December 06, 2016

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राजपाट: दोधारी तलवार, संघी प्रयोग. चौपट धंधा

संघियों के पसंदीदा विषय मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को भी खूब भाते हैं। तभी तो इन मुद्दों पर साल में दो-तीन बड़े आयोजन वे लगातार करते आ रहे हैं।

Author November 14, 2016 04:56 am
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ता। (फाइल फोटो)

दोधारी तलवार

मणिपुर फिर सुर्खियों में है। वजह भले गैरवाजिब हो। बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा। मुद्दा पूर्वोत्तर के उग्रवाद प्रभावित इस सूबे में दो नए जिलों के गठन का है। सदर हिल्स और जिरीबाम के विरोध में नगा संगठन अशांत हैं। नगा बहुल इलाकों पर प्रतिकूल असर का जोखिम दिख रहा है। नगा लोगों की रजामंदी नहीं लिए जाने का मलाल अलग है। तभी तो अतीत की दुहाई दे रहे हैं। जब हर समझौते में यह बात दोहराई गई थी कि नए जिले बनाते वक्त नगाओं की पैतृक भूमि से छेड़छाड़ नहीं होगी। पर सूबे की ईबोबी सिंह सरकार को तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की फिक्र है। वैसे भी सदर हिल्स को पूर्ण जिला बनाने की मांग पांच दशक पुरानी है।

यह बात अलग है कि सदर हिल्स जिला मांग समिति ने इसे लंबे अंतराल के बाद 2011 में नए सिरे से उठाया था। सो, चुनाव जीतने के फेर में पड़े ईबोबी सिंह ने सेनापति जिले का बंटवारा कर सदर हिल्स और जिरीबाम सबडिवीजन दोनों को एक अलग जिले की दे डाली। उग्रवादी एनएससीएन का इसाक-मुइवा गुट ही नहीं दूसरे नगा संगठन भी इस फैसले के विरोध में सड़क पर उतर गए हैं। सो दबाव में फिलहाल तो सरकार ने फैसला स्थगित कर दिया है। पर जिले के समर्थक भी तो कमजोर नहीं है। सदर हिल्स जिला मांग समितिने भी नए सिरे से आंदोलन छेड़ने की धमकी दे डाली है। आम आदमी की हालत इससे दो पाटन के बीच फंसने जैसी हो गई है। सूबे के ये दोनों जिले नगा और आदिवासी बहुल ठहरे। अपने हितों से छेड़छाड़ को चुपचाप क्यों सहें वे।

संघी प्रयोग

कभी गुजरात को गवर्नेंस के मॉडल के तौर पर पेश करने की सोची थी भाजपा ने। तब केशु भाई पटेल थे सूबे के मुख्यमंत्री। लेकिन वक्त ने फोकस बदल दिया। तभी तो अब संघियों की नजर में मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार है एक मॉडल सरकार। हो भी क्यों न? राष्ट्रवाद, भारतीय दर्शन, संस्कृति और अस्मिता जैसे मुद्दों पर चिंतन, मंथन और विमर्श का माकूल राष्ट्रीय मंच जो दिया है इस सरकार ने। संघियों के पसंदीदा विषय मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को भी खूब भाते हैं। तभी तो इन मुद्दों पर साल में दो-तीन बड़े आयोजन वे लगातार करते आ रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को राष्ट्र सर्वोपरि अवधारणा से जुड़े अनेक पहलुओं पर विचार मंथन शुरू हुआ। नाम रख दिया, लोक मंथन।

शनिवार को भाजपा महासचिव राममाधव ने बौद्धिक पिलाया कि सत्तर साल पुरानी व्यवस्था को बदलना जरूरी है। मौजूदा व्यवस्था को खांटी संघी ने अंग्रेजों की विरासत करार दिया। सांसदों और विधायकों का और ज्यादा शक्तिशाली होना राममाधव को अखरा। उन्हें जनप्रतिनिधियों का शिक्षक से लेकर सिपाही तक का तबादला कराना कतई स्वीकार नहीं। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका सभी में सुधार की जरूरत रेखांकित कर दी। भारतीयता और भारत की आत्मा से मेल नहीं खाने वाली है राममाधव की नजर में मौजूदा भारतीय व्यवस्था। संघी अतीत वाले पत्रकार राम बहादुर राय ने वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में बने संविधान समीक्षा आयोग की रिपोर्ट की याद दिलाई। लोक मंथन के पीछे स्वामी अवधेशानंद गिरि, राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली और आरएसएस के सुरेश सोनी की सक्रिय भूमिका है। भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने भी विचारधारा पर वकालत की। वक्ताओं ने आरएसएस की विचारधारा को भारतीय विचारधारा बताया। मंथन पूरे तीन दिन चलेगा।
चौपट धंधा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद कर उन्हें वापस लेने का एलान किया तो मध्य प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र पर असर बिजली के करंट की माफिक दिखा। अखबारों और चैनलों से संपत्ति की बिक्री के विज्ञापन एकदम फुर्र हो गए। बाजार पर भी असर दिखाई दे गया। छोटे दुकानदार खाली बैठे मक्खी मारते नजर आए। हां, इस फैसले से नगर निगमों, बिजली कंपनियों और रेलवे की जरूर चांदी हो गई। बकायादारों ने दरियादिली दिखाते हुए पुराने बकाया भी बिना मांगे चुका दिए।

अकेले भोपाल नगर निगम के पास तीन दिन में दस करोड़ रुपए का राजस्व आ गया। बिजली कंपनी का संग्रह भी एकदम दोगुना हो गया। बंद कर दिए गए नोटों का खौफ देखिए कि जो बैंकखाते सालों से निर्जीव पड़े थे उनमें भी प्राण पड़ गए। पर जिले की लोक अदालत में आए वादकारियों को शनिवार को बदले माहौल ने निराश कर दिया। आर्थिक विवादों में कोई सुलह जो नहीं हो पाई। होती भी कैसे? लेन-देन के लिए नई करेंसी लेकर तो कोई आया नहीं था।

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First Published on November 14, 2016 4:56 am

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