारू पीवत हव। उकरा गिरफतार के करतव। हमनी सब के दारू छूट गलव। नीतीश बाबू के पहरदार क ध्यान चूहवा पर न गलव। विरोधी पार्टियों के नेताओं का भी हंसी से हाल बेहाल है। वे कटाक्ष कर रहे हैं- सूबा कहां हुआ शराब मुक्त। अब तो शराब का बाजार और गरमा गया है।

मारेंगे धोबीपाट
लालू का जवाब नहीं। राजद सुप्रीमो आम बोलचाल की भाषा में ऐसी बात कर जाते हैं कि विरोधी को जवाब नहीं सूझता। भाजपा को आड़े हाथ लेने का तो लालू कोई मौका नहीं चूकते। भले मौका हो या न हो। जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब से भाजपा विरोध का उनका तेवर ज्यादा तीखा हुआ है। अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को नया काम सौंपा है। उनसे कहा है कि शहर में जितनी भी बूढ़ी गाय हैं और जो भी गाय दूध नहीं दे रही, उन्हें इकट्ठा कर भाजपा के नेताओं के घरों पर बांध दो। भाजपा गौरक्षा का नारा लगाती है तो करे ऐसी सभी गायों की रक्षा। लालू के इस मिशन ने भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। वे जानते हैं कि लालू ठहरे जिद्दी। जो ठान लेंगे, करके रहेंगे। लालू की भी मजबूरी है। भाजपा वाले उन्हें चैन से बैठने ही नहीं दे रहे। उनके बेटों पर प्रहार कर रहे हैं। ऐसे हमलावर नेताओं का जवाब देने के बजाए आहत पिता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निकाल रहे हैं अपनी भड़ास। भाजपा को ताकत दिखाने की रणनीति तो खैर बना ही रहे हैं। उसी के तहत अगस्त में पटना में भाजपा हटाओ, देश बचाओ रैली करेंगे। तैयारी अभी से चालू कर दी है। यों कोशिश तो भाजपा विरोधी सभी पार्टियों को एकजुट करने की है लालू की।

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