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राजपाट: मूंछ का सवाल, झूठे कहीं के

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेताओं के चुनावी भाषणों में न कोई मर्यादा दिखती है और न शिष्टाचार।
Author February 13, 2017 04:49 am
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी (बाएं) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

मूंछ का सवाल

देश का बड़ा सूबा नहीं है उत्तराखंड। पुराना तो खैर ज्यादा है ही नहीं। कुल पांच ही तो सांसद तो दिल्ली भेजता है यह पर्वतीय सूबा। लेकिन सूबे का विधानसभा चुनाव जरूरत से ज्यादा अहम बन चुका है देश की दोनों बड़ी पार्टियों के लिए। कांग्रेस जहां अपनी सत्ता बचाने के लिए तमाम कवायद कर रही है, वहीं भाजपा ने इसे प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। गोवा, पंजाब, मणिपुर और यूपी में तो सरकार के गठन को लेकर कोई आत्मविश्वास दिखता नहीं। ले-देकर सारी उम्मीदें उत्तराखंड पर ही टिकी हैं। सो, साम-दाम-दंड-भेद हर हथकंडा अपना रही है देश की सत्तारूढ़ पार्टी। दोनों ही पार्टियों के नेताओं के चुनावी भाषणों में न कोई मर्यादा दिखती है और न शिष्टाचार। हरीश रावत खुद को पांडव, भाजपा को कौरव और सूबे की जनता को कृष्ण बता रहे हैं तो भाजपा के सूबेदार अजय भट्ट हरीश रावत को दुर्योधन। रावत जहां अपनी पार्टी की तरफ से चुनावी जंग में इकलौते सेनापति हैं, वहीं भाजपा ने पूरा अमला झोंक दिया है। आखिर में हरिद्वार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा भी करा दी। इससे पहले सूबे में परिवर्तन महारैली के बहाने देहरादून की रैली से किया ही था चुनाव प्रचार का श्रीगणेश। मोदी की रैली में भीड़ खूब आई थी सो, अपने रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सलाह मान राहुल ने जवाबी रैली का विचार छोड़ने में ही समझी भलाई। रैली के बजाए रोड शो से ही कर ली चुनाव प्रचार की इतिश्री।
झूठे कहीं के

सच तो सियासत के सूरमा बोल ही नहीं सकते। झूठ में पारंगत होना ही सबसे बड़ा हुनर है अब सियासत का। यूपी में शनिवार को पहले चरण का मतदान निपटा तो हर किसी ने अपने तईं जीत के दावे कर दिए। भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को लखनऊ में जुमलेबाजी में सबको पछाड़ दिया। फरमाया कि उनकी सूचनाओं के हिसाब से तो 73 में से कम से कम 50 सीटें भाजपा जीत रही है। यानी जता दिया कि उनका चश्मा इस चुनाव को अभी 2014 के लोकसभा चुनाव के नजरिए से ही आंक रहा है। जब इन 15 जिलों की सभी लोकसभा सीटों पर तो कमल खिल गया था, लेकिन विधानसभा सीटवार देखा गया तो पार्टी की बढ़त 50 सीटों पर थी, सभी 73 पर नहीं। कौन नहीं समझता कि इस समय लोकसभा चुनाव जैसी हवा नहीं है भाजपा की। गनीमत बसपा और सपा ने रखी। औरों से अपने को इस चरण में काफी आगे तो जरूर बताया पर सीटों की संख्या की भविष्यवाणी से गुरेज किया। पाठकों को बता दें कि 2012 के विधानसभा चुनाव में इन 73 सीटों में बसपा-सपा को 24-24, भाजपा को 11, रालोद को 9 और कांग्रेस को 5 मिली थी। दरअसल झूठे दावे करना नेताओं की मजबूरी ठहरा। अभी तो छह चरण का मतदान बाकी है। हकीकत बयां करेंगे तो आगे नैया भंवर में फंसने का खतरा जो बढ़ जाएगा।

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  1. R
    raj
    Feb 13, 2017 at 11:00 am
    पेड न्यूज़ फॉर कांग्रेस :P
    (0)(0)
    Reply
    1. P
      Prasham
      Feb 13, 2017 at 7:58 am
      This is no reporting. This is freaking opinion that you are trying to force on others.#shame
      (0)(0)
      Reply