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राजपाट: मौके से फायदा, सियासी उपक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का व्यक्तित्व चमका दिया है।
Author December 26, 2016 04:29 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI Photo by Manvender Vashist/5 Dec, 2015)

मौके से फायदा
लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का व्यक्तित्व चमका दिया है। सभाओं में अपनी शैली भी बदल रहे हैं राहुल। थोड़ा बहुत मोदी स्टाइल इस्तेमाल करते हैं मोदी को घेरने के लिए। हिमाचल के धर्मशाला में भी यह पहलू साफ दिखा। भाषण के दौरान रुक कर लोगों से सवाल पूछा। भाषा में आक्रामकता आई है। यह संदेश देने में सफल होते दिख रहे हैं कि मोदी के बाद वे ही देश के दूसरे बड़े नेता हैं। मोदी के विकल्प के तौर पर खुद को पेश करना चाहेंगे ही। प्रधानमंत्री ने भी खुद पर लगे आरोपों के जवाब में राहुल गांधी को ही निशाना बनाया था। यानी प्रधानमंत्री खुद गंभीरता से ले रहे हैं अब राहुल को। इससे उनकी स्वीकार्यता बढ़ने का संकेत भी मिलता है। धर्मशाला में जिस अंदाज में उन्होंने मोदी को घेरा उससे मौजूद भीड़ प्रभावित भी नजर आई। तभी तो चेहरे पर आत्मविश्वास बढ़ा और जुमलों का भी ज्यादा इस्तेमाल कर पाए। नोटबंदी के फैसले पर एचएटी यानी हैट जुमला सुनाया। हिमाचल के लोगों को नोटबंदी से ज्यादा नुकसान होने की दुहाई दी। हैट की व्याख्या करते हुए हार्टिकल्चर, एग्रीकल्चर और टूरिज्म तक जा पहुंचे। तालियां खूब बटोरी। ऊपर से स्थानीय मुद्दों को भी चतुराई के साथ मोदी की तर्ज पर ही भाषण में जोड़ दिया। उधर, राहुल गांधी की रैली की सफलता से सूबे के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह गदगद हैं। उन्हीं के बुलावे पर तो आए थे राहुल। वीरभद्र की सरकार के चार साल पूरे होने के जश्न के बहाने।

सियासी उपक्रम
अजीब संयोग था। 24 दिसंबर को एक तरफ धर्मशाला में वीरभद्र सरकार के चार साल पूरे होने का कांग्रेसी राहुल गांधी की मौजूदगी में जश्न मना रहे थे तो दूसरी तरफ उसी वक्त भाजपाई शिमला में राज्यपाल देवव्रत आचार्य को वीरभद्र सरकार के खिलाफ अपनी चार्जशीट थमा रहे थे। प्रेम कुमार धूमल का साथ देने दिल्ली से स्वास्थ्य जेपी नड्डा भी पहुंचे थे। जाहिर है कि कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को लपेटा है विरोधी दल ने अपनी चार्जशीट में। आरोप ज्यादातर पुराने ठहरे। पर जिज्ञासा तो कांग्रेसियों की थी ही। सो कई नेता तो अपने पत्रकार मित्रों से आरोप पत्र के अहम हिस्सों को वाट्सऐप से भेजने की गुहार लगाते दिखे। चार्जशीट के जरिए वीरभद्र सरकार की तुलना अली बाबा और चालीस चोर से की है भाजपा ने।

अपनी धुन अपना राग
अजीब विरोधाभास है। सारा देश नोटबंदी के संकट से जूझ रहा है तो मध्यप्रदेश में भाजपा शिवराज चौहान के बतौर मुख्यमंत्री ग्यारह साल पूरे होने का जश्न मना रही है। सूबे की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस आरएसएस के एजंडे में मस्त हैं। इससे पहले कथारूप में दीनदयाल कार्यक्रम के जरिए पार्टी के चिंतन और मूल विचार तत्व को तीन दिन तक प्रचारित प्रसारित करती रहीं वे। दीन दयाल उपाध्याय संघ परिवार के चिंतक माने जाते हैं। उनकी जन्म शताब्दी का मौका देख भाजपा भोपाल, मुंबई, चेन्नई और रायपुर में कथा रूप में दीन दयाल शृंखला आयोजित कर रही है। भोपाल से शुरुआत हुई तो कार्यक्रमों की तीन दिन झड़ी लगी रही। कथा वाचन किया संघी आलोक कुमार ने। अर्चना चिटनीस यह कहते अघा नहीं रहीं कि इस आयोजन से पार्टी कार्यकर्ताओं में विचारधारा का तत्व निश्चित रूप से पुख्ता होगा।

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