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राजपाट- दीदी का दांव

पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों को ही कोलकाता में होने वाले कार्यक्रमों की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।
Author September 11, 2017 05:32 am
पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी। (File Photo)

दीदी का दांव

फिर ठन गई है ममता की भाजपा से। पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दोनों को ही कोलकाता में होने वाले कार्यक्रमों की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। भागवत को तो खैर तीन अक्तूबर को पहुंचना था कोलकाता। लेकिन अमित शाह की योजना 11 सितंबर को पहुंचने की थी। उनके लिए नेताजी इंडोर स्टेडियम की बुकिंग भी करा दी गई थी, उनकी पार्टी के लोगों ने। लेकिन बाद में मरम्मत के काम के बहाने यह बुकिंग रद्द कर दी गई। इससे पहले पुलिस ने दोनों की रैलियों को अनुमति देने से तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के बहाने इनकार कर भी दिया था। यह तो कोलकाता हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के चलते संभव हो पाया था कि बाद में इजाजत मिल गई। आरएसएस ने फिर अदालत में जाने की चेतावनी दी है। सिस्टर निवेदिता मिशन ट्रस्ट के महासचिव रांतिदेव सेन गुप्ता ने कराई थी, महाजाति सदन की बुकिंग।

इस संपत्ति के प्रबंधन ने पहले तो पुलिस से एनओसी लाने के बहाने टरकाया। फिर मरम्मत का हवाला देकर बुकिंग रद्द कर दी। दरअसल विवाद विजयदशमी और मुहर्रम एक साथ पड़ जाने और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कुछ बंदिश लगाने के ममता सरकार के फैसले से हुआ है। हिंदू संगठनों ने इसके विरोध में विजयदशमी को सशस्त्र जुलूस निकालने का फैसला किया है। सरकार ने पहले तो भागवत के कार्यक्रम को रद्द किया और फिर अमित शाह की जनसभा के लिए भी इनकार कर दिया। नतीजतन भाजपा को अमित शाह की सभा रद्द करनी पड़ी। पहले से ही चल रही थी यों तो तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच खींचतान। पर ममता के इस फैसले ने कटुता और बढ़ा दी। अमित शाह को तो प्रशासन ने यह पेशकश भी कर दी कि चाहें तो स्टेडियम में 27 से 30 सितंबर के बीच कर सकते हैं अपनी सभा। उस दौरान खाली है यह स्टेडियम। भाजपा के पश्चिम बंगाल के महासचिव सायंतन बासु परेशान हैं कि इतनी जल्दी तो दूसरा कोई बड़ा सभाकक्ष कोलकाता में मिल नहीं सकता। सो अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की सभा रद्द करने में ही भलाई समझी। उधर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों पर यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया है कि स्टेडियम की बुकिंग का फैसला न तो पार्टी के नेता करते हैं और न सरकार के मंत्री। तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी के अनुसार तो भाजपा को हर मामले में सियासी साजिश की बू ही नजर आती है। वैसे भी नेताजी इंडोर स्टेडियम भरने लायक भीड़ कहां से लाते भाजपाई।

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