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समरथ को नहि दोष

कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन और बाला घाट के सांसद बोध सिंह भगत पिछले दिनों मलाज खंड के मोदी फेस्ट में एक दूसरे से फिर भिड़ गए।
Author June 19, 2017 07:18 am
मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान

समरथ को नहि दोष
राजस्थान में भाजपा के विधायकों की छटपटाहट अब खुल कर सामने आ रही है। दो सौ में से 160 विधायक हैं सूबे में इस समय भाजपा के। एक तो अपनी सरकार रहते मलाई नहीं मार पाए। मंत्री पदों की संख्या निश्चित जो कर रखी है संविधान ने। ऊपर से आधों को अब टिकट कटने का खतरा सता रहा है। पार्टी की बैठकों में अगले साल होने वाले चुनाव को जीतने की रणनीति पर मंथन शुरू हो गया है। नेतृत्व को भनक है कि जनता के बीच सरकार की छवि लोकप्रियता की नहीं है। फिर भी बैठकों में सत्ता और संगठन के खिलाफ बोलने की किसी की हिम्मत नहीं। छवि बिगड़ने का ठीकरा विधायकों के सिर फोड़ कर चुनाव की वैतरणी पार करने की योजना बना रहा है पार्टी का नेतृत्व। अगले महीने अमित शाह करेंगे सूबे का दौरा। लगातार तीन दिन तक प्रवास कर वे जमीनी हकीकत को आंकने की कोशिश करेंगे।

हालांकि करीबी सांसदों के जरिए फीडबैक पहले से मिल रहा है उन्हें। अब आरएसएस के पदाधिकारियों से भी करेंगे परामर्श। इसी से नेतृत्व में बेचैनी है। मोदी सरकार के तीन साल के जश्न के मौके पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह आए थे जयपुर। संघ के दफ्तर पहुंच कर प्रचारकों से भी की थी उन्होंने सरकार और पार्टी की बाबत मंत्रणा। विधायक मंत्रियों के सिर पर तोहमत लगा रहे हैं। उनकी पीड़ा यही है कि नौकरशाही मंत्रियों की सुनती है, उन्हें तवज्जो नहीं देती। तभी तो कार्यकर्ताओं के सही काम भी वे नहीं करा पाते।

 

रोज की चिखचिख

मध्य प्रदेश भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं है। आखिर चौदह साल से लगातार सूबे की सत्ता पर काबिज किसी पार्टी में अंदरूनी मतभेद न हों, यह कैसे मुमकिन है। नेताओं के अंदरूनी झगड़े अब दबे-ढके नहीं। कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन और बाला घाट के सांसद बोध सिंह भगत पिछले दिनों मलाज खंड के मोदी फेस्ट में एक दूसरे से फिर भिड़ गए। कार्यक्रम था सबका साथ-सबका विकास। पर दो नेता भी साथ न दिख पाए। मंच पर ही हो गई दोनों में जमकर तू-तू मैं-मैं। सांसद ने एक बीज कंपनी पर पाबंदी के बावजूद बाजार में उसके बीज उपलब्ध होने का जिक्र किया तो वहां मौजूद जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजकुमार रायजादा ने इसका खंडन कर दिया। चूंकि शिकायत बिसेन के विभाग की थी सो वे भी चुप नहीं रहे। सांसद को गलत बात नहीं बोलने की नसीहत दे डाली। फिर तो दोनों में तीखी नोक-झोंक चालू हो गई। बिसेन ने सांसद को कम अकड़ने की सलाह दी तो वे आग बबूला हो गए। मंत्री से कहा- भाग। मंत्री ने भी कसर नहीं छोड़ी।

फौरन पलटवार कर दिया कि बहुत देखें हैं ऐसे सांसद। सांसद ने तैश में मंत्री को चोर मंत्री बोल दिया। बीच-बचाव पार्टी के जिला अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों को करना पड़ा। नाराजगी में मंत्री जी कार्यक्रम छोड़ कर चले गए। उन्होंने अपने सांसद के व्यवहार को अमर्यादित और स्वार्थपरक कहा। दोनों में खटपट पिछले दिनों दिव्यांग सामूहिक विवाह के समारोह में भी सामने आई थी। अपना सम्मान नहीं होने पर नाराज सांसद ने टिप्पणी की थी कि यहां बिसेन के परिवार का राज नहीं है। बहरहाल, खबरें अखबारों में छपीतो भोपाल के भाजपा दफ्तर में दोनों की शुक्रवार को पेशी हुई। संगठन ने सांसद को ठहराया दोषी। फिर तो बेचारे सांसद को लिखित में खेद जता कर छुड़ाना पड़ा अपना पीछा।

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